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मंदिर-मस्जिद ने एसएमएस मीडिया को बर्बाद किया

पंकज दीक्षित भाई यशवंत जी, अब सहा नहीं जाता, पहले 3 दिन फिर 8 दिन और अब जाने कब तक. भारत सरकार देश में बल्क/इंटरनेट एसएमएस पर रोक तीन बार बढ़ा चुकी है. 10 दिन में बर्बादी के कगार पर इस व्यापार को पहुंचा दिया है भारत सरकार ने या मंदिर-मस्जिद ने, क्या कहें कुछ समझ में नहीं आता.

पंकज दीक्षित भाई यशवंत जी, अब सहा नहीं जाता, पहले 3 दिन फिर 8 दिन और अब जाने कब तक. भारत सरकार देश में बल्क/इंटरनेट एसएमएस पर रोक तीन बार बढ़ा चुकी है. 10 दिन में बर्बादी के कगार पर इस व्यापार को पहुंचा दिया है भारत सरकार ने या मंदिर-मस्जिद ने, क्या कहें कुछ समझ में नहीं आता.

मैं पिछले 20 दिन उत्तर प्रदेश में आई बाढ़ से जूझ रहे अपने जिले उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के 42 हजार ग्रामीणों को गंगा में और रामगंगा में पानी बढ़ने/घटने की सूचना, नरौरा बांध से पानी छूटते ही अपनी समाचार एजेन्सी जेएनआई न्यूज़ के माध्यम से एसएमएस अलर्ट्स द्वारा दे रहा था. बाढ़ग्रस्‍त गांव-गांव से आई ग्रामीणों की परेशानी और उनकी जरुरत अधिकारियों को पहुंचा कर बाढ़ राहत सहायता केंद्र चला रहा था.

अयोध्या मामले में फैसला आने के चलते सरकार की बल्क एसएमएस रोक के बाद, यह जीवन बचाने वाली सूचना रुक गयी और ग्रामीणों को मुझे 6 मोबाइल इस्तेमाल कर 24 घंटे काम करके फोन से सूचना देनी पड़ी. क्या हम जो जीवन बचाने का प्रयास कर रहे थे, उससे जरूरी था मंदिर-मस्जिद विवाद? क्या मंदिर-मस्जिद उस घाटे को पूरा कर पायेंगे, जो पिछले 10 दिन में इस व्यापार से जुड़े लोगो को हुआ?

ये साले माइक पर भौंकेंगे, टीवी पर दिखेंगे और ठहाके लगाएंगे. विकास के नाम पर धब्बे हैं ये देश के. संविधान से मिली धर्म की आजादी का दुरूपयोग करते हैं ये. इनसे तो बाद में निपटेंगे. जब हिंदुस्तान के उस आखिरी आदमी तक एसएमएस से पहुंच कर इनकी हकीकत बतायेंगे तब जनता खुद जूता हाथ में लेकर दौड़ाएगी इन्हें, बस कुछ इन्तजार करो.

और कहते हैं सरकार सबसे बलवान! मुझे तो दिख नहीं रहा, आखिर सरकार को इस नयी उभरती मीडिया से डर क्यूँ लगता है? अन्य माध्यमों से डर क्यूँ नहीं लगता? टीवी, समाचार पत्र पर रोक क्यूँ नहीं लगाते. ये इन्टरनेट या एसएमएस से ही घबड़ाते हैं. इस बात का प्रमाण सरकार द्वारा बार-बार रोक लगाने से जाहिर हो रहा है. माना कि अखबार में खबरें बासी होती हैं मगर टीवी तो सीधा प्रसारण करता है? फिर भी डर केवल एसएमएस से लगता है. कहीं ये देश की सबसे शक्तिशाली मीडिया तो नहीं!

-पंकज दीक्षित

संपादक/सीईओ

जेएनआई न्यूज

मोबाइल एलर्ट सर्विस

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0 Comments

  1. lakshme kant

    September 29, 2010 at 11:15 am

    main chata hu aman lekin kuch aasamajik tatb bhart me aatank felana chahte hai.dharm ke nam par log bhut bdi bdi bate karte hai lekin aaj ayodhya mudde se saf ho gya ki logo ke mann me kya hai

  2. Dilip Batu

    September 29, 2010 at 12:21 pm

    Pankaij ji me aapko baat se sahmat hu…muje bhi sms sewa band hone se kafi dikkt aa rahi he. govt. ko Sms Band karne ke bajay Tv/redio par band lagana tha..

