हरियाणा के कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार डीएस अनुज का निधन हो गया। वे 70 साल के थे। उनका अंतिम संस्कार बहादुरगढ़ में किया गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। अनुज के निधन पर प्रदेश भर के पत्रकारों ने शोक जताया है। डीएस अनुज के निधन के साथ ही क्षेत्र की साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्याय का भी अंत हो गया।
अपने स्वभाव एवं सरल व्यक्तित्व के चलते वे हर वर्ग में प्रिय थे। अनुज इन दिनों रोहतक से प्रकाशित हिन्दी दैनिक हरिभूमि के साथ जुड़े हुए थे। इस अखबार की लांचिंग के समय से ही इसके साथ थे। लगभग चार दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता की सेवा कर रहे अनुज का वास्तविक नाम धूम सिंह था। इनका जन्म 2 जनवरी 1939 को यूपी के बिजनौर जिला के तिसोत्रा गांव में हुआ था।
उनकी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बिजनौर से हुई। इसी बीच इनकी पत्नी शकुंतला की मौत हो गई। जिसके चलते उनकी पढ़ाई में बाधा पहुंची। इसके बाद वे अपने तीन वर्षीय बिटिया अर्चना के साथ बहादुरगढ़ आ गए। फिर यहीं के होकर रह गए। यहीं से उन्होंने स्नातक किया। अनुज उपनाम से कविता व पत्रकारिता में गहरी पैठ रखने वाले इस रचनाकार का परिचय इस बीच हरियाणा के अनेक साहित्यकारों से हुआ। ये लोग अंत तक उनके सहयात्री बने रहे।
अपने लेखन के शुरुआती दिनों में डीएस अनुज ने सरिता, मुक्ता सहित कई पत्रिकाओं में कार्य किया। हरियाणा में आने के बाद नगर दर्शन, जनसत्ता, दैनिक जागरण, पींग व राजनीति मंच सहित कई ई-पत्र-पत्रिकाओं में अपनी धारदार लेखनी का लोहा मनवाया। हरिभूमि परिवार से वे लगभग 14 वर्षों से जुड़े हुए थे। अनुज की काव्य रचनाएं लंबे समय तक देश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित व आकाशवाणी से नियमित रुप से प्रसारित होती रहीं।
शोक संवेदनाओं का दौर जारी
अनुज के निधन पर शोक संवेदनाओं का दौर भी जारी है। मीडिया क्लब, रोहतक के कैनाल विश्राम गृह में हुई बैठक में उनके निधन पर शोक प्रकट किया गया। दिवंगत आत्मा के प्रति गहरी संवेदना जताई गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि डीएस अनुज के लेखन से जुड़ी एक स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा। इस बैठक में वीर अर्जुन के प्रधान संपादक के नरेंद्र के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। बैठक में रोहतक जिला के सभी पत्रकार मौजूद थे।
पत्रकारिता का पुरोधा चला गया
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के जनसंपर्क निदेशक सुनित मुखर्जी ने डीएस अनुज के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता जगत से महान पुरोधा खो दिया है। उनकी क्षतिपूर्ति होना नामुमकिन है।












arvind kumar singh
October 29, 2010 at 9:32 pm
anuj bhai bahut kabil patrkaar aur bahut behtareen insaan the. haribhoomi ki to va reedh hi the. main jab haribhoomi delhi me editor tha to bahut se mamlon me unki rai leta rahta tha.unke nidhan ki khabar se bahut dukh hua.
