: बेनकाब हो सकते हैं कई नेता, अफसर और पत्रकार : भारत में प्लास्टिक के नोट चलाए जाने की योजना में भी घोटाले की बू आ रही है। जांच होने पर कई नेता, अफसर और पत्रकार भी लपेटे में आ सकते हैं। आस्ट्रेलिया में हुए खुलासे के बाद यहां भी प्लास्टिक नोट चलाने की योजना से जुड़े विवादों का पिटारा खुलने की आशंका है। एक आस्ट्रेलियाई फर्म ने प्लास्टिक नोट सप्लाई क ठेका हासिल किया है, जो विवादों में घिर गया है। भारत में एक दागी और रसूखदार व्यक्ति को एजेंट बना कर सिक्युरेंसी ने पॉलीमर नोट सप्लाई करने का ठेका हासिल किया है।
इस बारे में आस्ट्रेलियाई मीडिया कई खबरें आई हैं. इन खबरों के मुताबिक इसके लिए आस्ट्रेलियाई सरकार के मंत्रियों और नौकरशाहों ने भी 1999 से ही कोशिश शुरू कर दी थी। इसके तहत तत्कालीन विदेश मंत्री स्टीफन स्मिथ और वाणिज्य मंत्री मार्क वैल सहित कई नौकरशाहों ने भारतीय मंत्रियों और अफसरों से संपर्क कर सिक्युरेंसी की सिफारिश की। यहां तक कि आस्ट्रेलियाई सरकार ने भारतीय पत्रकारों के एक दल को आस्ट्रेलिया दौरे पर भी भेजा, ताकि मीडिया का समर्थन हासिल किया जा सके।
भारत में रिजर्व बैंक इस साल के अंत तक प्लास्टिक नोट चलाने का मन बना रहा है। शुरुआत दस रुपये के नोट से होगी। भारतीय करेंसी बाजार काफी बड़ा है। इसलिए प्लास्टिक नोट बनाने वाली कंपनियों को यहां अपने लिए कारोबार की भारी संभावना दिखाई दे रही है। इसीलिए आस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक (आरबीए) की हिस्सेदारी वाली कंपनी सिक्युरेंसी ने भारत में करेंसी सप्लाई करने का मौका पाने के लिए काफी मेहनत की। अंतत: ट्रायल के तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सिक्युरेंसी को एक अरब नोट सप्लाई करने का ठेका भी दे दिया।
आस्ट्रेलियाई अखबार सिडनी हेराल्ड ने खबर दी है कि सिक्युरेंसी ने भारत में पॉलीमर नोट सप्लाई करने का ठेका हासिल करने के लिए आदित्य खन्ना और उनकी फर्म डीएसएसआई ग्रुप की सेवाएं बिचौलिए के तौर पर ली। खन्ना भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के रिश्तेदार हैं और इराक के ऑयल फॉर फूड घोटाले में उनका नाम आ चुका है। डीएसएसआई सिक्युरेंसी से अपना संबंध होने से इनकार नहीं करती, लेकिन आदित्य खन्ना ने कंपनी के साथ किसी अवैध लेनदेन से इनकार किया है।
आस्ट्रेलियाई अखबार के जरिए सामने आए घोटाले के बाद आरबीआई के लिए यह जांच कराना जरूरी हो गया है कि किन परिस्थितियों में सिक्युरेंसी को नोट सप्लाई करने का ठेका दिया गया। हालांकि बताया जा रहा है कि विवाद सामने आने के बाद यह करार रद कर दिया गया है। आरबीआई या आरबीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। साभार : दैनिक भास्कर












Naresh
August 17, 2010 at 6:31 am
Congress hai bhai, Ghotale to honge hi….
Yadi aise hi chalta raha to ye desh ko hi kha jaayenge…
girish kesharwani
August 17, 2010 at 9:27 am
खबर पढ़कर आश्चर्य नहीं लगा अब भारत देश विश्व समुदाय में घोटालों के देश के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, अब बाकी बचा ही क्या है इस देश के घोटालेबाज नेता और अफसर पैसों के खातिर अपने घर की इज्जत को भी सरे आम नीलाम करने में कोई चुक नहीं करेंगे |
गिरीश केशरवानी
रिपोर्टर p7 न्यूज़
रायपुर (छ.ग.)