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गरीबों से ज्यादा पैसा भगवान को

: द संडे इंडियन-सी वोटर सर्वे द्वारा राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण और जनमत संग्रह : धार्मिक कार्यों और देवी-देवताओं को खुश करने के लिए अमीर भारतीयों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के सालाना खर्च की तुलना में बहुत ज्यादा है. द संडे इंडियन और सी-वोटर द्वारा कराए गए एक एक्सक्लूसिव राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण और जनमत संग्रह से पता लगा कि अमीर भारतीय धर्म पर कुल मिलाकर साल भर में 50,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च करते हैं. सर्वे में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 40 करोड़ भारतीयों को अलग रखा गया.

: द संडे इंडियन-सी वोटर सर्वे द्वारा राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण और जनमत संग्रह : धार्मिक कार्यों और देवी-देवताओं को खुश करने के लिए अमीर भारतीयों द्वारा खर्च की जाने वाली राशि, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के सालाना खर्च की तुलना में बहुत ज्यादा है. द संडे इंडियन और सी-वोटर द्वारा कराए गए एक एक्सक्लूसिव राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण और जनमत संग्रह से पता लगा कि अमीर भारतीय धर्म पर कुल मिलाकर साल भर में 50,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च करते हैं. सर्वे में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 40 करोड़ भारतीयों को अलग रखा गया.

इसके बावजूद सर्वे से संकेत मिलता है कि भारतीय कुल मिलाकर 2,50,000 करोड़ रुपये धर्म पर खर्च करते हैं. यह रकम सालाना 55 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा बैठता है. द संडे इंडियन-सी वोटर के एक्सक्लूसिव सर्वे से यह भी पता लगता है कि भगवान शिव सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं, पूजा और आशीर्वाद के लिए जिन्हें करीब 20 फीसदी भारतीयों ने अपने प्रिय देवता के तौर पर चुना है. रोचक बात यह है कि इसके बाद क्रमश: देवी दुर्गा, हनुमान, श्रीकृष्ण, गणेश और भगवान राम हैं. पंसदीदा देवताओं के क्रम में जीसस क्राइस्ट 11वें स्थान पर हैं. शिरडी के साई बाबा को भी शीर्ष 10 में जगह मिली है. पसंदीदा देवताओं और धार्मिक क्रिया कलापों की रैंकिंग के लिए किए गए इस सर्वेक्षण और जनमत संग्रह में मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया.

95 फीसदी से ज्यादा भारतीय ईश्वर में आस्था रखते हैं और नियमित पूजा करते हैं. 32 फीसदी का कहना है कि अगर मौका मिलता है तो वे पूजा जरूर करते हैं. रोचक बात यह है कि पूजा करने वाले दो तिहाई भारतीय दावा करते हैं कि वे मानसिक शांति के लिए ऐसा करते हैं, जबकि 10 फीसदी से कम लोग भौतिक और दूसरे लाभ के लिए पूजा करते हैं. 80 फीसदी से अधिक भारतीयों का कहना है कि पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से एक ही देवता में उनकी आस्था बनी हुई है.

ज्यादातर भारतीय आज भी पारिवारिक मूल्यों का सम्मान करते हैं, यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि उनमें से 50 फीसदी अपने पिता, माता या शिक्षक को ईश्वर सरीखा मानते हैं. करीब 60 फीसदी का कहना है कि ज्योतिष या वास्तु में उन्हें पूरी तरह भरोसा नहीं है, लेकिन उसी समय 40 फीसदी दावा करते हैं कि उन्होंने या तो सपने में भगवान को देखा या उनकी उपस्थिति महसूस की. करीब 30 फीसदी चमत्कारों में विश्वास करते हैं, 22 फीसदी का कुछ हद तक ही चमत्कारों में यकीन है लेकिन 50 फीसदी लोगों को चमत्कारों में किसी तरह का विश्वास नहीं है. द संडे इंडियन-सी वोटर सर्वे में जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक पैमाने को ध्यान में रखते हुए 5312 ग्रामीण और शहरी भारतीयों की राय जानी गई. प्रेस विज्ञप्ति

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