: अशोक शर्मा को छत्तीसगढ़ यूनिट हेड बनाया भास्कर ने : पत्रिका, रायपुर में अंदरुनी राजनीति तेज : 20 सितंबर के आसपास संभव है रायपुर में पत्रिका की लांचिंग : पत्रिका वाले जिस नई जगह अखबार लांच करने पहुंचते हैं, वहां अगर पहले से दैनिक भास्कर है तो दोनों के बीच जरूर टकराव होता है. जैसे-जैसे पत्रिका, रायपुर की लांचिंग की तिथि नजदीक आ रही है, भास्कर और पत्रिका के बीच टकरार बढ़ती जा रही है.
भास्कर से नाराज सुरेन्द्र मिश्रा को पत्रिका ने अपने पाले में करने के बाद रायपुर के लांचिंग की जिम्मेदारी सौंप दी है. दूसरी तरफ भास्कर भी सुरेन्द्र मिश्रा के करीबी माने जाने वाले अशोक शर्मा को छत्तीसगढ़ का यूनिट हेड बनाकर भेज दिया है. अशोक शर्मा सुरेन्द्र मिश्रा के साथ राजस्थान और गुजरात में काम कर चुके हैं. अशोक शर्मा छत्तीसगढ़ हेड बनने से पहले दिव्य भास्कर, गुजराज में सीनियर मैनेजर के पोस्ट पर तैनात थे.
अशोक शर्मा एमडी सुधीर अग्रवाल के करीबी माने जाते हैं. करीबी होने का ही इनाम अशोक शर्मा को छत्तीसगढ़ स्टेट हेड बनाकर दिया गया है. छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभालने वाले अशोक शर्मा का पहला दिन ही हंगामेदार रहा. अशोक शर्मा रायपुर पहुंचे और उधर भास्कर वालों ने पत्रिका सेंटर इंचार्ज कौशल को जमकर पीट दिया. इस मारपीट का कारण बताया गया कि कौशल भास्कर के बंडल से छेड़छाड़ कर रहा था. कौशल को कुछ दिनों पूर्व पत्रिका, ग्वालियर से रायपुर बुलाया गया था. इस घटना के बाद भास्कर और पत्रिका के बीच तनाव बढ़ गया है.
दूसरी ओर लांचिंग से पहले ही पत्रिका के भीतर शीतयुद्ध शुरू हो गया है. पत्रिका के कुछ पुराने धुरंधर भास्कर से आए सुरेन्द्र मिश्रा को पचा नहीं पा रहे हैं. इसी बीच सुरेन्द्र मिश्रा और विनोद जैन के बीच भी तनातनी बढ़ गई है. विनोद जैन को इंदल सिंह मीणा का समर्थक माना जाता हैं. इंदल सिंह मीणा के रवैये से भी पत्रिका के स्थानीय कर्मचारी काफी खफा हैं. इंदल सिंह मीणा पर आरोप लग रहा है कि वे इस समय पूरे यूनिट में मीणा जाति के लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे रहे हैं. इंदल ने सर्वे करने के लिए भी राजस्थान से काफी संख्या में मीणा जाति के लोगों को बुला लिया है. इससे सुरेन्द्र मिश्रा की टीम नाराज बताई जा रही है.
सुरेन्द्र मिश्रा ने भी पत्रिका ज्वाइन करने के बाद अपनी टीम की भर्ती शुरू कर दी है. इसी क्रम में उन्होंने अपने खास सुनील तिवारी और अपने भाई वीरेन्द्र मिश्रा को भास्कर से तोड़कर पत्रिका के साथ जोड़ लिया है. सुनील तिवारी को भिलाई तथा वीरेन्द्र मिश्रा को रायपुर में ज्वाइन कराया है. वीरेन्द्र को इंदल मीणा के बराबर का पद दिया गया है. सुनील तिवारी इसके पहले एक बार पत्रिका को गच्चा दे गए थे. इसलिए पत्रिका ने सुनील के ऊपर अपने विश्वसनीय कुलदीप सिंह को बैठा दिया है. पत्रिका ने भिलाई और दुर्ग में प्रसार की जिम्मेदारी राजेन्द्र दलाल को सौंपी है.
