भोपाल से आ रही सूचना के मुताबिक पीपुल्स समाचार से कई लोग कार्यमुक्त हो गए हैं. इनमें प्रांतीय डेस्क इंचार्ज सूर्यकांत पाठक, सेन्ट्रल डेस्क के बडोला, चीफ सब एडिटर मिलिंद कुलकर्णी, रिपोर्टर नितिन दुबे और सब एडिटर विश्वदीप नाग शामिल हैं.
गौरतलब है की कुछ दिनों पूर्व ही यहां अवधेश बजाज सलाहकार बन कर आए हैं. वे अब अपने हिसाब से टीम पुनर्गठित कर रहे हैं. उनके काम करने का अलग अंदाज है. तेवरदार खबरों और स्तरीय पत्रकारिता के लिए विख्यात अवधेश पीपुल्स की टीम को कसने में जुट गए हैं. संभव है आने वाले दिनों में कुछ और लोग यहां आएं-जाएं.












avichal jain
February 27, 2010 at 1:36 am
पीपुल्स के तेवरों ने सभी अखबारों की नींद उड़ाई
भोपाल में सभी समाचार पत्र अपनी रणनीति बदलने के लिए विवश
भोपाल मध्यप्रदेश के चार शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर व जबलपुर से प्रकाशित दैनिक पीपुल्स समाचार पत्र के बदले हुए तेवरों और ले आउट ने मप्र के सभी समाचार पत्रों की नींद उड़ा दी है। युवा संपादक अवधेश बजाज के ज्वाइन करते ही इस अखबार के तेवर अचानक बदल गए हैं। पिछले बारह दिनों में अखबार ने 9 नई मैग्जीन बाजार में उतार दी हैं। समाचारों में राजनीतिक खबरों को गौण करके सामाजिक सरोकार की खबरें बढ़ गई हैं। भोपाल में समाज से सरोकार और उर्दूनामे ने तो पहले हफ्ते में ही धूम मचा दी है। समाचार पत्र प्रबंधन ने पहली बार अपने नए सलाहकार अवधेश बजाज के आने पर उनके साथ पूरी टीम के फोटो लगे होर्डिंग से भोपाल शहर को पाट दिया है। संभवतय पहली बार किसी अखबार मालिक ने अपने संपादीय टीम को इतना महत्व दिया है।
मप्र में आजकल अखबारों के दफ्तरों में पीपुल्स समाचार की खबरों पर चर्चा मुख्य एजेन्डा बन गया है। केवल पीपुल्स ने आज अमुक खबर छापी है…पीपुल्स ने आज एक और पत्रिका लांच कर दी है….. पीपुल्स ने राजनेताओं और नौकरशही पर सीधे हमला बोल दिया है…..इन टिप्पणियों के साथ अखबारों के दफ्तरों में बैठक शुरू होती है और प्रबंधन के निर्देश मिलते हैं कि बजाज की लाईन फालो करा नहीं तो पिछड़ जाओगे। अवधेश बजाज ने 15 फरवरी 2010 को पीपुल्स गु्रप में सलाहकार के रुप में ज्वाइन किया था। उनके आते ही कई ऐसे पत्रकार जो आज भी उन्नीसवीं शताब्दी की पत्रकारिता करते हैं, ने अपना सामान समेट लिया। पीपुल्स के स्थानीय संपादक राघवेन्द्र सिंह, उनके सहयोगी राजेश चतुर्वेदी एवं धर्मेन्द्र पैगवार उसी दिन अवकाश पर चले गए थे। यहां बता दें कि राघवेन्द्र सिंह वैसे भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से रिश्तेदारी के चलते स्थानीय संपादक बनाए गए थे। राजेश को राघवेन्द्र ने जबरन खपा रखा था। धर्मेन्द पैगवार को पता था कि बजाज के आने के बाद वे बसें चलाने का अपना निजी कारोबार नहीं कर पाएंगे।
पांच अन्य लागों ने भी पीपुल्स समाचार पत्र छोड़ा है। बजाज दस नए लोगों की टीम लेकर पीपुल्स समाचार पत्र आए थे। इनके स्थान पर किसी को तो जाना ही था, लेकिन बजाज ने पत्रकारों का नुक्सान न करने का मन बना लिया है, सो उन्होंने अपने साथ कदम ताल न कर सकने वाले पत्रकारों को जबलपुर ट्रांसफर का प्रस्ताव दे दिया। जो जबलपुर नहीं जाना चाहते उन्होंने पीपुल्स को बांय बांय कर दिया, इसमें किसी को एतराज भी नहीं है।
