
रीता विश्वकर्मा
नेत्र ज्योति विहीन महात्मा बोले- हे राजन्! आदमी की पहचान उसकी वाणी से होती है. सो मैंने आपके नौकर और महामंत्री की वाणी और शिष्टाचार से उन्हें पहचान लिया. यह तो रही कहानी जो हमें बताती है कि आदमी की पहचान उसकी वाणी से होती है. ठीक इसी तरह पुलिस विभाग के कुछ उच्चाधिकारी भी हैं जो प्रेस वार्ताओं में बड़ी शालीनता का परिचय देते हुए अच्छी पुलिसिंग का दम भरते हैं और यह दावा करते हैं कि पुलिस आम जनता से मित्रवत पेश आती है और यदि कहीं से किसी पुलिस जन द्वारा लापरवाही या किसी का उत्पीड़न किए जाने की कोई सूचना मिलती है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. लेकिन वास्तव में ये सभी उस नेत्र ज्योति हीन महात्मा की तरह नहीं हो पाए जो अपनी वाणी और करने में एक होते हैं. यूपी पुलिस के उच्चाधिकारी न्याय का नाटक करते हैं, मीठे शब्दों और मोहक मुस्कान के साथ. उनकी मृदुल वाणी और मोहक दावों के बावजूद उनकी पुलिस और उनके प्रशासन के लोग जनता खासकर महिलाओं का उत्पीड़न करने में तनिक भी संकोच नहीं करते, जो कि अशोभनीय बात है.
हमारे प्रिय बड़े भाई यशवन्त सिंह की माता श्रीमती जमुना सिंह के साथ ही अन्य तीन माताओं को नन्दगंज थाने की पुलिस द्वारा बंधक बनाकर उनका मानसिक उत्पीड़न करना वाकई महिलाओं के लिए एक शर्मनाक घटना है. चूंकि मैं भी एक महिला हूँ, और पत्रकारिता जैसे मिशन से जुड़कर समाज सेवा कर रही हूं, इस तरह की घटना/घटनाओं का मैं खुले दिल से विरोध करती हूँ और यह कहती हूँ कि यशवन्त भइया, आप किसी तरह से अपने को कमजोर न समझें. आपकी इस लड़ाई में हम सभी आपके साथ हैं. पत्रकारों या उनके परिजनों को इस तरह से प्रताड़ित करने वाले पुलिस जनों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.
रीता विश्वकर्मा
अकबरपुर, अम्बेडकरनगर












K Arvind
October 20, 2010 at 5:15 am
Apne paagalpan ke liye Uttar Pradesh Police KUKHYAT hai aur PAAGALON ke baare men kaha jaata hai ki ….KAA NAHI PAAGAL KAR SAKE.
K Arvind
October 20, 2010 at 5:22 am
Apne PAAGALPAN ke liye Uttar Pradesh Pulice KUKHYAAT hai aur PAAGALON ke baare men kahaa Jaata hai ki KAA NAHI PAAGAL KAR SAKE
vikas srivastava
October 21, 2010 at 11:35 pm
apke vichar hame prabhavit kar gai, bahut badhiya.