मौर्य टीवी की तरफ से पटना में 28 को संगोष्ठी : बिहार और बिहारियों के बीच ये सवाल अकसर उठता रहा है कि क्या मीडिया बिहार की वास्तविक तस्वीर दिखाता है या फिर कहीं वह पहले से बनी बनाई स्टीरियोटाइप इमेज को ध्यान में रखकर चीज़ों को पेश तो नहीं करता रहता? बिहार के लोग तो ये भी शिकायत करते मिल जाएंगे कि मीडिया ने बिहार की एक नकारात्मक छवि गढ़ी है जिससे ग़ैर बिहारियों की नज़र में वे दीन-हीन बन जाते हैं।
उनका कहना है कि बिहार के बारे में मीडिया अपराध, जातिवाद, बाढ़, सूखा, भ्रष्टाचार, राजनीतिक अराजकता, हिंसा और पलायन आदि की ख़बरें ही प्रमुखता से प्रकाशित करता है जबकि राज्य में सब कुछ बुरा ही हो रहा हो ऐसा नहीं है। इसके उलट एक धारणा ये भी है कि मीडिया वर्ण विशेष ही नहीं, वर्ग विशेष का भी प्रवक्ता बना हुआ है और बदहाल बिहार वह दिखाता ही नहीं है। मीडिया में बिहार के पत्रकारों की तादाद अच्छी ख़ासी है इसलिए मीडिया में बिहार की जो भी छवि बनी है उसके लिए उन्हें भी ज़िम्मेदार बताया जाता है।
कुल मिलाकर ऐसे बहुत से प्रश्न हैं जिनके जवाब आगामी 28 मार्च को इस विषय पर पटना में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में खोजे जाएंगे। इस संगोष्ठी का आयोजन हाल में ही लाँच हुए क्षेत्रीय न्यूज़ चैनल मौर्य टीवी ने किया है। संगोष्ठी का विषय है मीडिया में बिहार की छवि। इस सेमिनार में विभिन्न क्षेत्रों के जाने-माने लोग हिस्सा ले रहे हैं।
हिंदी आउटलुक के संपादक नीलाभ मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार अरुण कमल, एनडीटीवी इंडिया के रवीश कुमार, पूर्व विदेश राज्य मंत्री दिग्विजय सिंह, जनता दल यूनाईटेड के सांसद अली अनवर और सामाजिक कार्यकर्ता परवीन अमानुल्लाह इनमें प्रमुख हैं। इस एक दिवसीय सेमिनार में मीडिया की नज़र से बिहार को और बिहार के नज़रिए से मीडिया को परखने की कोशिश तो की ही जाएगी, मगर साथ ही मीडिया के नए चरित्र पर भी मनन-चिंतन होगा। सेमिनार के निष्कर्षों को देश भर के मीडिया संस्थानों को भेजा जाएगा ताकि बिहार के बारे में बेहतर समझ विकसित हो सके।












बोलेंगे तो बोलोगे की बोलता है
March 26, 2010 at 8:23 am
यशवंत जी
यह सही है की मीडिया ने ही बिहार की नकारात्मक छवि बनाई है, लेकिन आज यह १६ आने सच है की बिहार की छवि बदलने या यु कहे नितीश कुमार की छवि बनाने में मीडिया की ही भूमिका है. यह सही है कि नितीश कुमार ने बिहार कि छवि बदलने में कुछ सकारात्मक पहल किया है. लेकिन यह भी सही है मीडिया को भी इन्होने बंधक बना लिया है. मीडिया को अपनी गणेश परिक्रमा करने के उद्देश्य से इन्होने जिलाधिकारियो द्वारा विज्ञापन दिए जाने का अधिकार छीन लिया. जिसके कारन इन्होने प्रिंट मीडिया को पटना में सेण्टरलाईस मेनेज कर रखा है. दुखद स्थिति प्रिंट मीडिया कि है. जो पूर्ण रूपेण सरकार के हाथ का खिलौना बनी हुए है. खिलाफ तभी खबर आती है जब किसी कारण से इन अखबारों का विज्ञापन बंद हो जाता है. नीतिश का दो चेहरा है एक में तो वो बिभिन्न मीडिया संस्थानों में अपने भासन में अपनी (नितीश) नाकामी उजागर करने कि नसीहत देते है लेकिन परदे के पीछे से वैसे सारे खबरों पर कुंडली मार कर बैठ जाते है जो उनकी कथित सुशाशन के खिलाफ जाता है. असल आत्म विवेचना कि यही पे मीडिया को जरुरत है कि पत्रकारिता कहा जा रही है.
