वरिष्ठ पत्रकार बाबूलाल शर्मा हम सभी को छोड़ कर चले गए। वे 61 साल के थे। दिल्ली में अपोलो में उनका इलाज चल रहा था। बाबूलाल कई दशकों तक माया और दैनिक भास्कर के संपादक के रूप में मुख्य धारा की मीडिया के सरताज बने रहे। तीन माह पहले ही वे भास्कर से रिटायर हुए थे। उनके इंटेस्टाइन में इंफेक्शन हो गया था जो लगातार ट्रेवल करने से लीवर तक पहुंच गया। इसके चलते कैंसरस टीशूज डेवलप हो गए। पीजीआई, चंडीगढ़ में जब उनकी संपूर्ण जांच कराई गई तो इस खतरनाक इंफेक्शन के बारे में पता चला।
इससे पहले बुखार और दर्द वगैरह को सामान्य मानकर इसका रुटीन इलाज बाबूलाल करते रहे। पीजीआई में टेस्ट के बाद दीपावली से ठीक दो दिन पहले दिल्ली में अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। कैंसर के टिशूज के इलाज के लिए उन्हें तीन बार रेडिएशन थिरेपी भी दी गई। इससे वे काफी स्वस्थ महसूस कर रहे थे। उन्हें दुबारा दिखाया जाना था। परसों रात उनकी तबीयत अचानक गड़बड़ हुई। दोपहर बाद उनके न रहने की दुखद खबर मिली।
हरियाणा के रोहतक में लेक्चरर की नौकरी को बाय बोलने के बाद बाबूलाल शर्मा माया मैग्जीन में उप संपादक के रूप में जुड़े थे। अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर वे माया के संपादक पद तक पहुंचे। बाबूलाल शर्मा के नेतृत्व में माया मैग्जीन ने उंचाइयों को छुवा। माया के बाद नई पारी दैनिक भास्कर के साथ शुरू की। वे राजस्थान में भास्कर के साथ रहे और जयपुर एडीशन लांच कराया। चंडीगढ़ में रहे और बाद में भोपाल में पूरे ग्रुप के कामधाम को देखते रहे।
पंजाब और हरियाणा के स्टेट हेड के रूप में बाबूलाल ने सैकड़ों पत्रकारों को भास्कर से जुड़ने का मौका दिया और इस इलाके में अखबार को चमकाया। दोस्तों के दोस्त माने जाने वाले बाबूलाल हमेशा सादगी भरा जीवन जीने में यकीन रखते रहे। उन्हें दिखावा और तड़क-भड़क बिलकुल पसंद नहीं था। सामाजिक सरोकार वाले इस निर्भीक पत्रकार के असमय निधन से हिंदी मीडिया को काफी बड़ा झटका लगा है। बाबूलाल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव कोटपूतली के सांगटेडा में शुक्रवार की सुबह किया गया।
बाबूलाल अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र अनुराग शर्मा जाब में हैं। बेटी अभिलाषा की शादी हो गई है।











