: दो ने हिंदुस्तान व एक ने जागरण छोड़ा : हिन्दुस्तान, बस्ती में वर्षों से काम कर रहे दो लोगों ने इस्तीफा दे दिया है. दैनिक जागरण, बस्ती से भी एक के इस्तीफा देने की खबर है. हिंदुस्तान, बस्ती से संदीप गोयल और अरुण श्रीवास्तव ने इस्तीफा दिया है.
संदीप के बारे में पता नहीं चल पाया है कि उन्होंने कहां ज्वाइन किया है. अरुण ने राष्ट्रीय सहारा का दामन थामा है. इससे पहले सोहन सिंह भी हिन्दुस्तान, बस्ती छोड़ चुके हैं. दैनिक जागरण, बस्ती में वर्षों से काम कर रहे संतोष ने इस्तीफा देकर हिन्दुस्तान ज्वाइन किया है. बताया जा रहा है कि संदीप गोयल और अरुण ने अच्छे पैसे न मिलने के कारण हिन्दुस्तान छोड़ा है. इन्हें उम्मीद थी कि गोरखपुर संस्करण शुरू होने पर अच्छा पैसा मिलेगा लेकिन जैसे जैसे गोरखपुर संस्करण शुरू होने का वक़्त करीब आता जा रहा है, पुराने लोगों को हटाने की मुहिम शुरू हो गयी है.












ek Hindustani
September 20, 2010 at 8:56 am
आदरणीय यशवंत जी ..संदीप गोयल और अरुण श्रीवास्तव के हिदुस्तान छोड़ने कि वजह कम पैसा ही नहीं बल्कि हिन्दुस्तान बस्ती में हो रहा शोषण अधिक है बस्ती कार्यालय में फैला ब्राह्मणवाद कि वजह से ही अच्छे पत्रकार हिन्दुस्तान छोड़ने पर मजबूर हुये है हिन्दुस्तान के ब्यूरो राजेश पण्डे के तथा कथित साले सुनील पाण्डेय इस कि सबसे बड़ी वजह है ..जिन्हें खबर लिखना भी नहीं आता बस जिस तरह काम पड़ने पर आदमी गधे को अपना बाप बना लेता है ठेक इसी तरह सुनील ने भी राजेश पाण्डेय को अपना बहनोई बना लिया है ..सोहन सिंह के हिन्दुस्तान छोड़ने कि वजह भी सुनील ही थे l हिन्दुस्तान छोड़ने वाले इन दोनों महाशय से सिर्फ बेगारी ही करायी गयी यह लालच देकर कि जब गोरखपुर का एडिसन शुरू होगा तो आप लोगो को एडजस्ट करा दिया जायेगा लेकिन जब अच्छे दिन देखने का वक़्त आया तो उन लोगो को तरह तरह से परेशान करना शुरू कर दिया गया ताकि यह लोग खुद छोड़ कर भाग जाये l और हुआ भी ऐसा ही संदीप और अरुण ने खुद ही हिन्दुस्तान छोड़ दिया l इन दोनों लोगो ने डाक्टर सत्यव्रत को अपना समझा था लेकिन इन साहब ने भी इनका साथ नहीं दिया जबकि साथ रहने और मदद करने कि बात किया करते थे ..खैर अभी तीन ने ही हिन्दुस्तान छोड़ा है अभी दो और हिन्दुस्तान छोड़ने कि तय्यारी कर रहे है
Saurabh mishra
September 21, 2010 at 5:50 am
i think its not a topic who going wear…………….
ram singh
September 21, 2010 at 7:55 am
yaswant g plese note kari
sandeep goyal $ arun srivastwa hindustan ma salry nahi milti thi. sandeep arun 500 – 500 mandey pate
ram singh
basti
ek Hindustani
September 26, 2010 at 1:27 pm
सही कहा अपने राम सिंह लेकिन कई ऐसे चेहरे है हिन्दुस्तान में जिन्हें मानदेह तो मिलता ही था लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है जो पैर को छु कर ही पत्रकारिता कर रहे है ये आप भी जानते होंगे लेकिन किसी को अच्छे वक़्त आने का लालच देकर सिर्फ शोषण किया जाये ये क्या है और उनको क्या कहेंगे जो पैसा लेने के बजे सिर्फ पैर छू कर पत्रकारिता कर रहे है कम से कम संदीप और अरुण को मानदेह मिलता था