: नए और पुरानों के बीच दीवार खड़ी हुई : सत्यदेव यादव और निशांत कौशिक का इस्तीफा : अमर उजाला गाज़ियाबाद इन दिनों संक्रमण काल से गुजर रहा है. इसे संक्रमण काल ऐसे कहेंगे क्योंकि पांच साल पहले गाज़ियाबाद में अमर उजाला ने जो असफल प्रयोग किया था, उसे दोहराया जा रहा है. तब अमर उजाला गाज़ियाबाद में ट्रांस हिंडन ब्यूरो और अन्य ब्यूरो अलग कर दिए गए थे, हालांकि इतना स्टाफ नहीं रखा गया था.
अब दैनिक भास्कर से सारी भीड़ अमर उजाला गाज़ियाबाद में जबरन भरी जा रही है. जबरन भरी गयी टीम से अमर उजाला के पुराने वफादार खासे नाराज चल रहे हैं. जो सब एडिटर पिछले पांच साल से बगैर प्रमोशन सिर्फ वफादारी के कारण काम कर रहे हैं, उनसे कम उम्र-अनुभव के लोग सीनियर सब एडिटर बनाकर बैठा दिए गए हैं. सूत्रों ने बताया है कि ये वही टीम अमर उजाला में आई है, जिसने पंजाब में भास्कर के साथ काम किया है. इनमें से कई ऐसे भी सीनियर सब एडिटर हैं जिन्हें अभी तक कामनवेल्थ या स्वास्थ्य विभाग तक लिखना नहीं आता. स्वास्थ्य विभाग को सेहत महकमा लिखते हैं. कुछ तो ऐसे हैं कि उन्हें न तो हेडिंग देनी आती है और न ही स्क्रिप्ट लिखनी.
पुराने सदस्यों को तरह तरह से परेशान करने का भी सिलसिला जोरों पर है. जो लोग भास्कर से आये हैं, बाकायदा उनकी फोटो अख़बार में छापी जाती है, फोन नंबर छापे जाते हैं. इन्ही सब कारणों के चलते रविवार को पांच साल पुराने और तेज तर्रार रिपोर्टर सत्यदेव यादव ने इस्तीफा दे दिया. सत्यदेव ने अब हिंदुस्तान, गाज़ियाबाद ज्वाइन कर लिया है.
इसी तरह से बुधवार को अमर उजाला के पांच साल पुराने साथी रहे निशांत कौशिक ने भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने हिंदुस्तान में ही बुलंदशहर ब्यूरो चीफ के पद पर ज्वाइन किया है. निशांत के इस्तीफे को छुपाने की पूरी कोशिश की गयी क्योंकि बुधवार को ही अमर उजाला के ट्रांस हिंडन आफिस का उदघाटन था. गाज़ियाबाद ब्यूरो में जितने भी पुराने अमर उजाला के वफादार हैं, सभी दूसरे संस्थानों में बात कर रहे हैं. ये वही लोग हैं जिन्होंने अमर उजाला को गाज़ियाबाद में पहचान दी और ऊंचाई पर पहुंचाया. लगातार हो रही उपेक्षा और सुबह शाम की जा रही बेइज्ज़ती से कुछ लोगों ने तो मेडिकल भी बनवाने शुरू कर दिए हैं.
एक चीज और गौर करने लायक है. आज तक गाज़ियाबाद ब्यूरो में मार्केटिंग विभाग को एडिटोरियल ने बस उतनी ही तरजीह दी, जितनी एडिटोरिअल के सामने मार्केटिंग की औकात होती है. लेकिन अब तो भास्कर से आये लोगों के साथ मार्केटिंग के लोग बैठकर रिपोर्टर्स की भरती करते हैं और पुराने रिपोर्टर्स पर टीका टिपण्णी करते हैं. लब्बोलुआब इतना है कि गाज़ियाबाद ब्यूरो पर अगर अमर उजाला के मालिकान ने जल्द ध्यान न दिया तो लीडर बनने से पहले ही बस फीडर बन के रह जायेंगे और इसका फायदा दूसरे अखबार उठाएंगे और उठाना शुरू भी कर दिया है.
