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नए चैनलों के लिए उपग्रहों में जगह नहीं

नए टेलीविजन चैनलों की रफ्तार को ब्रेक लग सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने मान लिया है कि नए चैनल चलाने के लिए उपग्रहों में अब जगह नहीं बची है। ट्राई की तरफ से सोमवार को जारी किए मशविरा पत्र में कहा गया है कि चैनल इसरो द्वारा अगले चार सालों के भीतर छोड़े जाने वाले उपग्रहों का इंतजार करें।

नए टेलीविजन चैनलों की रफ्तार को ब्रेक लग सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (ट्राई) ने मान लिया है कि नए चैनल चलाने के लिए उपग्रहों में अब जगह नहीं बची है। ट्राई की तरफ से सोमवार को जारी किए मशविरा पत्र में कहा गया है कि चैनल इसरो द्वारा अगले चार सालों के भीतर छोड़े जाने वाले उपग्रहों का इंतजार करें।

या फिर इनकोडिंग तकनीक में सुधार कर अपनी क्षमता बढ़ाएं। इस पर सभी पक्षों से 5 अप्रैल तक सुझाव मांगे गए हैं जिसके बाद ट्राई अंतिम दिशा-निर्देश तैयार करेगा। ट्राई के अनुसार अभी इसरो की इनसेट सीरिज के 10 उपग्रहों में 182 ट्रांसपोंडर हैं। इसमें सी बैंड, एक्सटेंडेट सी बैंड, केयू और एस बैंड हैं। इसके अलावा इसरो ने 53 ट्रांसपोंडर विदेशी उपग्रहों में किराए पर लिए हैं। यहां बता दें कि सी बैंड और एक्सटेंड सी बैंड से भारत और सार्क देशों में प्रसारण होता है जबकि केयू बैंड से सिर्फ भारत में प्रसारण होता है। इन ट्रांसपोंडर का इस्तेमाल प्रसारण, वी सैट, डीटीएच, हिट्स और डीएसएनजी सेवाओं के लिए हो रहा है।

ट्राई ने इसरो के हवाले से कहा है कि किसी भी ट्रांसपोंडर में अब एकमुश्त खाली स्थान नहीं बचा है। जबकि अंतरिक्ष विभाग के पास अभी 200 केयू बैंड और 25 सी बैंड ट्रांसपोंडर की डिमांड आई हुई है। इसे पूरी कर पाने में विभाग ने असमर्थता जताई है। उसका कहना है कि इस जरूरत को अगले चार सालों में छोड़े जाने वाले नए उपग्रहों से ही पूरा किया जा सकता है।

ट्राई का दूसरा सुझाव यह है कि चैनल अपनी इनकोडिंग तकनीक में बदलाव करें। मसलन, अभी तमाम चैनल एमपीजीई-2 तकनीक से इनकोड हो रहे हैं। इसमें एक ट्रांसपोंडर में 10-15 चैनल चल सकते हैं। यदि इसे एमपीजीई-4 में तब्दील करते हैं तो चैनल क्षमता 18-24 तक बढ़ सकती है। इसके अलावा चैनलों की अपलिंकिंग फीस में इजाफे का भी सुझाव दिया गया है। बहरहाल, सभी पक्षों की राय जानने के बाद ही इस मामले में अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

‘हिंदुस्तान’ अखबार में प्रकाशित मदन जैड़ा की रिपोर्ट

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0 Comments

  1. Rajeev Ranjan Singh

    March 16, 2010 at 3:33 am

    licence le chuke logon ke liye chenal on air nahi karne ka naya bahana mil gaya, is khabar se un talelented patrakaro ko nirasha hath lagi jo naye chanel ke on air ke intzar me umeed lagaye bathe the

  2. shivani

    March 17, 2010 at 12:34 pm

    this news may be good for those who is working in third world channel …… because they may hope that there would be good future for them. aspiring people will go ultimatly to running channel.

  3. Aditya

    March 22, 2010 at 6:49 pm

    chalo kaaran jo bhi ho kuchh samay ke liye kukurmutto ki tarah ugane waale news channels par lagam lagega…

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