  3. winit

    September 29, 2010 at 2:15 pm

    पंकज भाई , बेशक ये बहुत शक्तिशाली मीडिया है, क्यूंकि सिर्फ प्रशासन ही नहीं, इसकी त्वरित सेवा की धार से भयाक्रांत होकर स्थापित मीडिया के चंद स्वनाम धन्य लोग भी सी माध्यम को फर्जी और चालू किस्म का साबित करने में लगे है…..
    साथ ही इसके लिए कोई नियमन ना होने कि वजह से जो गली नुक्कड़ पर जो अतिउत्साही पत्रकारों कि फ़ौज उमड़ पड़ी है, वो इस विधा को सबसे ज्यादा नुकसान पंहुचा रहे है,बदनाम कर रहे है और इसकी विश्वस्नीयता पर सवालिया निशान लगा रहे है ,मैंने स्वयं MIB को मेल कर इसके नियमन और पंजीकरण हेतु आवश्यक कदम उठाने हेतु लिखा है
    आप जैसे जिम्मेदार लोग अगर इसी तरह ईमानदारी से सक्रिय रहेंगे तो बहुत जल्द इसे सम्मानित माध्यम के तौर पे लोग गंभीरता से लेने को मजबूर होंगे
    धैर्य रखे,शुभकामनाये
    _विनीत_
    NewsZone BroadCom P Ltd
    [email protected] 9450449019

  4. anuj

    September 30, 2010 at 7:28 am

    Gehun ke saath ghun bhi pista hai. Aisa hee hua hai sms media k saath. jaisa ki aap maante hai ki ye ek badi sakti hai aur iska durpyog ho sakta hai .

  5. पंकज झा.

    September 30, 2010 at 8:10 am

    निश्चित ही यह ऐसा द्रुत माध्यम है जिस पर सरकार के लिए नज़र रखना आसान नहीं है, ना ही हर मोबाइल का निगरानी इतना आसान है. टेलीविजन की हर खबर पर पर कम से कम निगरानी तो राखी ही जा सकती है. सो ऐसे मौके पर एसएमएस पर रोक लगाना व्यापक सरोकारों के लिए ज़रूरी है. हो सकता है पंकज जी जैसे कुछ अछे काम करने वाले लोगों को परेशानी हो लेकिन बड़े काम के लिए कई बार छोटी-छोटी बातों को नज़रंदाज़ करना होता है.

  6. mahesh sharma

    September 30, 2010 at 8:55 am

    pankaj ji aap ka kahana ekdam sahi hai ki sms media sabse takatvar media sabit hoga. abhi to shuruaat bhar hai aap is par lage raho. ek din aapki desh me alag pahchan hogi. Kyaonki 42000 logon tak apni baat pahuchane ka aur koi sadhan ho hi nahi sakta. massage ke dwara to karodon logon ko kuchch hi minton me massage bheja ja sakta hai.
    mahesh sharma
    editor jagat vichar. meerut 9897606884

  7. dkmishra

    October 1, 2010 at 2:50 pm

    News Alert Sewa Par Ban Laga kar Pardesh aur Kendar Sarkar Ki asliyat Khul Gayee Hai,Yah Log Ubharti HuyeeSMS Media Se Jal Rahe Hai.Isi Liye Is Par Ban Laga DiyaHai.Aapka JNI NEWS Bhi Acha Hai Par News Sabse Fast TehalkaToday.com Deta.Jiska Network Pure Desh aur Pradesh me Hai.Mujhe Aiski News Acchi Lagti Hai.Aap Sab Sms News Alert K Malik Milkar Apni Ek Union Ka Ghatan Karaye.Jisse Yah Problam Kabhi Phir Na Samne Aye.Aur Sab milkar Rahe.Ek dusre Par Chitakashi(Comment) Na kare.

  8. winit

    October 3, 2010 at 7:10 pm

    D K MISHRA JI आपका सुझाव पर अमल चल रहा है, मगर उत्तर प्रदेश में कुछ लोग स्वयम्भू बनकर सब का नुकसान करना चाह रहे है है ,आप सभी लोग जो इस माध्यम से सम्बंधित है, कृपया अपना contact no & email ID सहित संपर्क करें ,शायद हमसब मिलकर ही इन साज़िशो का मुकाबला कर पाएंगे.

    —-अमित मेहरोत्रा—-
    NewsZone BroadCom
    New Delhi— [email protected]
    LKO Cnct:9450449019 [email protected]

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