बहुत तीज-त्योहार सुने होंगे लेकिन त्योहार में पत्थरबाजी हो या पत्थरबाजी की परंपरा किसी त्योहार में हो, संभव है ये न सुना होगा. सावन में रक्षाबंधन से एक हफ्ते पूर्व नाग पंचमी के दिन चंदौली (उत्तर प्रदेश) जिले के चाहनियाँ ब्लाक के विशुपुर व मौआरी गांवों के बीच जमकर पत्थरबाजी होती है. यह परंपरा करीब 500 वर्षों से चली आ रही है.
कहते हैं, गांव में खुशहाली और भरपूर बारिश के लिए यह टोटका है, कहते हैं, ऐसा गांव को अकाल-सूखा से बचाने के लिए किया जाता है. विशुपुर व मौआरी गावों के बीच एक नाला पड़ता है. कुछ लोगों का कहना है कि गांव के समीप बाल्मीकि आश्रम है जहां सीताजी ने बनवास काटा था. तबसे यह परम्परा चली आ रही है. कहते हैं कि जिस वर्ष इस परम्परा का निर्वहन नहीं होता, उस वर्ष गांव में सूखा-अकाल पड़ता है. पत्थरबाजी के लिए दोनों गावों के लोग नाले के दोनों तरफ इकट्ठे होते हैं. गावं की महिलाएं इस अवसर पर कजरी गीत व गालियां गाती हैं. प्रति वर्ष नाग पंचमी के दिन शाम को दो घंटे के लिए होने वाली पत्थरबाजी में विशुपुर व मौआरी गावं के लोग एक दूसरे के दुश्मन हो जाते हैं.
इन दो घंटों में दोनों तरफ से जमकर पत्थरबाजी होती है. पत्थरबाजी की इस परंपरा के दौरान वाकई कोई बवाल न हो जाए, इसके लिए पुलिश प्रशासन द्वारा सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाता है. इस खेल में काफी लोग चुटहिल भी हो जाते हैं. देखने से एसा प्रतीत होता है कि दोनों गावों में भयंकर दुश्मनी है और मारपीट हो रही है. पर दो घंटों बाद स्थिति सामान्य हो जाती है. फिर से दोनों गांव के लोगों के बीच पहले जैसा सौहार्द कायम हो जाता है और लोग एक दुसरे से मिलजुल कर रहते हैं.
देखिए कुछ तस्वीरें….
















saleem malik
August 15, 2010 at 12:16 pm
uttrakhand ke champawat distt k dewidhura jagah me bhi raksabandhan k din aesa hi mela lagta he. sadiyo purane is mele ko PASAN YUDHH bhi kahte he.