बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी लोकतान्त्रिक ताकत सक्रिय हो गयी है. ऐसे में लोकतंत्र का चौथा खम्भा माने जाना वाला मीडिया कैसे ना तैयार हो. बिहार में भले ही मुट्ठी भर मीडिया घराने पेड न्यूज़ के विरुद्ध झंडा उठाये खड़े हों मगर मीडिया के एक बड़े और चर्चित घराने ने अपने रिपोर्टरों को चुनाव में वसूले जाने वाले रकम का टार्गेट तैयार कर लिया है. जी हाँ हम बात कर रहे हैं ‘सहारा समय बिहार/झारखण्ड’ की. कुछ दिन पहले पटना में चैनल के मैराथन बैठक में चैनल हेड प्रबुद्ध राज ने बिहार के सभी रिपोर्टरों को इस बात की सूचना दी. चैनल हेड प्रबुद्ध राज ने इस मैराथन बैठक में इस बात की भी जानकारी दी कि बिहार विधानसभा चुनाव कार्यकर्म का नेतृत्व राजेश सिंह करेंगे. राजेश सिंह वही शख्स है जो संजय मिश्र के चैनल हेड वाले समय में बिहार डेस्क के इनपुट हेड हुआ करते थे. खैर प्रबुद्ध राज ने बिहार के 243 विधानसभा सीटों की बारी-बारी से समीक्षा भी की. प्रबुद्ध राज ने अपने सभी स्ट्रिंगरों से प्रति विधानसभा सीट के अनुसार दो उम्मीदवारों का चयन करने के लिए कहा.
इस मुद्दे पर विस्तार से बताते हुए प्रबुद्ध राज ने अपने स्ट्रिंगरों को समझाया कि पहला उम्मीदवार निवर्तमान विधायक होगा यानि स्ट्रिंगरों को सिर्फ एक ही उम्मीदवार ढूँढना होगा. इसी मीटिंग में रिपोर्टरों को इस बात की भी जानकारी दी गयी कि प्रति उम्मीदवार उन्हें कितनी रकम वसूलनी है. तो यह तय हुआ कि हरेक उम्मीदवार के लिए तीन मिनट का ‘पैकेज’ तैयार किया जायेगा. यह तीन मिनट वाला ‘पैकेज’ पूरे दिन भर में 6 बार प्रसारित होगा इसके लिए प्रति उम्मीदवार 18 हजार लगेंगे. जितने दिनों का यह पैकेज होगा यह राशि उसी अनुपात में बढती जाएगी. यानि यदि आप और हम अंदाजा लगाएं कि यदि 243 सीटों पर सिर्फ एक उम्मीदवार ही पकड़ में आते हैं तो कुल 43,74,000 यानि पचास लाख के आस पास. चूँकि प्रत्येक स्ट्रिंगर को दो उम्मीदवार चाहिए यानि यह आकंडा करोड़ के आसपास बैठता है.
यानि प्रति नेता यदि एक दिन भी सहारा पर दिखा तो सहारा के राजस्व में करोड़ों की बढ़ोतरी होगी. जाहिर है, कौन ऐसा चैनल होगा जिसे करोड़ रुपए नहीं चाहिए. तो यह है बिहार में पत्रकारिता के बड़े-बड़े दावे करनेवाले चैनल कि सच्चाई. पता नहीं इस तरह कि सच्चाई कि जानकारी सहारा के कर्ताधर्ता को है या नहीं. मगर एक बात तो तय है कि शायद इसी तरह हरेक चैनल ने पेड न्यूज़ का लक्ष्य रखा होगा तभी बिहार जैसे बीमार प्रदेश में एन चुनाव के वक्त तीन-चार चैनल इस मैदान में उतर रहे है.ये सारी जानकारी सहारा समय बिहार-झारखण्ड में कार्यरत लगभग दर्जन भर स्ट्रिंगरों से बातचीत पर आधारित है. उनकी नौकरी पर खतरे के मद्देनजर मैंने उनका नाम यहां नहीं दिया जा रहा है. आप लोग इस बात की पुष्टि सहारा समय बिहार-झारखण्ड में कार्यरत किसी भी स्ट्रिंगर से कर सकते हैं या खबर की पुष्टि चैनल हेड प्रबुद्ध राज या फिर राजेश सिंह से भी की जा सकती है. हालाँकि राजेश सिंह व्यक्तिगत रूप से उस मीटिंग में उपस्थित नहीं थे.
पटना से आई एक पत्रकार की चिट्ठी पर आधारित











