डीयू से ग्रेजुएट होने के बाद वर्ष 1998 में मास काम की डिग्री लेने वाले एथलीट उमेश अगले दो वर्षों तक मीडिया फील्ड में भटकते रहे। इस पेशे के हर रंग को देखते-समझते रहे। अंत में उन्होंने मीडिया के किसी पार्ट में खुद को फिट करने की बजाय, मीडिया क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के सहारे कुछ नया करने का इरादा किया। वो इरादा, वो सपना आज सच हो चुका है, साकार हो गया है, एनएनआई (न्यूज नेटवर्क आफ इंडिया) के रूप में। एनएनआई की खबरें व तस्वीरें कई फार्मेट (प्रिंट, इलेक्ट्रानिक, आडियो, वीडियो, मोबाइल) में कई मीडिया कंपनियां सब्सक्राइब करती हैं।
एनएनआई मोबाइल ब्रेकिंग न्यूज सर्विस के भी अच्छे-खासे सब्सक्राइबर हैं। यह सर्विस निःशुल्क है। देहरादून से वर्ष 2000 में एनएऩआई की छोटी शुरुआत आज कई प्रदेशों में फैल चुकी है। एऩएनआई के चेयरमैन उमेश जे. कुमार ने भड़ास4मीडिया को बताया कि मोबाइल ब्रेकिंग न्यूज सर्विस के सब्सक्राइबरों का डाटाबेस काफी मेहनत से तैयार कराया गया है। इसके चलते खबरें सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों तक भी पहुंचती है। आगे की योजना के बारे में उन्होंने बताया कि वे फरवरी अंत तक एनएऩआई को नेशनल न्यूज एजेंसी बनाने जा रहे हैं। उमेश बताते हैं कि उनके पास पेशेवर पत्रकारों और तकनीक विशेषज्ञों की टीम है जो एऩएनआई को हर पल अपडेट करने में जुटी रहती है।
उन्होंने सफलता का श्रेय अपनी टीम को देते हुए वादा किया कि वे मार्च अंत तक मोबाइल पर एमएमएस न्यूज की भी शुरुआत कर देंगे। उन्होंने इसे यूं व्याख्यायित किया, ‘एनएनआई की अभी एसएमएस न्यूज की जो फ्री सेवा है उसमें खबरें टेक्स्ट रूप में होती हैं। मार्च अंत से एमएमस न्यूज सेवा शुरू होगी जिसमें खबरों के साथ एक लिंक भी होगा जिसे क्लिक कर उस खबर से संबंधित वीडियो या तस्वीर भी देख सकेंगे। अगर आप अखबार पढ़ने और टीवी न्यूज चैनल देखने के लिए समय नहीं निकाल पाते और चाहते हैं कि गली-मोहल्ले से लेकर देश-दुनिया की खबरों से अपडेट रहें तो आपको यह सेवा जरूर पसंद आएगी।’ उमेश के मुताबिक कोई भी मोबाइल यूजर एनएऩआई की खबरों को अपने मोबाइल पर निःशुल्क सब्सक्राइव कर सकता है। इसके लिए उसे एनएऩआई के पोर्टल http://www.nnilive.com पर जाना होगा। या फिर [email protected] पर मेल करके अनुरोध कर सकते हैं।











