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फिर बिका नागपुर का हिंदी दैनिक ‘युगधर्म’

किसी ज़माने में नागपुर में हिंदी दैनिक ‘युगधर्म’ ने हिंदी पत्रकारिता में खूब नाम कमाया था. बाद में कुछ आर्थिक तंगी के कारण मैनेजमेंट ने यह अख़बार फिल्म निर्माता एन कुमार, जिन्होंने ‘वास्तव’ नामक फिल्म बनाई थी, को बेच डाला. उन्होंने इस दैनिक अखबार को सांध्य दैनिक बना दिया. अब इस अखबार के दफ्तर पर कई दिनों से ताला लगने के बाद इसके फिर से बिक जाने की सूचना है. इस अखबार से नागपुर में न जाने कितने पत्रकारों ने अपने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की.

किसी ज़माने में नागपुर में हिंदी दैनिक ‘युगधर्म’ ने हिंदी पत्रकारिता में खूब नाम कमाया था. बाद में कुछ आर्थिक तंगी के कारण मैनेजमेंट ने यह अख़बार फिल्म निर्माता एन कुमार, जिन्होंने ‘वास्तव’ नामक फिल्म बनाई थी, को बेच डाला. उन्होंने इस दैनिक अखबार को सांध्य दैनिक बना दिया. अब इस अखबार के दफ्तर पर कई दिनों से ताला लगने के बाद इसके फिर से बिक जाने की सूचना है. इस अखबार से नागपुर में न जाने कितने पत्रकारों ने अपने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की.

‘युगधर्म’ से निकले कई पत्रकार आज विभिन्न अखबारों में बड़े पदों पर आसीन हैं. नागपुर के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से बात करने पर पता चला कि एन. कुमार ने ‘युगधर्म’ को आरएसएस से जुड़े अरुण जोशी को बेच दिया है. बिक्री की प्रक्रिया शुरू होने के कारण अखबार का प्रकाशन पंद्रह बीस दिनों के लिए टाल दिया गया था. अब फिर से अखबार का प्रकाशन शुरू हो चुका है.

युगधर्म पचास साल से ज्यादा पुराना अखबार है. पहले यह ‘तरुण भारत’ प्रबंधन का अखबार था. सन 1984 में युगधर्म को तरुण भारत प्रबंधन ने बंद करने का निर्णय लिया. तब युगधर्म के कर्मियों ने कोआपरेटिव बनाकर खुद इसका संचालन शुरू करने का फैसला लिया. बाद में एन. कुमार को यह अखबार बेच दिया गया. अब एन. कुमार ने भी इस अखबार को बेच दिया है.

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0 Comments

  1. chandan goswami

    August 5, 2010 at 5:14 pm

    sahi baat hei .es akhbar se nikle n jane kitne patrkar aaj nagpur ke vibhinn post pr aasin hei. NAVBHARA sanjay tiwari, LOKMAT SAMACHAR MEI kamal sharma,LOKMAT MEI yadu josh..BHASKAR MEI sanjay desmukh,. AUR BHI NA JANE KITNE PATRKAR HEI. chandan goswami

  2. hlk joshi

    August 30, 2010 at 1:16 pm

    हिंदी समाचार पत्रों को आपसी तालमेल कर चलना उचित होगा । अंग्रेजी का टाइम्‍स आफ इंडिया प्रिंट आर्डर,विज्ञापन,वितरण आदि सभी में दूसरे अंग्रेजी दैनिक से कोलेबोरेशन कर लेता है और चलते रहता है । यह गुर हिंदी समाचार पत्रों को सीखने ही होंगे । अन्‍यथा बंद होंगे, बिकेंगे और खरीदने वाले घाटे में ही रहेंगे ।

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