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एफटीवी को कई साल के लिए बैन करें

चैनलों को क्यों लगता है कि ये भारत है, यहां कोई कुछ भी कर सकता है, बहुत नुकसान नहीं होने वाला : सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने फैशन टीवी उर्फ एफटीवी पर 12 से 21 मार्च तक के लिए पाबंदी लगा दी है. इस चैनल को इस अवधि में कहीं भी नहीं दिखाया जा सकता है. 4 सितंबर 2009 को इस चैनल पर प्रसारित एक कार्यक्रम में महिलाओं को टापलेस उर्फ कमर से उपर के हिस्से को कपड़ा रहित दिखाया था. ये सभी महिलाएं एक कार्यक्रम में टापलेस ही शामिल हुईं थीं और इसका प्रसारण चैनल ने किया था. मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण को शालीनता के खिलाफ माना और केबल नेटवर्क रूल्स 1994 की कई धाराओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दस दिनों तक चैनल के प्रसारण पर पाबंदी लगा दी है. एफटीवी के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.

चैनलों को क्यों लगता है कि ये भारत है, यहां कोई कुछ भी कर सकता है, बहुत नुकसान नहीं होने वाला : सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने फैशन टीवी उर्फ एफटीवी पर 12 से 21 मार्च तक के लिए पाबंदी लगा दी है. इस चैनल को इस अवधि में कहीं भी नहीं दिखाया जा सकता है. 4 सितंबर 2009 को इस चैनल पर प्रसारित एक कार्यक्रम में महिलाओं को टापलेस उर्फ कमर से उपर के हिस्से को कपड़ा रहित दिखाया था. ये सभी महिलाएं एक कार्यक्रम में टापलेस ही शामिल हुईं थीं और इसका प्रसारण चैनल ने किया था. मंत्रालय ने इस कार्यक्रम के प्रसारण को शालीनता के खिलाफ माना और केबल नेटवर्क रूल्स 1994 की कई धाराओं के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दस दिनों तक चैनल के प्रसारण पर पाबंदी लगा दी है. एफटीवी के साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.

वर्ष 2007 के अप्रैल महीने में भी इस चैनल को कई दिनों तक दिखाए जाने पर मंत्रालय ने पाबंदी लगाई थी. तब भी एफटीवी पर नंगी महिलाओं के प्रसारण को मंत्रालय ने मुद्दा बनाया था. तब अफसरों ने वादा किया था कि वे आगे से ऐसी गलती नहीं करेंगे, पर एफटीवी ने फिर वही गलती की. सवाल यह है कि क्या वादा करके गलती दुबारा करने पर चैनल का प्रसारण हमेशा के लिए नहीं रोक देना चाहिए. या फिर कम से कम दो-चार साल तो दिखाने से मना ही कर देना चाहिए ताकि चैनल वालों को भी समझ में आ जाए की भारतीय कानून चूंचूं का मुरब्बा नहीं है जिसे मानो या न मानो, कोई फरक नहीं पड़ता है.

दीपक कुमार

सिंगापुर

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0 Comments

  1. कमल शर्मा

    March 12, 2010 at 4:52 am

    फैशन टीवी को कई साल के लिए बैन कर देना इस समस्‍या का हल नहीं है। समूचे समाज में बंद और खुले में क्‍या क्‍या हो रहा है इसे हर कोई जानता है। कहीं पर लोकल चैनल और कहीं विदेशी चैनल, कही केबल टीवी…सेक्‍स और नंगापन परोसा जा रहा है। देर रात कई लोकल चैनलों पर ब्‍लू फिल्‍मों तक का प्रसारण हो रहा है…कई ऐसे सिनेमाघर है, जो संकरी गलियों में हैं, वहां जाइए आपको बाहर पोस्‍टर मिलेगा मेरा गांव मेरा देश और अंदर चल रही फिल्‍म होती है जलती जवानी, गांव की भाभी, हसीना को होंठ। इन सिनेमाघरों में भी काफी पब्लिक आती है। पुलिस को भी सब पता होता है। क्‍या क्‍या रोकेंगे। रोकना है तो पूरी सफाई करनी होगी। जिन भारतीय राष्‍ट्रीय चैनलों पर सांप और बंदर, भूत और अपराध कथाओं का प्रसारण होता है वह भी नए समाज के लिए अच्‍छा नहीं है। इस बीमारी को भी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए सरकार को।

  2. surendra joshi

    March 12, 2010 at 11:37 pm

    कैसी बाते कर रहे हो कमल जी………यूं तो हमाम में सभी नंगे होते है मगर इसका मतलब ये तो नही की वो नंगा पन जिसे भले ही आप बाहर नही देखना चाहते मगर घर में बीवी बच्‍चो के साथ बैठ कर टीवी देखते समय चैनल बदलते समय ही सही…..आपके ड्राईंग रूम तक तो आ ही गया ना….फिर भारतीय संस्‍कति में जहर घोल रहे ऐसे चैनलो के प्रसारण पर रोक लगाने में भला क्‍या आपत्ति है…..

  3. gulshan saifi

    March 18, 2010 at 6:17 am

    janab sirf f tv ban karne se kuch nahi hoga.jarurat hai sahi sex education ki

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