पुणे में अजय बाफना के यहां छापामारी से पता चला कि मधु कोड़ा तो छोटी मछली है, भ्रष्टाचार की बड़ी मछलियां तो दिल्ली में हैं और उन्हीं के हाथों में है केंद्रीय सरकार का रिमोट : दिल्ली में एक अशोक चितकारा रहते हैं. वे भ्रष्ट नेताओं, अफसरों आदि के गोपनीय एकाउंट स्विस बैंक में खुलवाते हैं. इन स्विस बैंकों के एकाउंटों में नेता व अफसर ब्लैक मनी जमा करते हैं. मधु कोड़ा मामले में दूसरे दौर की छापेमारी के दौरान आयकर विभाग की टीम चितकारा के दिल्ली स्थित आवास पर भी पहुंची. यहां जो दस्तावेज मिले हैं, उसे देखकर आयकर विभाग के अफसरों की आंखें खुली की खुली रह गई है. छापा मारने वाली टीम के कई अफसरों को उसी समय लग गया कि जल्द ही छापामार कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए उपर से दबाव आ सकता है. छापे की कार्यवाही अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि करीब 70-80 जगहों पर एक साथ छापेमारी अभियान का नेतृत्व करने वाले उज्जवल चौधरी को हटाने का आदेश जारी हो गया.
बिहार-झारखंड के भाजपा नेता सरयू राय तो साफ-साफ कहते हैं कि उन्होंने ही आयकर विभाग को दिल्ली के अशोक चितकारा के मामले में जानकारी दी थी. श्री राय ने बताया कि वह खुद खाता खुलवाने के लिए ग्राहक बन कर चितकारा से मिलने गये थे. इस दौरान उन्हें देश व बिहार-झारखंड राज्य के कई लोगों के खातों के कागजात दिखाये गये थे, जिनके स्विस बैंकों में खाते हैं. उन्होंने आयकर विभाग को अंडमान, गिरिडीह, कोलकाता और दिल्ली में निवेश की भी विस्तृत जानकारी दी है. सरयू राय का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर हुई छापामारी का अभी परिणाम नहीं आया है. छापामारी के दौरान सामने आयी बातों की अभी समीक्षा भी नहीं हुई कि श्री चौधरी को हटा दिया गया.
इसी तरह पुणे में एक अजय बाफना के यहां आयकर विभाग की टीम पहुंची तो वहां भी ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिससे पता चलता है कि मधु कोड़ा तो छोटी-मोटी मछली है. भ्रष्टाचार के असली दिग्गज तो दिल्ली में निवास करते हुए राज्य व देश की राजनीति करते रहते हैं. चितकारा और बाफना के यहां मिले दस्तावेजों से पुख्ता प्रमाण मिलते हैं कि जो जांच मधु कोड़ा को लेकर शुरू हुई थी, उसके दायरे में अब अन्य नेता भी आ रहे हैं. अपने काले धन को सफ़ेद कराने वाले ऐसे नेताओं ने जांच रुकवाने और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करने के उद्देश्य से उज्जवल चौधरी को योजनाबद्ध तरीके से किनारे कर दिया गया. पूर्व की मधु कोड़ा सरकार को समर्थन देने वाले लोग नहीं चाहते कि यह जांच अब आगे चले. भाजपा नेता सरयू राय ने आरोप लगाया है कि झारखंड में सबसे बड़ी लूट विद्युत विभाग के मद में भेजी गयी राशि में हुई है. इसी कारण आनन-फानन में बिजली बोर्ड के चेयरमैन एके चुघ का स्थानांतरण किया गया है. एके चुघ को हटाने के लिए राज्यपाल के कार्यकाल में भी कोशिश की गयी थी.
-यशवंत












Hanuman Mishrra
February 20, 2010 at 11:58 am
जीवन के सफ़र में ऐसे भी मोड़ हैं आते,
जहाँ चल देते हैं अपने भी तोड़ के नाते.
कहीं धीरज छूट न जाये, तू देख सँभालते जाना रे
उसी राह पे राही चलते जाना रे
जो राह चुनी तुने, उसी राह पे राही चलते जाना रे
keshav
February 20, 2010 at 2:17 pm
yeshwantG….aap ne jis bebaaki se pura khulasa kiya hai vo taarif k kaabil hai. media waakaiie m GandhiG k teen bandar ho gayi hai….Aankh….Kaan…..Muh……sab band. pata nahi ye media wale apane aapko fir India….Janta…. Ka Margdarsak kyun kis muh se kahte honge???????;D
KAMAL KAPUR
February 23, 2010 at 7:05 am
IS DESH KA YARO KYA HOGA !!