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दुख-दर्द

बरेली में भी पत्रकार पर हमला, बंधक बनाया

यूपी में पत्रकारों और उनके परिजनों पर कहर जारी है. कुछ दिनों पहले बरेली में सेना के जवानों ने एक पत्रकार को पीट दिया. इस बारे में बरेली के स्थानीय अखबारों में खबरें भी प्रकाशित हुई. घटनाक्रम के मुताबिक बीते दिनों दैनिक जागरण, बरेली के पत्रकार प्रमोद यादव के साथ सेना पुलिस के जवान एसके चतुर्वेदी, सुरेंद्र पाल और सादे ड्रेस के सिपाही ने मारपीट की थी. इससे पत्रकार के सिर और कान में गंभीर चोट आई. इस घटना के दौरान मौजूद रहे उनके अधिकारी एलके दत्ता ने मामला सुलझाने के बजाए सिपाहियों का ही सहयोग किया. उक्त दोषियों के खिलाफ कैंट थाने में तहरीर दी गई लेकिन एफआईआर दर्ज न किए जाने से लोग आक्रोशित हो गए. दैनिक जागरण के पत्रकार पर सेना पुलिस के हमले के विरोध में लोगों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया. छात्र नेताओं ने सेना विरोधी नारे लगाते हुए बरेली कालेज में प्रदर्शन किया.

यूपी में पत्रकारों और उनके परिजनों पर कहर जारी है. कुछ दिनों पहले बरेली में सेना के जवानों ने एक पत्रकार को पीट दिया. इस बारे में बरेली के स्थानीय अखबारों में खबरें भी प्रकाशित हुई. घटनाक्रम के मुताबिक बीते दिनों दैनिक जागरण, बरेली के पत्रकार प्रमोद यादव के साथ सेना पुलिस के जवान एसके चतुर्वेदी, सुरेंद्र पाल और सादे ड्रेस के सिपाही ने मारपीट की थी. इससे पत्रकार के सिर और कान में गंभीर चोट आई. इस घटना के दौरान मौजूद रहे उनके अधिकारी एलके दत्ता ने मामला सुलझाने के बजाए सिपाहियों का ही सहयोग किया. उक्त दोषियों के खिलाफ कैंट थाने में तहरीर दी गई लेकिन एफआईआर दर्ज न किए जाने से लोग आक्रोशित हो गए. दैनिक जागरण के पत्रकार पर सेना पुलिस के हमले के विरोध में लोगों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया. छात्र नेताओं ने सेना विरोधी नारे लगाते हुए बरेली कालेज में प्रदर्शन किया.

बताया जाता है कि सेना पुलिस के जवान वाहन चेकिंग के नाम पर आए दिन वाहन चालकों से बदतमीजी करते रहते हैं. इसी क्रम में सेना के जवानों ने दैनिक जागरण, बरेली के पत्रकार प्रमोद यादव पर भी हमला बोल दिया था और बीच सड़क पर पीटा. बताते हैं कि दैनिक जागरण के पत्रकार प्रमोद यादव उधर से गुजर रहे थे. सेना पुलिस के जवानों ने उन्हें पकड़ लिया. बाइक की चाभी निकाल ली और अभद्रता करने लगे. प्रमोद ने इसकी शिकायत करने के लिए सेना के एक बड़े अधिकारी एके पाठक को फोन मिलाया पर बात न हो सकी. अपने बड़े अफसर को फोन मिलाते देख भड़के जवानों ने पत्रकार पर हमला बोल दिया और बंधक बनाकर अपने आफिस ले गए. पत्रकार को पीटे जाने व बंधक बनाने की सूचना पाकर अन्य पत्रकार सेना पुलिस के दफ्तर पहुंचे लेकिन जवानों ने गलती मानने की जगह अपने साथी को बचाने आए पत्रकारों पर भी लाठियां तान दी. बाद में पत्रकारों ने इस मसले को पुलिस के बड़े अधिकारियों के समक्ष उठाया और बड़े अफसरों के हस्तक्षेप पर रिपोर्ट दर्ज हुई.

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