भवेश
Chandan ( Journalist,Patna)
March 26, 2010 at 10:49 am
Lekin mera Bihar kal tak jo tha aaj wo to nahi….. kam se kam Bihar ka Pridrish to badla hai…. yaha chain se to log jivan yapan kar raha hai…. Bihar mai print Media ka chhabi khud bigra hai…. wo bikata hai to na koi kharidta hai…… Nitish jo kam kar raha hai…. wo sahi kawile tariff hai…. Aj Bihar ka chehra badal raha hai…. are bhai mere aj bihar ki media Nitish ke sasan mai ajadi to mahsus kar rahi hai nai….
5 sal pahle bihar ke media ka kiya hal likhne/ dikhane ka saja to Maut tha na … kam se kam Nitis to media ko samjta to hai na…….
Bhai sahab kuch likh dene se pahle soch lo kuch so to lo… BIHAR JO KAL THA WO AJ NAHI HAI CHHE AP JISH CHHETRA KI BAT KARE……..
YE HAI MERE BIKSIT BIHAR………….
09334572522
बोलेंगे तो बोलोगे की बोलता है
March 26, 2010 at 2:47 pm
चन्दन जी
संतोषम परम सुखंम मेरी किसी बात ने आपको कष्ट पहुचाया तो माफ़ी. मै उसी आत्म विवेचना की बात कर रहा हु.
manjeet kumar
March 26, 2010 at 8:12 pm
best news channels from bihar
शम्भू गोयल
April 17, 2011 at 12:04 pm
बिहार के जैसा सुशासित राज्य शायद इस देश में और कोई राज्य नहीं होगा / इस बात को मानना है या मनवाना है / यह हमतो जरूर मानते है क्योंकि unorganised तरीके से जो चोरी हो रही थी वो अब बड़े organised तरीके से हो रही है/
एक बार का वाकया है की बाबूजी जगजीवन राम जी भागलपुर आये हुए थे और उस समय श्री राजेंद्र प्रसाद ,राष्ट्रपति जी के भांजे या कोई मौसी का लड़का भागलपुर जिले का कलक्टर था / बड़े ही आजाद खयालों का व्यक्ति था / बाबूजी ने कुछ पूछा तो बड़े बेरहमी से बेपर्द होकर उसने जवाब दिया और बाबूजी चुप हो गए पर उनको दुःख बहुत हुआ था /
उस समय मुख्य मंत्री एक ऐसे व्यक्ति थे जिनका सोच बहुत लंबा और सुदृढ़ हुआ करता था / शायद वो श्री बाबु के नाम से जाने जाते थे / बाबूजी ने उनको अपनी आपबीती पटना पहुँचने पर सुनाई / तब श्री बाबु ने इतना ही कहा की आदरणीय बाबूजी थोडा समय बीतने दीजिए क्योंकि यह कलक्टर एक बहुत बड़े बरगद के पेड़ के नीचे एक फलता -फूलता हुआ पौधा है जिसके विरुद्ध श्री की लेखनी नहीं चल सकती है/ बात आई -गई हो गयी लेकिन श्री बाबु भी काफी आहत थे /
लेकिन इसी बीच यह दुस्साहसी कलक्टर जिसको रोज मदिरा पीने का शौख था एक दिन अपने शक्ति का प्रयोग करने के लिए आदतन भागलपुर के वैश्या -मंडी में पहुच गया और श्री बाबु को भनक लग गयी की साहब आज इस मंडी में शौख फरमाने पहुँच गए हैं ,यह जानकारी एक अत्यंत ईमानदार आरक्षी अधीक्षक ने उन्हें दे दी / साहब को …….अवस्था में ही स्थानीय थाने में लाया गया और फिर रिपोर्टिंग हुई और श्री बाबु ने राष्ट्रपति महोदय को अपनी टिप्पणी भेजी /पर साहब को गुमान था वो बोलने लगे ” मेरा सस्पेंसन ये श्री क्या करेगा , मौसा देखिये शाम तक हमारे बारे में वापस श्री को ही दोषी ठहरा कर मुझे आरोप मुक्त कर देंगे ”