अमर उजाला से जुड़े एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित












Tathast
September 23, 2010 at 7:55 pm
Amar Ujala Ghaziabad ka sach…
Amar ujala ghaziabad ka sach saamne aana chahiye.. Ye wo office hai jiski team ki mehnat ki wajah se suryakant dwedi news editor se Sidhe Resident editor banaye gaye aur dehradoon unit ki zimedaari di gae, rajendra tripathi NE se sidha RE banaye gaye aur aaj AAGRA unit ko dekh rahe hain, team ka durbhagya ye raha ki jitne editor transfer huye sb january me jo naye aaye unhone 2 mahine me permotion karne se inkaar kar diye… Aisa lagatar 3 saal huwa. Ab bhaskar k log aaye lekin jis performens pe naye log amar ujala k MD etc par impresan jama rahe hain darasal wo saara kamal usi team ka hai jiski wajah se suryakan dwedi, rajendra tripathi etc sampadak bann sake lekin is team k sath is tarah kiya jayega, kisi ko yakin nahi ho raha, wo b tab jb atul ji, rajul ji jaise saral malikaan maujud hain…
एक पत्रकार
September 24, 2010 at 6:23 am
आखिर क्या हो गया है, अमर उजाला को? एक समय था जब गाज़ियाबाद में अमर उजाला दूसरे अखबारों से काफी आगे था, 8-9 साल पहले की ही बात है कि अकेले गाज़ियाबाद में ही अमर उजाला की 12 हज़ार कॉपियां बिका करती थीं, और हाल ये था कि छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी खबर अखबार में मौजूद रहती थी सबसे पहले। लेकिन आजकल तो खबरें ढूंढनी पड़ती हैं। हमारा अमर उजाला पुराने रूप में लौटा दीजिये अतुल माहेश्वरी जी।
XXXXXX
September 24, 2010 at 12:35 pm
Aray Bhai Jammu Ki halat bhi dekh lo… yaha bhi aisi halat hai ki Amar ujala ke maliko ne Dhyan nahi diya to jald hi inka patan hoga.
chandrakant gupta
September 26, 2010 at 1:19 pm
atul ji
sapney dekhana achi bat hai per patrakar ke jajbat se aap pahle bhi kheltey rahey hain ab bhi khel rahye hain patrakar banana ab band kar dijiye ab aap ki bus ki bat nahi humney suna tha ki aap rat-rat bhar patrakar ke sath kam kiya kartey thye ek dehradoon main hain dusra agra
msharma
September 27, 2010 at 8:29 am
amar ujala ab tumahara kuch nahi ho sakta kahan kahan sambhaloge ….sabhi jagah kewal kewal rajniti ki ja rahi …….
shailendra shrivastav
September 28, 2010 at 7:28 am
amar ulala ka circulation 60 se kum hoker 39 thousend aa gaya mubarak ho pancholi ji………..hum to dekh rahe hain ujala ko aaj bante……..
d.gupta
September 28, 2010 at 10:11 am
ghaziabad amar ujala ka jo bhi aapne likha hai usmein 100% sachai hai. bhaskar mein 10-12 thousand paane wale 2nd class reporters ko active batakar Sr. Reporter par 22-25 thousand mein rakha gaya hai. jabki purane logon mein chief reporters ko bhi 21-22 thousand hi milte hain. lagta hai sanjay pandey aur abhimanyu ne atul maheswari aur rajul maheswari par jaadu kar diya hai. purane logon ko pareshan kar naukri chodne par majboor kiya jaa raha hai. dekhte hai pandey aur abhimanyu kab tak malikan ko apne kabje mein rakhte hai.