विदेशी मामले और कूटनीति (फारेन अफेयर्स एंड डिप्लोमेसी) पर आधारित एक मैग्जीन वर्ष 1997 में शुरू की गई थी इंडियन जरनल आफ डिप्लोमेसी नाम से. दो साल बाद यह मैग्जीन बंद हो गई थी. उस समय दो महीने पर एक बार यह मैग्जीन निकलती थी और इसका मूल्य 200 रुपये हुआ करता था. अब इस मैग्जीन को फिर से लांच करने की तैयारियां चल रही हैं.
1997 में जब यह मैग्जीन शुरू की गई थी तो इसे पांच-छह लोगों की एक टीम ने लांच किया था, जिसमें पत्रकार के. पार्थ सारथी भी हुआ करते थे. तब वे छात्र थे और कई छात्रों के संग मिलकर विदेशी मामलों और कूटनीति पर पहली निजी मैग्जीन लाने में सफल हो पाए थे. कई वजहों से मैग्जीन का संचालन बंद करना पड़ा लेकिन पत्रकार के. पार्थ सारथी ने इस मैग्जीन के सारे अधिकार खुद खरीदकर अब इसे री-लांच करने जा रहे हैं. के. पार्थ सारथी ईटीवी, वीओआई, जी समेत कई मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं और दिल्ली के अलावा हैदराबाद में भी पत्रकारिता कर चुके हैं.
भड़ास4मीडिया से बातचीत में के. पार्थसारथी ने बताया कि सरकार और विदेशी दूतावासों की तरफ से विदेशी मामलों में पर मैग्जीन तो निकाली जाती है लेकिन निजी तौर पर किसी पत्रकार द्वारा विदेशी मामलों व कूटनीति पर अभी तक कोई खास मैग्जीन नहीं हैं. अगर कोई हैं भी तो पता नहीं लेकिन 1997 में जब ‘इंडियन जरलन आफ डिप्लोमेसी’ को लांच किया गया था तो यह पहला निजी प्रयास था. उन्होंने बताया कि इस मैग्जीन की री-लांचिंग की तैयारियां तेज हो गई हैं. अगले हफ्ते तक डमी आने की संभावना है. अंग्रेजी में प्रकाशित होने जा रही इस मैग्जीन का संचालन एक एडिटोरियल बोर्ड करेगा जिसमें कई वरिष्ठ लोग रखे गए हैं. 36 पेजों की इस मैग्जीन का दाम क्या होगा, इसे तय किया जाना बाकी है.
अगर कोई किसी भी तरह से इस मैग्जीन के संचालन में योगदान देना चाहता है तो वह [email protected] के जरिए के. पार्थसारथी से संपर्क कर सकता है.











