पीपुल्स समाचार, ग्वालियर से एक और साथी ने नमस्कार कर लिया है। यह हैं पीपुल्स समाचार ग्वालियर में क्लासीफाइड विज्ञापन का सेगमेंट जमाने और देखने वाले प्रशांत चिंचड़ीकर। इन्होंने पीपुल्स छोड़ पत्रिका ज्वाइन करना ज्यादा बेहतर समझा और बात डन होते ही नवदुर्गा के पहले ही दिन पत्रिका के दफ्तर में पहुंच गए।
पीपुल्स को ग्वालियर में शुरू हुए अभी एक साल पूरा होने में करीब महीने भर शेष हैं पर इन दस माह बीस दिनों में पीपुल्स से कम से कम पच्चीस लोग नौकरी छोड़ चुके हैं और मौका लगते ही अच्छा ऑफर स्वीकार कर लेते हैं। जल्द ही पीपुल्स समाचार ग्वालियर को दो झटके और लगने वाले हैं। यह झटके सर्कुलेशन और विज्ञापन की टीम में काम करने वालों की तरफ से आने वाले हैं। यह दोनों जल्द ही नए संस्थानों में पहुंचने वाले हैं।











