बस्ती। पंचायत चुनाव में पुलिस अधिकारियों द्वारा चुनाव कवरेज के दौरान मीडियाकर्मियों से किये गए अभद्रता पूर्ण व्यवहार से नाराज मीडिया कर्मियों ने मंडलायुक्त को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा. ग्रामीण पत्रकार एसोसिएसन के नतृत्व में मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे पत्रकारों ने कमिश्नर की गैर मौजूदगी में अपर आयुक्त कृष्ण कुमार श्रीवास्तव को समस्याओं से सम्बंधित ज्ञापन दिया तथा ज्ञापन की एक प्रति आयुक्त कार्यालय पर चस्पा कर दिया. जिलाधिकारी की प्रेस कांफ्रेंस का ग्रामीण पत्रकार एसोसिएसन के बहिष्कार के आह्वान के बावजूद संगठन के कई सदस्य प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद रहे.
जिले के तमाम पत्रकार प्रेस क्लब पर इकठ्ठा हुए और आयुक्त कार्यालय पहुंचे. अभद्रता पूर्ण व्यवहार से नाराज़ पत्रकारों ने पुलिस/प्रशासन विरोधी नारे लगा कर अपना आक्रोश व्यक्त किया. पत्रकारों का नेतृत्व कर रहे संगठन के जिला अध्यक्ष अवधेश त्रिपाठी व महामंत्री संजय द्विवेदी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अधिकारी कार्य संस्कृति व व्यवहार में बदलाव लायें. पत्रकार हितों की रक्षा के लिए एसोसिएशन ने जिला स्थायी समिति की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की.
ज्ञापन में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी अपमानजनक टिप्पणी, मीडियाकर्मियों से सामंजस्य स्थापित न करना, प्रेस पास को निरस्त करने सहित कई समस्याए बातें शामिल हैं. इस मौके पर विपिन बिहारी त्रिपाठी, अशोक श्रीवास्तव, राजेश सिंह विसेन, अरविन्द श्रीवास्तव, योगेश शैली, राजेश मिश्र, अनूप पाण्डेय, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, सुरेन्द्र पाण्डेय, वीरेंदर यादव, महेंद्र त्रिपाठी, रामरतन पटेल, वसीम अहमद, विकास शुक्ल, पंकज त्रिपाठी, रमेश चन्द्र, सोहन सिंह, संतोष कसौधन आदि मौजूद रहे.
विकास भवन सभागार में आयोजित जिलाधिकारी की प्रेस कांफ्रेंस का ग्रामीण पत्रकार एसोसिएसन के बहिष्कार के आह्वान के बाद भी पत्रकारों की मौजूदगी बनी रही. कांफ्रेंस में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएसन के कई सदस्य मौजूद रहे. इससे साफ़ ज़ाहिर है कि बस्ती के सभी पत्रकार ग्रामीण पत्रकार एसोसिएसन के साथ नहीं हैं और इनका आपस में मतभेद है. यूपी न्यूज़ के जयंत मिश्र, जनमोर्चा के केके श्रीवास्तव, जागरण के आशुतोष त्रिपाठी, स्टार न्यूज़ के मजहर हुसैन, सहारा समय के पुनीत ओझा, भारतीय बस्ती के प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, पायनियर के संदीप गोयल, भारतीय बस्ती के राकेश चन्द्र बिन्नू और दिनेश चन्द्र पाण्डेय भी जिलाधिकारी की प्रेस कांफ्रेंस में सबसे आगे की कुर्सियों पर दिखे.