arvind kumar singh
yograj sharma
October 29, 2010 at 9:49 pm
बहुत ही सद ह्दय और बडे दिल वाले थे डी एस अनुज… जब हमने पत्रकारिता की शुरुआता की… उसी समय से हमने उनसे प्रेरणा ली… श्री अनुज को जर्नलिस्ट टुडे नेटवर्क की तरफ से श्रद्धांजलि
योगराज शर्मा
एडिटर इन चीफ
जर्नलिस्ट टुडे नेटवर्क
Rajesh Kashyap
November 1, 2010 at 9:40 pm
श्री डी.एस. अनुज जी के देहांत का समाचार पाकर दिल जार-जार करके रोया।
ऐसा लगा कि मानों कोई अपना सबसे करीबी हमें अनाथ छोड़कर चला गया हो।
श्री अनुज जी का व्यक्तित्व अत्यन्त अनुकरणीय, शालीन एवं हृदयस्पर्शी था। यदि सच पूछो तो यदि मैं आज जो कुछ भी हूँ और पत्रकारिता जगत में बतौर लेखक एवं समीक्षक अपनी पहचान बनाई है, उसका पूरा श्रेय मैं स्वर्गीय श्री डी.एस. अनुज जी को देता आया हूँ। जब मैनें लेखन कार्य शुरू किया था तो दैनिक हरिभूमि से शुरू किया था। वर्ष १९९९ में मैं हरिभूमि परिवार से बिल्कुल अनजान था। शुरूआत में स्थानीय पत्रकार श्री अनिल बंसल व श्री कर्मवीर जी से नारायण काम्पलैक्स स्थित स्थानीय हरिभूमि कार्यालय में हुई थी। उन्हीं के माध्यम से तत्कालीन प्रबन्धक श्री सतपाल मल्हाण जी से परिचय हुआ। इस परिचय की श्रृंखला में अगला नाम जुड़ा श्री डी.एस. अनुज जी का। श्री मल्हाण जी ने एक दिन बातों ही बातों में स्वर्गीय श्री डी.एस. अनुज जी का जिक्र किया और उनकी प्रशंसा के पुल बांधें तब मेरे मन में ऐसे महान व्यक्तित्व के दर्शन करने की अभिलाषा जागी। एक दिन संयोगवश हरिभूमि के कार्यालय इंडिस्ट्रियल एरिया में जब मैं अपने लेखों का पारिश्रमिक लेने गया तो तब पहली बार मैं श्री डी.एस. अनुज जी से मिला। उसके बाद तो मैं जब भी मिलता उनके चरण-स्पर्श करके अत्यन्त आनंद का अनुभव करता था।
मैं अंतिम बार महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में हरिभूमि परिवार द्वारा अपनी स्थापना के १५ वर्ष पूरे करने के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में श्री डी.एस. अनुज जी से मिला था। हमेशा की तरह गंभीर मुस्कराहट के साथ मैनें उनके दर्शन किए थे। अत्यन्त सादा जीवन जीने वाले श्री अनुज हमेशा कुशल-मंगल की पूछते और अपना आशीर्वाद देते थे।
श्री अनुज जी के आकस्मिक निधन के समाचार के बाद दिन रात उनसे जुड़ी हर बातें, उनका मार्गदर्शन, रचनात्मक लेखन की तकनीकें और अन्य बहुत सी सीखें रह-रहकर याद आ रहीं हैं। मैं एकदम बैचेन हूं। सहज यकीन नहीं हो रहा कि वे इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए हैं। ऐसा लगता है कि मानों हरिभूमि कार्यालय में अब भी वहीं श्री अनुज जी संपादकीय लिखने में व्यस्त हैं।
मैं समझता हूं कि श्री अनुज जी बहुप्रतिभा के धनी थे। उनका निधन पत्रकारिता जगत एवं नवलेखकों के लिए बहुत बड़ा आघात है। एक तरह से नए लेखक उनके जाने से अनाथ से हो गए हैं। मैं इस बार दीपावली नहीं मनाÅंगा और न ही किसी को दीपावली की शुभकामनाएं दूंगा। श्री अनुज जी की आत्मा को भगवान शांति दे और उनकी बिटिया को यह भारी चोट सहन करने की शक्ति प्रदान करे। श्री अनुज जी को शत् शत् हार्दिक नमन है और हमेशा रहेगा।
-राजेश कश्यप,
स्वतंत्र पत्रकार, लेखक एवं समीक्षक
टिटौली (रोहतक)
हरियाणा-१२४००५
मोबाईल . ९४१६६२९८८९
randeep
November 5, 2010 at 1:25 pm
हरियाणा के कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार डीएस अनुज से मेरा परिचय गोहाना से प्रकाशित प्रदेश स्तरीय साप्ताहिक’ राजनीती मंच ‘ के कार्यालय में 1994 हुआ उन्होंने , रचनात्मक लेखन की तकनीकें और अन्य बहुत सी सीखें मुझ जैसे नए पत्रकार को सिखाई श्री अनुज जी बहुप्रतिभा के धनी थे अनुज जी की आत्मा को भगवान शांति दे
रणदीप घनगस
प्रदेश अध्यक्ष
हरियाणा वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन
9416563863 (hry ) 09465217763 (chd )