: एसटीवी नेटवर्क का हिमाचल न्यूज भी बंद, अब हरियाणा न्यूज की बारी : क्या सच लिखना वाकई बुरी बात है! : रोहतक । क्या सच लिखना या सच्चाई के बारे में बताना बुरी बात है? अगर है तो मैंने यह बुरी बात की है। दरअसल इन दिनों जब मैंने एसटीवी नेटवर्क यानि पंजाब टुडे ग्रुप से जुड़े सच पर से पर्दा उठाया और हरियाणा सरकार की ओर से 150 से ज्यादा पत्रकारों को दिए गए पुरस्कार पर सवाल उठाया तो मेरे पत्रकार मित्र मुझसे नाराज हो गए।
वे मुझे सलाह देने लग गए कि इसकी क्या जरूरत थी। इतने इमानदार या ऊसूलों वाले क्यों बनते हो। जो हो गया और हो रहा है, उसे हो जाने दे। लिखकर अपनी भड़ास निकालने से क्या हो जाएगा। इसके बाद अनेक लोगों की मेरे बारे में टिप्पियां आईं, मुझे जमकर भला-बुरा कहा। बोले शराबी है, इसके बारे में सब जानते हैं, आज तक कभी ब्यूरो चीफ तक भी नहीं पहुंच पाया। किसी सरकार ने पुरस्कार के लायक नहीं समझा। दरअसल इन टिप्पणियों पर मुझे जरा भी गुस्सा नहीं आया क्योंकि मैं जैसा हूं, वैसा हूं। कम से कम सरेआम शराब पीने वाला आदमी झूठा तो नहीं होता। उसे किसी की कोई फिक्र नहीं होती। फिर मेरे शराब पीने का पत्रकारिता पुरस्कार से क्या लेना-देना है। मैंने तो जनता के सामने वही लिखा या बोला जो गलत हुआ था। कम से कम मैंने इतनी हिम्मत तो दिखाई कि सच लिख दिया। अब मुझे चाहे कोई कितनी ही गालियां देता रहा। इससे सच बदलने वाला नहीं है।
एसटीवी नेटवर्क या यूं कहें कि पंजाब टुडे ग्रुप वाले मेरे मित्र भी मुझसे नाराज हैं। जब से मैंने यह बात सार्वजनिक की है कि इस ग्रुप में कभी समय पर सैलरी नहीं मिलती और जो मिलती है, उसे लेने के लिए भी बुरे दौर से गुजरना पड़ता है, तब से मेरे मित्र भी मुझे गालियां दे रहे हैं। हालांकि वैसे तो कहते हैं सारी बात ठीक है, लेकिन साथ ही उनका कहना है कि यह सबको बताने वाली बात नहीं थी। अब सबको पता चल गया कि उन्हें समय पर सैलरी नहीं मिलती और ग्रुप में क्या हालात हैं। देखिए कितना दोहरा नजरिया है मेरे इन मित्रों का। चलो मान लेते हैं कि वे प्रबंधन के खिलाफ खुलकर आवाज नहीं उठा सकते, लेकिन जो उठा रहा है उसे भी क्यों कोस रहे हो।
चलिए, अब जरा एसटीवी का ताजा हाल जान लिया जाए. एसटीवी नेटवर्क से अभी दो-तीन पहले ही खबर आई थी कि पंजाब टुडे का प्रसारण बंद कर दिया गया है। अब ताजातरीन समाचार यह है कि हिमाचल न्यूज चैनल भी मंदी के नाम पर बंद कर दिया गया है। जिससे इन चैनल से जुड़े लोग एकाएक ही बेरोजगार हो गए हैं, उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। एक अक्टूबर से ही यह चैनल ऑफ एयर हो गया है। जेके जैन के स्वामित्व वाले एसटीवी नेटवर्क के इससे पहले चार चैनल बंद हो चुके हैं। सबसे पहले बल्ले-बल्ले म्यूजिक चैनल, फिर गोवा न्यूज,यूपी न्यूज, पंजाब टुडे और अब हिमाचल न्यूज। हालांकि करीब तीन साल पहले चैनल की ओर से अधिकारिक घोषणा की गई थी कि एसटीवी नेटवर्क करीब एक दर्जन क्षेत्रीय चैनलों का जाल बिछाएगा, लेकिन जिस गति से बचे-खुचे चैनल भी बंद हो रहे हैं। उसे देखते हुए तो अब यही लगता है कि एकमात्र चैनल हरियाणा न्यूज के भी बुरे दिन दूर नहीं हैं।
हिमाचल न्यूज के बंद होने के बाद अब हरियाणा न्यूज के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अब उन्हें डर सताने लगा है कि इस बार बंद होने का नंबर हरियाणा न्यूज का ही आएगा क्योंकि बाकी और कोई चैनल तो बचा नहीं। ऐसे में हरियाणा न्यूज के कर्मचारियों के लिए बेहतर रहेगा कि वे अभी से कहीं और नौकरी तलाशना शुरू कर दें क्योंकि जब यह चैनल भी बंद होगा तो उन्हें मौका भी नहीं मिलेगा। उधर, एसटीवी नेटवर्क छोड़ने के बाद भी कर्मचारियों की दिक्कत कम नहीं होती। उन्हें बची सैलरी लेने के लिए भी महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। जिस कर्मचारी ने यहां एक साल काम कर लिया, उसकी चार माह की सैलरी तो प्रबंधन के पास रहती ही रहती है। फिर उस चार की सैलरी को लेने के लिए आठ माह तक चक्कर लगाने पड़ते हैं।
दीपक खोखर
रोहतक












rakesh
October 8, 2010 at 8:01 am
dost tum likho or —ye bhi add kro k INCOME TAX DEPPT ko bhi chuna lagaya hoga– bcz aaj k din sahi org TDS K naam pr khub ugahi kr rhe hn pr kabhi paise deptt k hawale nhn krte–
sagar
October 9, 2010 at 1:23 am
bil kul such kaha mere bhai saalo ne kabhi time per salry nahi di. ab kum se kum phale ka paisa to ded