mazhar Husain
October 29, 2010 at 8:19 pm
बहुत कमीने हो तुम मै नहीं जानता की तुम कौन हो लेकिन मिल जाओ तब बताऊ मिलोगे एक न एक दिन .ज़रूर तुम सिर्फ फूट डालना चाहते हो हमारे बीच .. हम पत्रकार सब एक थे एक है और एक रहेनेगे . और तुम्हारी ये गन्दी कोशिश पत्रकारों को अलग करने की कभी कामयाब नहीं होगी और जहा तक डीएम की प्रेस कांफ्रेंस के बहिष्कार की बात है तो मुझे तो पता ही नहीं था की ग्रपाए ने बहिस्कार किया है .लेकिन उतना तो ज़रूर कहूँगा की जब जिलाधिकारी कह रहे थे प्रेस कांफ्रेंस में की जिस पत्रकार के साथ हमने बदसलूकी या अपमानित किया है उसे सामने लाओ तो आखिर क्यों नहीं सामने आये भाई जिलाधिकारी खा नहीं लेते किसी को और रही बात ग्रपाए की तो बहिस्कार किया था प्रेस कांफ्रेंस का तो विकास भवन के बहार सबको रहना चाहिए था लेकिन वहा तो सिर्फ शैली और शतीश को छोड़ कोई नहीं था कम से कम कुछ करने से पहले आपस में मिलकर बात चीत करनी चाहिए यहाँ कई संगठन है पत्रकारों के ज़रूरी नहीं सब ग्रपाए की बात माने ही ये ग्रपाए की गलती है इसे मानना पड़ेगा l या भी ज़रूरी नहीं की ग्रपाए जो कह दे सारे पत्रकार निकल पड़े इसके लिए उनलोगों को मीटिंग कर बात करनी चाहिए सबकी राय लेना चाहिए ये बहुत ज़रूरी है ल लेकिन फिरभी हम सब आज भी एक है और एक रहेंगे ल कुछ तो ऐसे होते ही है जो गद्दार होते है जैसे की आप ही…
Puneet Dutt Ojha
October 30, 2010 at 8:25 pm
ग्रामीण पत्रकार एशोसीएशन जनपद के ग्रामीण पत्रकारों का संघटन है जिसे जिले के कुछ इंटर नेशनल पत्रकार जिन्हें इस बात का घमंड है की मैंने कई राज्यों में पत्रकारिता का काम किया है और अपने अनुभव के चटपटे किस्से बताकर संघटन के कुछ एक पदाधिकारियों को प्रभाव में लेकर योजना बनाई कि जिला प्रशाशन पर इस बात का दबाव बनाया जाये कि हमारे पास बहुत ताकत है हम नदी कि धारा को बदल सकते है और ग्रपये का उपयोग किया लेकिन उन्हें नहीं मालूम है कि जिला श्तर पर भी वरिस्थ पत्रकारों का संघटन है जिसे क्या करना है क्या नहीं करना है ये अच्छी तरह मालूम है ऐसे में बहिस्कार का निर्णय लेकर उन इंटर नेशनल पत्रकार ओ क़ी गणित का शिकार ग्रपय हो गया है जो अपने प्रभाव के इस्तेमाल के लिए ग्रपय को उपयोग करना चाह रहे थे यहाँ के पत्रकार हमेशा एक रहे है और एक रहेंगे इसमें किसी के प्रमाण क़ी जरूरत नहीं है यशवंत जी ने आपको खबर पोस्ट करने का अधिकार दिया है तो कम से कम पारदर्शिता के साथ बैठक में उपस्थित सभी साथियो का नाम स्पष्ट रूप से लिखे तभी साथी पत्रकारों के भड़ास का अंत होगा l
ek Patrkaar
November 1, 2010 at 12:25 am
पुनीत जी हम जानते है आप लोगो की क्या राजनीति है पहले अपने को दुरुस्त करे एक तरफ तो पत्रकारों के साथ होने की बात करते है और दूसरी तरफ अधिकारीयों की हा में हा मिलाते है आपको पत्रकार एकता की बात शोभा नहीं देती और यहाँ कोई इंटरनेशनल पत्रकार नहीं है इंटरनेशनल पत्रकार तो आप ही है मैं तो स्पष्ट रूप से कहूँगा की जब पत्रकारों की बात हो तो सब को एक होना चाहिए तभी आपका और हमारा मान सम्मान सुरक्षित रहेगा ..और मजहर जी आप आपको तो सब पता रहता है लेकिन आप जान बूझ कर नज़रंदाज़ करते है आप तो अधिकारी की भाषा बोल रहे है रही बात गद्दारी की तो ये सब जानतइ है की गद्दार कौन है और जहा तक बताने की बात आपने लिखा है जब वक़्त आएगा तब देखा जायेगा लेकिन कुछ कर नहीं पाओगे अभी वक़्त है पत्रकार हित की बात करो कुछ गलतिया ग्रपये में ज़रूर है उसे दूर कर लिया जायेगा लेकिन मैं एक बार फिर कहूँगा की आप सबको एक साथ होना चाहिए
