: चीफ मैनेजर सत्येंद्र कार्यमुक्त : बिपिन को जिम्मेदारी : कई लोगों पर गिरने वाली है गाज : काम कम, राजनीति ज्यादा करने से खफा है प्रबंधन : टैलेंट पूल बनाने का काम शुरू : अमर उजाला, नोएडा के एचआर सेक्शन में खलबली मची हुई है. अमर उजाला के निदेशक खुद एचआर विभाग की मानीटरिंग करने लगे हैं. कई गड़बड़ियां पाए जाने के कारण कई लोगों पर गाज गिरी है. पिछले दिनों कारपोरेट एचआर में काफी प्रभावशाली बन गए चीफ मैनेजर सत्येंद्र कुमार को कार्यमुक्त कर दिया गया है.
उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजकर आनन-फानन में सारी जिम्मेदारी नए आए मैननेजर बिपिन शर्मा को सौंप दी गई. नोएडा एचआर में सीनियर पदों पर कई अनुभवी लोगों को बाहर से लाकर रखा गया है. चर्चा है कि खुद एमडी अतुल माहेश्वरी अपने एचआर का चेहरा बदलना चाह रहे थे. इंप्लाइज के कई काम बिना कारण अटके रहने की शिकायत मिलती थी. इससे अमर उजाला का इंप्रेशन प्रभावित हो रहा था. एचआर के कुछ पुराने लोग सिर्फ आंतरिक राजनीति में लगे रहते थे. इससे अनावश्यक विवाद बढ़ रहा था. साथ ही काम भी प्रभावित हो रहा था. इसको गंभीरता से लेते हुए कारपोरेट एचआर के सभी लोगों को नए सिरे से जिम्मेवारी दी गई है.
कई अन्य लोगों पर जल्दी ही गाज गिरने की संभावना है. कुछ लोगों पर खास नजर रखे जाने की भी सूचना है. इसके लिए नए आए कारपोरेट एचआर हेड वैभव वशिष्ठ को कई निर्देश दिए गए हैं. इन्हीं सब कारणों से एचआर के लोगों का सालना इनक्रीमेंट घोषित नहीं किया गया है. अन्य सभी विभागों के लोगों को इनक्रीमेंट के लेटर काफी पहले दिए जा चुके हैं. एचआर के काम में बदलाव के कड़ी में ही एक अन्य मैनेजर विनय उपाध्याय को टैलेंट्स की तलाश की जिम्मेदारी दी गई है. अमर उजाला में यह पहली बार हुआ है. अमर उजाला अपना टैलेंट पूल बनाना चाहता है ताकि उनका इस्तेमाल विभिन्न यूनिटों हो सके. अगले कुछ दिनों में एचआर में कई बदलाव की सूचना मिल सकती है.












Himanshu Dixit
August 3, 2010 at 5:39 am
This is a good decision taken by Atul Ji. HR people used to behave like a god in Amar Ujala.
I am very happy with this decision and hope that Mr.Vaibhav Vashishtha will be able to change the image of the department.
yuva gunj
August 3, 2010 at 4:15 pm
yaar ye news paper delhi kaaaaa nahi balki kabadi bazar ka lagta hai,
yahan ke Reporter ki Education or khabro ki samajh 8th class standard ke baccho se bhi kam hai
delhi govt ki burai to chapti hi nahi, sayad koi us bit per kam nahi karta
डब्बू
August 5, 2010 at 4:59 am
बेचारे अतुल जी, अकेले क्या-क्या कर लेंगे। वो जिस पर भरोसा करते हैं जमकर करते हैं और इसी भरोसे में पिछले 10-15 साल में उनको कितने धोखे मिले हैं, मैं जानता हूं। अतुल जी की प्रतिभा किसी से छिपी नहीं है लेकिन उनको इंसान को परखना सीखना होगा क्योंकि इस वक्त भी वो वहीं गलती कर रहे हैं। बिना सोचे समझे जाने कहां-कहां से किस-किस को लेकर बड़े-बड़े पदों और मोटी-मोटी सैलरी पर रख रहे हैं। अमर उजाला अब वो नहीं रहा।