राजेन्द्र हॉकरों में अपनी पैठ बनाने में माहिर माने जाते हैं. इसी का परिणाम है कि ये कुलदीप के साथ मिलकर भिलाई और दुर्ग में सारे एजेंटों को फाइनल कर दिया है. जबकि पत्रिका, रायपुर में अब तक एजेंसी फाइनल नहीं हो पाई है, जिसके चलते इसके लांचिंग में दिक्कतें आ रही है. सुरेन्द्र मिश्रा के आने के बाद से विनोद जैन और उनकी टीम के लोग इनके प्रभुत्व को लेकर सपकाए हुए हैं.
इधर, लांचिंग युद्ध में भी नए-नए दांव खेले जा रहे हैं. पत्रिका ने अपने रायपुर के नए यूनिट की लांचिंग 20 सितम्बर को करने की योजना बनाई है. इसे देखते हुए भास्कर ने एक स्ट्रेटजी तैयारी की है. जिसके तहत भास्कर ने 19 सितम्बर को अपनी नई यूनिट इटारसी की लांचिंग रख दी है. इसके चलते अपने हर यूनिट को लांचिंग में सहयोग देने वाली पत्रिका, भोपाल की टीम इस बार फंस गई है. 19 को पत्रिका, भोपाल की टीम भास्कर की इटारसी यूनिट के लांचिंग का सामना करने में व्यस्त होगी.
ये सारी सूचनाएं पत्रिका व भास्कर से जुड़े कुछ लोगों से बातचीत पर आधारित है. अगर कोई तथ्य गलत, अतिरंजित व अर्द्धसत्य, अपूर्ण हो तो उसके बारे में नीचे कमेंट बाक्स में लिख दें या फिर [email protected] पर मेल भेजें.












Hukum
September 17, 2010 at 8:57 am
Dada ,
Badhai Ho…. Lambi chalang maari hai …..
Rahul sharma
September 17, 2010 at 9:41 am
bhaio mai patrika gwalior me kam kr chuka hu……… or inder sing meena ki bat kro to vo promot hokr isliy hi raypur me h jisse vo b gwalior k unit head mahipal sing bhadoria k nkshe kdm pe chalkr apne logo ko patrika me bhrti kr ske…….. gwalior k purane staff or mai (rahul sharma) ko raypur aane ki bat se to vo hath jod leta h kyu ki hm sb in logo ki purani kargujario se vakif h isliy to hme raypur na bhejkr upcountry me transfer ki dhmkia dekr istifa le lia h jiisse unk krname pure ho jae
n bharadwaj
September 17, 2010 at 11:12 am
LAGTA HAI EN DO BARE AKHBARO ME KAM KARNE WALON KO KUSTI KI TRAINIG LE LENI PAREGI
ratan jaiswani
September 17, 2010 at 4:01 pm
पत्रकार तो बेकार में ही राजनेताओं को आचरण सुधारने की सलाह देते हैं कुत्तों की तरह सड़क पर लड़ाई कम से कम छत्तीसगढ़ के पत्रकारों की सोच में शामिल नहीं है ये कौन लोग आ गए यहाँ की शांति बर्बाद करने. पहले खुद को सुधार लें. फिर दूसरों को सीख दें. ऐसे मीडिया प्रबंधनों को भी अपने कर्मियों को अपने पजामे के भीतर रहने की नोटिस देनी चाहिए.
Mukesh Agrawal
September 19, 2010 at 2:18 am
Bhaskar ki ye purani aadat hey ki bo nahi chahata to Patrika Jis Gati Se Badh Raha Hey Or Badhey Isliyai bo Apni Harkat Patrika Ki Har Nai Launching par Karta Hey Use Ye Nahi Pata hey Ki Patrika Ko Badhna Hey to Bo Badega Tum Marpeet Ke Bajaye Apne Product Pa Jyada Dhyan De To Jyada Badiya Hay.
shankar lal, Jaipur
September 19, 2010 at 1:31 pm
Itarsi me to patrika ne MJ Qureshi ko utar diya he. wo akela he bhaskar walo par bhari padega. qureshi janta he bhaskar me hangama jyada aur kam kam hota he. senior sab ko confuse karte he. qureshi lambi race ka ghoda he, kai ghat se gujra he. bhaskar walo kher manao.
anil
September 20, 2010 at 1:31 pm
sab bato ka matlab kuch nahi Nikalta service class log hi pareshan hote hai sahab kabhi ladai nahi karte aapas me ladane ka kam nahi karna chahiye.