ek Patrkaar
November 1, 2010 at 12:26 am
पुनीत जी हम जानते है आप लोगो की क्या राजनीति है पहले अपने को दुरुस्त करे एक तरफ तो पत्रकारों के साथ होने की बात करते है और दूसरी तरफ अधिकारीयों की हा में हा मिलाते है आपको पत्रकार एकता की बात शोभा नहीं देती और यहाँ कोई इंटरनेशनल पत्रकार नहीं है इंटरनेशनल पत्रकार तो आप ही है मैं तो स्पष्ट रूप से कहूँगा की जब पत्रकारों की बात हो तो सब को एक होना चाहिए तभी आपका और हमारा मान सम्मान सुरक्षित रहेगा ..और मजहर जी आप आपको तो सब पता रहता है लेकिन आप जान बूझ कर नज़रंदाज़ करते है आप तो अधिकारी की भाषा बोल रहे है रही बात गद्दारी की तो ये सब जानतइ है की गद्दार कौन है और जहा तक बताने की बात आपने लिखा है जब वक़्त आएगा तब देखा जायेगा लेकिन कुछ कर नहीं पाओगे अभी वक़्त है पत्रकार हित की बात करो कुछ गलतिया ग्रपये में ज़रूर है उसे दूर कर लिया जायेगा लेकिन मैं एक बार फिर कहूँगा की आप सबको एक साथ होना चाहिए
श्रीश द्विवेदी
November 1, 2010 at 5:24 am
किसी दलाल के समाचार पर बेकार में बहस हो रही है। इसका अता पता भी फर्जी हो सकता है। ये सरकारी दारु पीकर लिखने वाला लगता है। अगर ये दलाल है तो दलाल बेहया होते हैं इससे बेकार की बक ठैं ठैं करने से क्या हाशिल होगा। इसे पब्लीसिटी गाली खाकर भी मिल रही है। बिना कुछ लिये इसने लिखा नहीं होगा और अब टिप्पणियों से पब्लीसिटी भी पा रहा है।
Srish Dwivedi
November 1, 2010 at 12:15 pm
हुसैन भाई आपने शायद लिखने में जल्दबाजी कर दी। ये कमीना नहीं दोगला है। जो पत्रकार होकर भी पत्रकारों में फूट की बात कर रहा है। हाँ दलाली करने मे फूट तो है ही, हो सकता है ये दलाल हो। आगे की कुर्सी पर बैठे होने की बात लिखकर इसने ये भी जाहिर कर ही दिया है कि औकात के मुताबिक ये पीछे बैठा था और इसी गम में खबर लिखी है। इसका समाचार दिशा हीन होकर इसके नशे में होने का भी इशारा कर रहा है।
Shiva Harshvardhan
November 2, 2010 at 2:56 am
इक पत्रकार महोदय, सादर प्रणाम!
प्रतिक्रिया की प्रतिक्षा की न आने पर अब आपसे करबद्व निवेदन क्षमा
प्रार्थना के साथ करता हूँ कि, इन्टरनेट पर कुछ लिखने से पहले ये जरुर
सोच लिया करें कि ये लेख दुनियाँ के किसी कोने मे काई पढ़ सकता है। और
इन्टरनेट के यूजर इस बात को बेहतर जानते भी हैं। विशुद्ध समाचार नामजद
होकर लिखें जिसे सारी दुनियाँ में सराहा जाय। लिखने की इसपर कोई मनाही न
होने का मतलब अपनी बात दुनियाँ तक आप पहुँचा सकें।
तुच्छ बातों को जब झुरमुट की आँड़ से इक
पत्रकार बन कर लिखा जाता है तो यहाँ इन्टरनेट की दुनियाँ में खोपड़ी वालों
की कोई कमी नहीं यूँ समझिये कि यहाँ हर ऊँट के लिये पहाड़ मौजूद हैं। हमें
विदेशों से टिप्पड़ी मिल सकती है।
अगर आप इमानदारी से विशुद्ध पत्रकार हैं तो ये बात आपके समझ जरुर आयेगी।
नहीं तो खेल आगे बढ़ाइये और अगली टिप्पड़ी का इन्तजार करें हो सकता है कोई
कोरिया या अमेरिका से इस बार जवाब दे।