मेरठ से भड़ास के खबरीलाल ने एक खबर भेजी है. यम-यम चप-चप से संबंधित खबर. यम-यम चप-चप बोले तो खाना-पीना, दावत, माले मुफ्त और दिल-ए-बेरहम. खबरीलाल फोन पर बताते हैं कि…
”भाई साहब, जिलाधिकारी के एक साल पूरे होने पर जिलाधिकारी महोदय की तरफ से एक पार्टी दी गई. इस जश्न में पत्रकारों को बुलाया गया. डीएम साहब आम आदमी से तो मिल नहीं पा रहे, क्या तो कि पंचायत चुनाव में साहब व्यस्त हैं. लेकिन जब एक साल की पार्टी दी तो पत्रकारों से मिलने-मिलाने में, साथ खाने-खिलाने में कोई संकोच नहीं किया. सारे अखबारों, चैनलों आदि के लोगों को बुलाया दावत पर. पत्रकारों ने खाने का जमकर लुत्फ, बिलकुल मुफ्त, उठाया. लोगों ने आइसक्रीम खाते-खाते डीएम साहब को इसी तरह से एक और साल गुजार लेने की शुभकामनाएं भी दे डाली.”
खबरीलाल ने पूरी खबर एक सांस में बता दी तो उससे प्रतिप्रश्न किया गया कि खबर में तो कुछ खास दम है नहीं, फिर इसका टोन निगेटवि क्यों रखे हो, ये दावत-सावत तो बड़ी अच्छी बात है, प्रशासन व पत्रकारों में भाईचारा बढ़ेगा, तुम्हारी आत्मा में कष्ट क्यों है, क्या तुम्हें न्योता नहीं मिला था?
तब बेहद युवा खबरीलाल यंगएंग्रीमैन माफिक बोल पड़ा- पहले के जमाने में तो लोग किसी अफसर का अन्न-नमक नहीं खाते-छूते थे. बाद में इस नियम में थोड़ी ढील देते हुए लोग खाने-पीने लगे लेकिन नमक की परवाह नहीं करते थे और लिखते वही थे जो सच होता था. लेकिन अब तो लोग पूरा का पूरा हजम कर जाते हैं, डकार तक नहीं लेते. अब तो सिस्टम ऐसा बन गया है कि डीएम खिलाएं या न खिलाएं, इन पत्रकारों संपादकों को डीएम के खिलाफ, या फिर डीएम से संबंधित प्रशासनिक गड़बड़ियों के खिलाफ लिखने की हिम्मत नहीं है. ऐसे में दावत में जाकर खाना-पीना ही सबसे उत्तम उपाय था इन लोगों के लिए ताकि जो आल इज वेल बना हुआ है, वह लगातार बना रहे. जय हो यम-यम चप-चप की.
खबरीलाल के आंय-बांय सांय को उनकी महान चिंतित मुद्रा के साथ उन्हीं के पास छोड़ कर, आइए हम आप आगे बढ़ते हैं, देखते हैं कुछ तस्वीरें, मेरठ में डीएम के यहां आयोजित यमयम चपचप की….















joseph
September 27, 2010 at 4:03 pm
bhaiya…collector ko angrejon kee gulami ka chinh kaha jaata hai….darana to padega
Sanjay Sharma.Editor Weekand Times
September 28, 2010 at 2:44 am
यह तो अच्छी बात है. आज कल अफसर मीडिया से बेबजाह की दूरी बना कर रखते है. मेरठ के जिलाधिकारी का प्रयास सराहनीय है. बात सिर्फ खाने की नहीं. मीडिया को सम्मान देने की है. कई जिलो के जिलाधिकारी स्थानीय स्तर पर मीडिया से बात तक नहीं करते. ऐसी कोशिश की सराहना की जाना चहिए.
Radha saxena
September 28, 2010 at 8:35 am
Puspendra hindustani ki nritya mudra badi lubhavni hai.
dkmishra
September 28, 2010 at 5:23 pm
bhayya yeh Repoter Aise Hi Chatukar Hote,Ek Dam nepkin Ki Tarah.Yah Adhikari apne Matlab K Liye Inko Istemal Kartey Hai Aur Phir istemal karke Inko Gu Khilakar Wapas Bhej Dete Hai.he Bhagwan Kya Hoga In Repotaro Ka.