फिलहाल मध्यप्रदेश में पीपुल्स समाचार पत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय तक अमेरिका में रहे पीपुल्स समाचार पत्र के मालिकों को अखबार के जिन तेवरों की जरूरत थी, वह एक साल बाद जाकर मिली है। लेकिन हम जैसे बजाज के मित्र उन्हें यहीं सलाह देते हैं कि – गुस्से पर नियंत्रण रखें और छह माह के बजाय पीपुल्स में छह वर्ष पूरे करने का लक्ष्य बनाएं। यह सलाह केवल बजाज के हित के लिए नही,ं मप्र की पत्रकारिता के हित में हैं, क्योंकि बजाज जैसे पत्रकारों के कारण वास्तविक पत्रकारिता जीवित है। वर्ना तो पूरे कुएं में भंग गिर चुकी हैं। आमीन …..
Dr.Rajesh sharma
February 27, 2010 at 1:24 pm
awadesh ji is taking steps for good helth of PEOPLES.
Dr.Rajesh
राजेश अग्रवाल
February 27, 2010 at 10:41 pm
ये सब कब तक होता रहेगा? बर्तन मांजने वाली नौकरानी से गये गुजरे हैं हम लोग. क्या हम सब मिलकर कोई ऐसा उपाय नहीं कर सकते कि एक निश्चित अवधि तक नौकरियां सुरक्षित रहे. पार्लियामेन्ट या वेज बोर्ड को कोई फैसला करना चाहिए-जैसे 3 साल से कम के अनुबंध पर किसी को नहीं रखा जाएगा.
Ramsukh Lal
February 28, 2010 at 5:02 am
peoples samachar ki khabar me bataya gaya hai ki 5 patrakar karyamukta huye hai hai jabki doosra pahlu yeh hai ki varishth patrakar milind kulkarni, suryakant pathak, nag , nitin dube ko jabalpur tabadla kiya gaya aur unhe agle din naye sthan par pad grahan karneko kaha gaya.Milind ji aur nitin ji ne istifa de diya, jabki pathakji, nagji ne chhuti ke avedan bhej diye. shri badolaji ne bhi bahar jane se inkar karte huye istifa de diya,
inke alawa suchna hai ki circulation vibhag ke gm santosh singh solanki, peoplepost ke editos lalit shastri aur kartoonist kailash dubey ne bhi istifa de diya haio. holi ke bad bhopal/indore/gwalior/jabalpur ke kai sampadakiya sathi istifa de sakte hai.
anujasanghvi
February 28, 2010 at 7:29 pm
aisa kyon hota hai ki jo naya person kursi per baithta hai bo apne logon ko hi apne aaspaS DEKHANA CHAHTA HAI FIR CHAHE BO REPORTER KAISA BHI KYON NA HO. BAJAJ BHI YAHI KER RAHEN HAIN. JO EXPERIENCED PERSON HAIN SALONE SE JOURNALISM KER RAHEN HAIN UNHEN HATANA EK TARAH KI KHUNNAS HI HAI. BAJAJ SAHAB TO TODNE KI RAJNITI MAIN NO ONE HAIN. BO KHUD KAHAN EK JAGAH TIK PATEN HAIN.
nalini singh
March 2, 2010 at 12:49 am
jo log kursi todne wale hain , vahi hataye ja rahe hain. kamchor patrakar bajaj ji ke saath nahin chal sakate. bajaj ji ke aalochak yah bhi dekhen ki unhone saat din mein akhabar ko kitna sudhar diya hai.