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पत्रकारों पर हमला को गैर-जमानती बनाने से डर रहे हैं नेता

: सर्वद‍लीय बैठक में नहीं बन पाई सहमति : महाराष्‍ट्र में पत्रकारों पर बढ़े हमलों के बाद इस विधेयक को लाने का प्रस्‍ताव : पत्रकारिता के नाम पर कुछ भी उलुल-जलूल काम करने वाल़े गली-कूचों से निकल रहे अख़बार वालों की वजह से महाराष्ट्र में पत्रकारों पर होने वाल़े हमलों के मामले को गैर-जमानती अपराध बनाने वाला विधेयक पारित नहीं हो पा रहा है. नेताओ को आशंका है कि विधेयक पारित हो जाने के बाद खबरों के नाम पर ब्‍लैकमेलिंग करने वाले लोग इस कानून का दुरुपयोग करने लगेंगे.

: सर्वद‍लीय बैठक में नहीं बन पाई सहमति : महाराष्‍ट्र में पत्रकारों पर बढ़े हमलों के बाद इस विधेयक को लाने का प्रस्‍ताव : पत्रकारिता के नाम पर कुछ भी उलुल-जलूल काम करने वाल़े गली-कूचों से निकल रहे अख़बार वालों की वजह से महाराष्ट्र में पत्रकारों पर होने वाल़े हमलों के मामले को गैर-जमानती अपराध बनाने वाला विधेयक पारित नहीं हो पा रहा है. नेताओ को आशंका है कि विधेयक पारित हो जाने के बाद खबरों के नाम पर ब्‍लैकमेलिंग करने वाले लोग इस कानून का दुरुपयोग करने लगेंगे.

महाराष्ट्र में पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनओं को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पत्रकारों पर हमले को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में लाना चाहते है. इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाना होगा. विधेयक पर आम सहमति बनाने के लिए बीते मंगलवार को सरकारी अतिथि-गृह सह्याद्री में सभी पार्टियों के नेताओ की बैठक बुलाई गई थी. बैठक में शामिल लगभग सभी दलों के नेताओं ने विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई.

बैठक में शामिल समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक अबू आसिम आज़मी ने इस संवाददाता से कहा कि हम इस कानून के विरोध में नहीं है. लेकिन यह कानून किन पत्रकारों के लिए होना चाहिए. पत्रकारों का वर्गीकरण जरुरी है. आज़मी ने कहा कि हफ्ते-महीने में दो-चार पन्ने का अख़बार निकलने वाल़े कुछ लोग किसी के बारे में कुछ भी छाप  देते है. ऐसे लोग तो इस कानून की आड़ में लोगों का जीना मुहाल कर देंगे.

उन्होंने बताया कि बैठक में शामिल लगभग सभी नेताओं की यही राय थी. मुख्यमंत्री चव्हाण ने नेताओं की आपत्तियों पर विचार करने का आश्वासन दिया है. यदि इस विधेयक पर सहमति बन जाती तो 1 दिसंबर से शुरू होने वाल़े महाराष्ट्र विधान मंडल के नागपुर अधिवेशन में इस विधेयक को पेश किया जा सकता था.

मुंबई से विजय सिंह कौशिक की रिपोर्ट.

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0 Comments

  1. anand shukla

    September 17, 2010 at 1:30 pm

    patrakaro ka vargikaran kiya jay ye uchit vichar hai lekin patrakaro par badh rahe atyacharo par koi na koi vidheyak banna chahiye ye jaruri hai -nahi to chauthe stambh ka jeena dushvaar ho jayega -nispaksh khabre nahi likh payega aur dikha payega ye chautha stambh –chintniya vishay hai is or dhayn dena nitant avashyak hai —

  2. akash rai

    September 17, 2010 at 3:35 pm

    दुरुपयोग badega , पत्रकारों पर होने वाल़े हमलों के मामले को गैर-जमानती अपराध बनाने वाला विधेयक पारित होने से ब्‍लैकमेलिंग jaisigatnao me bradhi hogi इस कानून का दुरुपयोग adhik hga !

  3. AapkiAwaz.com

    September 17, 2010 at 5:12 pm

    महोदय, मैं अबू आज़मी के इस राय से कम से कम पूरी तरह सहमत नहीं हूँ, कि छोटे अखबार कुछ भी छाप कर जीना दूभर कर देगें। पत्रकारों पर हमले के अपराध को गैर जमानती बनाना ही चाहियें। अगर खबर गलत है तो कानून में और भी धारायें है, जिसके जरियें ऐसे पत्रकारों व अखबारात पर लगाम लगायी जा सकती है। हालात तो ये है कि कैमरे को देखकर या किसी भी अपराधी का नाम पूँछते ही वो हाथ उठा देता है। ऐसे हालात में निष्पक्ष पत्रकारिता बहुत कठिन होती जा रही है।

    एस.एम.मतलूब
    मुख्य संपादक- आपकी आवाज़.कांम
    http://www.aapkiawaz.com

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