पिछले दिनों राज एक्सप्रेस अखबार ने अपने यहां विज्ञापन प्रकाशित कर जिस राघवेंद्र चतुर्वेदी के निष्कासन की सूचना दी, उन्हीं राघवेंद्र ने अपना पक्ष भड़ास4मीडिया के पास भेजा है. उन्होंने जो कुछ लिखा है, उसे हूबहू उसी रूप में प्रकाशित कराया जा रहा है. राज में प्रकाशित सूचना ‘विज्ञापन प्रकाशित कर कार्यमुक्ति की सूचना दी’ पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं. -एडिटर
मैं कोर्ट की शरण में जाऊंगा : राघवेंद्र
मैंने डेढ़ वर्ष तक राज एक्सप्रेस में अपनी सेवाएं दी। इस दौरान विज्ञापन की वसूली में कुछ गड़बड़ियां जरूर हुई हैं, जिसके बारे में मैंने स्वयं अरूण सहलोत, सीएमडी, राज एक्सप्रेस से मिलकर सारी बातें बताई थी। परंतु मेरे निकाले जाने के बारे में अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कर राज एक्सप्रेस ने अपनी हकीकत सबके सामने बयान कर दी है।
यह सत्य है कि राज एक्सप्रेस ने मुझे छत्तीसगढ़ के परासी गांव से एक एजेन्ट से उठाकर ब्यूरो प्रमुख बनाया था, परंतु कार्यमुक्ति के बारे में विज्ञापन छपवा करके उसने अपने किये पर पानी फेर दिया। ब्यूरो प्रमुख रहते समय मेरे ऊपर 5 लाख का बकाया निकाला गया था, लेकिन उसके बाद ही पद से हटा देने के कारण मैं आज तक पैसा चुकता नहीं कर पाया। मेरी इज्जत जिले में 50 लाख से भी ज्यादा की है, लेकिन 5 लाख के लिए जिस तरीके से छीछालेदर की गई, इसके लिए मैं निश्चित ही न्यायलय के शरण में जाऊंगा। अखबार चौथा स्तंभ होता है, सब कुछ नहीं। मुझे निश्चित ही न्याय मिलेगा।
-राघवेंद्र चतुर्वेदी












कमल शर्मा
August 16, 2010 at 11:54 am
अखबार चौथा स्तंभ होता है…..राघवेंद्र जी आपने यह लिखा है यह सत्य नहीं है। भारत के संविधान में कहीं भी मीडिया को चौथे स्तंभ के रुप में नहीं लिखा गया है। खुद मीडिया ने ही चिल्ला चिल्लाकर अपने को चौथा स्तंभ बताया है। अपने आप को कोई चिल्लाकर प्रधानमंत्री बताएगा तो वह प्रधानमंत्री नहीं बन जाता। यदि मेरा ज्ञान अल्प हो तो बताएं कि मीडिया को संविधान में कहां चौथ स्तंभ बताया गया है। जय हो इस स्व घोषित स्तंभ की।