Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

कहिन

पड़ोस में गोली चली, जान गई तब मैं सोचने लगा….

[caption id="attachment_16968" align="alignleft"]रवि रायरवि राय[/caption]क्यूं बनाई गोली? : मैं पिछले 3 साल से उसे रोज देखता था क्यूंकि इत्तफाक से बगल में ही मेरा घर था. उसकी बीवी के हाथों की मेहंदी भी शायद ही उतरी हो, चूँकि उसकी शादी को दो से तीन महीने ही हुए होंगे, सो उसके पीछे एक और जिंदगी कि खुशियां लुट गयी. हाँ मैं, इतना समझता था कि उसका पूरा डेडीकेशन उसके अपने काम में था. रस्तोगी ज्वेलर्स, यह नाम ही उसका चेहरा जहन में ला देता है और कलेजे में एक टीस-सी होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पड़ोस में था. वरना सैकड़ों लोगों के मरने की खबरें आया करती हैं, हम लोगों पर असर नहीं होता. इसी कड़ी में ये भी खबर आई कि- ”कल शाम नई दिल्ली, मयूर विहार में चार लुटेरों ने एक ज्वेलरी की दुकान लूट ली और गोलियां बरसा कर एक की जान ले ली.”  

रवि रायक्यूं बनाई गोली? : मैं पिछले 3 साल से उसे रोज देखता था क्यूंकि इत्तफाक से बगल में ही मेरा घर था. उसकी बीवी के हाथों की मेहंदी भी शायद ही उतरी हो, चूँकि उसकी शादी को दो से तीन महीने ही हुए होंगे, सो उसके पीछे एक और जिंदगी कि खुशियां लुट गयी. हाँ मैं, इतना समझता था कि उसका पूरा डेडीकेशन उसके अपने काम में था. रस्तोगी ज्वेलर्स, यह नाम ही उसका चेहरा जहन में ला देता है और कलेजे में एक टीस-सी होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पड़ोस में था. वरना सैकड़ों लोगों के मरने की खबरें आया करती हैं, हम लोगों पर असर नहीं होता. इसी कड़ी में ये भी खबर आई कि- ”कल शाम नई दिल्ली, मयूर विहार में चार लुटेरों ने एक ज्वेलरी की दुकान लूट ली और गोलियां बरसा कर एक की जान ले ली.”  

एक मौत। क्या यह हममें कोई संवेदना पैदा कर पाया, शायद नहीं? वैसे सचाई भी यही है क्यूंकि हमें तो आदत सी पड़ गयी है– कहीं आतंक ने 10 लोगों की जान ले ली तो कहीं नक्सल ने 25 को हमेशा की लिए सुला दिया. यह सिलसिला थमनेवाला नहीं. कुछ असमाजिक तत्त्वों ने जिस तरह कुछ लाख रुपये के लिए एक की जान ले ली, यह उन लोगों के लिए तो एक न्यूज़ की तरह है जो उस सज्जन इंसान को जानते नहीं होंगे पर उन पर क्या बीत रही होगी जो उनके अपने थे. ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्यूंकि मैं भी रोज न्यूज़ देखता हूं या पढता हूं पर अभी जो महसूस कर रहा हूं उसे बयां नहीं कर पा रहा हूँ कि यह गुस्सा है या खेद. जब मौत पड़ोस में आती है तब आदमी जाग जाता है, सोचने लगता है.

इन सबके पीछे कारण क्या है और कौन-कौन लोग हैं, इसका आकलन करें तो एक लम्बी लिस्ट तैयार होगी. पर मुख्य कारणों में सामाजिक असंतुलन, निजी महत्वाकांक्षा ही समझ में आती है.  भारत में 2008-2009 में पर कैपिटा इनकम 37490 रुपये थी. क्या यह पूरी तरह संतुलित है? और दूसरी तरफ, यह याद करना भी जरूरी है कि “संतोषम परम सुखम”. लेकिन लोगों की मानसिकता सब कुछ हासिल करने की होड़ में लग गयी है. कुछ हद तक हमने ही यह सामाजिक ताना-बाना बना दिया है कि जो संपन्न है, वही सम्मान का पात्र है, फिर चाहे वह कैसे भी हो. एक मानसिक दबाव, जो जिंदगी को बोझिल बनाती है कि जिंदगी में सफल कैसे बनें. हालाँकि यह ठीक भी है और अपनी स्थिति से संतुष्ट होकर जीवन बिताना भी शायद जीवन को नीरस बना दे, पर क्या इसके लिए संकुचित महत्वाकांक्षा विकसित करना सही है? क्या वे लुटेरे जो सत्तर रुपये की गोली खर्च कर कुछ रकम लूट लिए, वे उस पैसे से इन्ज्वाय कर पायेंगे? पैसे के लिए जान??

लेखक रवि राय आईबीएन7 न्यूज चैनल से जुड़े हुए हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. dinesh nagar

    February 19, 2010 at 3:34 am

    :'( You are Right mere dost.. ! Is duniya mein jaan ki koi kimaat nahi, ager hoti to yeah sab nahin hota. Issi Insaan ne paisa banaya or yahi insaan is paise k liye jaan tak le leta hai. Kya faida aise paise ka ??? Hum sab zindgi bhar kamate hain apne or apni family k liye, Yeah to humari planing hai Par Upar vale ki kya planing hai kisiko nahin pata ??? Jiss paise ko hum kama rahey hain kya pata vo humara hoga bhi ya nahin ???:'(

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...