बाजार जो न कराए. संपादक बेचारे को मार्केटियर बनाए. ऐसा कई जगहों पर हुआ है. कई जगहों पर हो रहा है. ताजी सूचना राष्ट्रीय सहारा से आई है. इसके समूह संपादक रणविजय सिंह को नेशनल मार्केटिंग का इंचार्ज बना दिया गया है.
सूत्रों का कहना है कि पहले भी मार्केटिंग समेत कई विभागों के प्रभारी रणविजय सिंह हुआ करते थे लेकिन बीच में उनसे मार्केटिंग वाला काम ले लिया गया था. अब प्रबंधन ने फिर से उन्हें मार्केटिंग का काम थमा दिया है. सहारा मीडिया में शीर्ष स्तर पर बदलाव के बाद पुनर्गठन का काम चल रहा है. इसी के तहत पिछले दिनों राजेंद्र द्विवेदी को राष्ट्रीय सहारा लखनऊ यूनिट का हेड बनाए जाने व रणविजय सिंह को नेशनल मार्केटिंग व बिजनेस का इंचार्ज बनाने का फैसला लिया गया. इन फैसलों के बारे में सहारा के वरिष्ठों को मेल जारी कर सूचित कर दिया गया है.
सूत्रों के मुताबिक रणविजय सिंह कई महीनों से राष्ट्रीय सहारा में साइडलाइन हैं. अखबार में कंटेंट के लेवल पर रणविजय का हस्तक्षेप लगभग न के बराबर रह गया है. संजीव श्रीवास्तव व उपेंद्र राय के निर्देशन में अखबार का संचालन यूनिट हेड व स्थानीय संपादक कर रहे हैं. राजीव सक्सेना को संपादक बनाकर दिल्ली एनसीआर संभालने का काम पहले ही सौंपा जा चुका है. ऐसे में करने के लिए रणविजय सिंह के पास इन दिनों कोई ठोस काम नहीं था. संपर्कों-संबंधों के धनी रणविजय अब सही मायने में सहारा ग्रुप को अपने संपर्कों का फायदा दिला पाएंगे.












J. Verma
April 28, 2010 at 5:17 am
inka kuch ho nhi sakta. abhi tak humari samjh me yeh nhi aa raha hai ki editorial work karne wala kaise marketing karga? shayad aisa hi hoga. bas wait & watch ki kya kar pate hai ye sahab apne samparko aur sambandhon se……………..
TRIPTA
April 29, 2010 at 5:52 pm
kar bhala to ho bhala
patna unit me stringer ko bole the tum log kam karo
bad me salary badha dege
patna ke stringer mile to bole
hum dogala ho jaye ge
to tum kya kar loge
vijay srivastava
May 1, 2010 at 1:01 pm
tripta ji, inhi mahoday ke samay me patna unit launch hui thi. main bhi 20-25 logon ke sath bahal hua tha. ek maheene baad jab hum logon ne paisa maanga to hum sabko hata diya gaya. hamara paisa bhi nahi diya gaya. dil se abhi bhi in mahoday ke liye dua nahi nikalti hai. jaisi karni waisi bharni ka shikar hote hue kaiyon ko dekha hai na.