लेकिन हुज़ूर शाम तक साहब का सस्पेंसन लेटर तो नहीं पर डिसमिसल लेटर जरूर आ गया /
तब हुज़ूर तब की बात थी जब कुछ मानव मूल्यों को स्वीकार करने वाले लोग थे /
लेकिन आज की बात सुन लीजिए / आज तो एक विभाग बिहार में है जिसके मंत्री और सबसे ऊँचे ओहदे पर विराजमान संतरी दिन में रोज होली मना रहे हैं और रात दिवाली मनाने में गुजर जाती है /क्योंकि मुख्य मंत्री के अथक प्रयास से इस विभाग को भारत सरकार द्वारा बहुत अधिक राशि खर्च करने के लिए दी गयी है / रोज के हिसाब से मेला लगाया जा रहा है /यंत्रीकरण के नाम पर लाभुकों को ५० % अनुदान मिलना है लेकिन कीमत ही २०० % रख दी जाती है और खेल शुरू होता है /suppier and vendors जो इनके चहेते होतें हैं उनके माध्यम से सारी राशि बंदरबांट की जाती है और मुख्य मंत्री जी तो busy रहते हैं “कभी बिजनेस रिफोर्मार ऑफ द इअर का एवार्ड लेने में ,या अन्ना हजारे जी की और से फूलों जैसे शब्दों की माला पहनने में ” और सब कुछ चल रहा है वही कुछ जिसके लिए लालू को इनलोगों ने बदनाम किया /ज्ञातब्य हो की ये मंत्री भी लालू के ही चट्टे-बट्टे रहे हैं /
सबसे बड़े संतरी इस फेर में हैं की उनको मंत्री जी मुख्य मंत्री को कह कर ,पैरवी कर कर मुख्य सचिव बनवा देंगे / अगर नहीं भी बनवाते है तब भी तो विभाग में घाल-मेल जो हो रहा है , साझे ही में न हो रहा है /अगर मुख्य सचिव बन गए तब कहना ही क्या है ,सब छिकार एके बार में निकाल लेंगे /
खैर जो भी हो एक तीव्र विस्तार योजना के तहत ढैंचा बीज किसानों को देना है वह भी मुफ्त में / मुख्य मंत्री जी का यह प्रयास है की मिटटी की संरचना जो कृत्रिमता की और जा रही है उसमे बदलाव आये जिससे किसानों को अधिक पैदावार का लाभ मिले / लेकिन हुज़ूर यहाँ तो किसानों को लाभ तो मिलेगा पर समय लगेगा ,ढैंचा की खेती लगेगी , बढ़ेगी , पानी लगेगा ,यहाँ इतना इंतज़ार करने की फुर्सत किसको है , माय्प्रुरिआरम साहब पहले ही ४० करोड का हिसाब बैठा लिए हैं /मसूर ,चना ,आदि आदि खरीद में तो मंत्री,संतरी और माय्पुरिअराम साहब पहले ही अपना घर स्वर्ण का बना लिए थे ,हो सकता है मंत्री जी उस चना मसूर के टाइम में कोई कुमारी जी रही हों /लेकिन ढैचा में तो मंत्री जी ही हैं /
तब साहब यही है सुशासन और इसका स्वागत हमलोगों को करना चाहिए /एक बड़ी दुखद कहानी मेरी अपनी है जो इस राज्य के सुशासन के कर्मठ,ईमानदार ,मेहनती पदाधिकारी ने जो कहर मेरे ऊपर बरपाया है उसकी.
जय हो नितीश बाबु का सुशासन |