वीआईपी या प्रीमियम नंबर रखने का हर किसी को शौक होता है। बात यदि मोबाइल नंबर की हो तो फिर क्या कहना। ऐसे नंबरों के लिए रईस घराने के लोग मुंह मांगे दाम देने के लिए तैयार रहते हैं। वीआईपी नंबरों के मुंह मांगे दाम पाने के लिए कंपनी के कर्मचारी भी ललायित रहते हैं। वे कंपनी से आने वाले नए नंबरों के लाट में से समान अंकों वाले नंबर ऊंची कीमत लेकर बेच देते हैं। इसके अलावा कंपनी के लोगों ने एक प्रीमियम नंबर हड़पने का एक और फंडा अपना रखा है।
ये लोग कंपनी की वेबसाइट पर ऐसे नंबरों को तलाश कर लोगों को उनका नंबर बेचने के लिए कहते हैं। यदि व्यक्ति पैसे के लालच में आकर नंबर बेच देता है तो ठीक, अन्यथा ये लोग कंपनी में अपनी पहुंच का उपयोग करते हुए नंबर को बंद करा देते हैं। जब व्यक्ति कस्टमर केयर से संपर्क करता है तो वहां से कोई सहायता नहीं मिलती और व्यक्ति को अपने नंबर से हाथ धोना ही पड़ता है। गत दिनों एक ऐसा ही एक मामला सामने आया।
सीहोर निवासी विशाल दुबे ने बताया कि उन्होंने इंदौर में करीब तीन साल पहले रिलायंस मोबाइल कंपनी से 9301111101 नंबर पोस्ट पेड सेवा के तहत लिया था। करीब एक साल पोस्टपेड मोबाइल चलाने के बाद उन्होंने इसे प्रीपेड करा लिया और इसका उपयोग कर रहे हैं। इस नंबर को बेचने के लिए उनके पास कभी-कभी लोगों के फोन आते रहते हैं। दिनांक 09 अक्टूबर 2010 को शाम करीब 6.45 बजे 9303711424 नंबर से एक व्यक्ति को काल आया और उसने कहा कि आपका नंबर तो बंद था चालू कैसे हो गया। उन्होंने इस नंबर के बंद होने बात का खंडन किया लेकिन कुछ ही देर बाद रिलायंस कंपनी से फोन बंद किए जाने का मैसेज आ गया।
इसके बाद विशाल ने जब कस्टमर केयर से संपर्क किया तो वहां से बताया गया कि भोपाल के एक वेबवर्ल्ड के इंचार्ज ने इस नंबर के चोरी होने की कंपलेन की है। जिस पर उक्त नंबर बंद कर दिया है। कंपनी के अन्य अधिकारियों से संपर्क करने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। पूरे प्रकरण में एक बात सामने आई है कि कंपनी के कर्मचारी अच्छे नंबरों को बेचने के लिए किस प्रकार के फंडे अपना रहे हैं। वहीं कंपनी के अधिकारी अपने उपभोक्ताओं की सहायता भी नहीं कर पा रहे हैं।












भड़ास फैन
October 12, 2010 at 1:05 am
यशवंत भाई इस न्यूज़ का मीडिया पोर्टल पर क्या तुक है…??
Imran Zaheer
October 13, 2010 at 1:59 am
[i][b]जाहिर है की मीडिया जगत में नंबर-१ हो चुकी इस वेबसाइट पर मीडिया से सम्बंधित खबर की भरमार है लेकिन एक आम आदमी की समस्या को प्रकाशित किया जाना अच्छी बात है|[/b][/i]