Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

गलतियों का पुलिंदा राष्ट्रीय सहारा… हिंदुस्तान में परिवर्तन का खेल… ’गांडीव’ को फिर तगड़ा झटका…

कुछ बरस पहले तक ऐसी हेडलाइंस की उम्मीद नहीं कर सकते थे. मीडिया मूलतः फकीरों और संतों का माध्यम था. जिनका काम था पीर पराई का उल्लेख करना, सिस्टम को पटरी से न उतरने देना, बुरी चीजों पर काबू करने के लिए जनमत बनाना. लेकिन संतों-फकीरों के इस काम पर आज उसी सिस्टम का कब्जा है जो सिस्टम को बेकार करने में सिस्टम के भीतर दीमक की तरह घुसे हुए हैं. इन सबका काम पैसे बनाना है, किसी कीमत पर. और, राज करना है, उस मानव पर जिसकी मानवीयता की रक्षा के लिए ये प्रदेश-देश, संविधान, नौकरशाह, नेता, फौज-फाटा, पुलिस-सिपाही, कोर्ट-कचहरी बने हैं. पर जब संतों का माध्यम भ्रष्ट होता है तो उसी के बीच से निकलते हैं ऐसे लोग जो घर फूंक तमाशा देखने का काम बड़े आनंद से करते हैं. बनारस का एक वेब पोर्टल पूर्वांचलदीप डॉट कॉम ऐसा ही काम कर रहा है.

कुछ बरस पहले तक ऐसी हेडलाइंस की उम्मीद नहीं कर सकते थे. मीडिया मूलतः फकीरों और संतों का माध्यम था. जिनका काम था पीर पराई का उल्लेख करना, सिस्टम को पटरी से न उतरने देना, बुरी चीजों पर काबू करने के लिए जनमत बनाना. लेकिन संतों-फकीरों के इस काम पर आज उसी सिस्टम का कब्जा है जो सिस्टम को बेकार करने में सिस्टम के भीतर दीमक की तरह घुसे हुए हैं. इन सबका काम पैसे बनाना है, किसी कीमत पर. और, राज करना है, उस मानव पर जिसकी मानवीयता की रक्षा के लिए ये प्रदेश-देश, संविधान, नौकरशाह, नेता, फौज-फाटा, पुलिस-सिपाही, कोर्ट-कचहरी बने हैं. पर जब संतों का माध्यम भ्रष्ट होता है तो उसी के बीच से निकलते हैं ऐसे लोग जो घर फूंक तमाशा देखने का काम बड़े आनंद से करते हैं. बनारस का एक वेब पोर्टल पूर्वांचलदीप डॉट कॉम ऐसा ही काम कर रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार द्वय आशीष बागची और सुरेश बहादुर कई अन्य साथियों के साथ अपने अखबार व वेब पोर्टल के माध्यम से बनारस की मीडिया की खबर ले रहे हैं और उन खबरों पर रोशनी डाल रहे हैं जिस पर कारपोरेट मीडिया के लोग अंधेरे की परत चढ़ाकर बाहर आने से रोक रहे हैं. पूर्वांचलदीप डॉट कॉम की कुछ खबरें यहां पेश हैं. इनमें तो शुरुआती तीन खबरें सहारा के नए लांच एडिशन से संबंधित हैं. कुछ पीएफ मसले पर हुई छापेमारी से. और कुछ अन्य. इन खबरों को एक साथ यहां देने का मकसद पूर्वांचलदीप डॉट कॉम के काम रिकागनाइज तो करना ही है, साथ ही आशीष बागची और सुरेश बहादुर को सलाम करना भी है जो ओखली में सिर देने के बाद मूसलों के डर से निडर होकर अपना काम कर रहे हैं. इन वरिष्ठ पत्रकारों से आज की नई पीढ़ी को सबक लेना चाहिए कि आज के दौर में भी अच्छी पत्रकारिता करने का स्पेस है, बस करने के लिए जज्बा और विजन की जरूरत है.

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया


सिर मुड़ाते ही ओले पड़े

वाराणसी। डमी की रविवार को हुई लांचिंग के बाद राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी का पहला दिन इस कहावत को चरितार्थ कर गया-’’सिर मुड़ाते ही ओले पड़े।’’ पहले ही दिन अखबार का पहला और तीसरा पन्ना रात सवा तीन बजे छूटा। इससे अखबार साढ़े चार बजे के बाद मार्केट में पहुंचा। लेट होने की वजह से पूरा का पूरा अखबार ‘‘फ्री’’ में बांटना पड़ा। प्रसार विभाग के लोग भुनभुनाते हुए लोगों को अखबार ‘‘फ्री’’ में धरा रहे थे। कुछ गड़बड़ी मशीन में भी आयी। पर, जब सवा तीन बजे अखबार के दो-दो कलर पेज एक साथ छूटेंगे तो कहां छपाई मशीन इतनी जल्दी अखबार को छाप पाएगी और प्रसार की गाड़ियां मार्केट में इतनी जल्दी पहुंच पाएंगी?

कुल मिलकार अफरातफरी का माहौल था। पूरा का पूरा अखबारी प्रशासनिक तंत्र लोकल संपादक की कार्यशैली पर उंगली उठा रहा था। प्रसार विभाग ने कह दिया है कि अगर समय पर अखबार नहीं मिला तो वे कुछ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने संपादकीय विभाग की कार्यशैली की शिकायत नोएडा तक पहुंचा दी है। अखबार प्रशासन ने साफ कह दिया है कि इस हालत में अखबार के प्रसार की उनसे कोई अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। दूसरी एक और गड़बड़ी यह आयी कि लांचिंग की न्यूज बनाने वाले ने संपादक और न्यूज डायरेक्टर उपेंद्र राय के नाम के आगे मैनेजिंग एडिटर लिख दिया। जबकि मैनेजिंग एडिटर जयव्रत राय हैं। यह खबर सभी सेंटरों में भेजी गयी थी। काफी बाद में गलती पकड़ में आयी। उस खबरची की काफी लानत मलानत भी हुई।

गलतियों का पुलिंदा राष्ट्रीय सहारा

वाराणसी। सहारा वाराणसी का 14 नवंबर, 2010 का अंक अपनी तमाम गलतियों के साथ रविवार को नगर के बुद्धिजीवियों और आम लोगों में बांटा गया। झारे-झार भाषिक गलती इसमें देखने को मिली। पहला पेज देखें-‘बस ने ठेकेदार को रौंदा’ खबर के क्रासर में ‘राइफल बरामदगी’ चस्पा है। खबर कौन सी है और क्रासर कहां का लगा है, किसी को पता नहीं। जाने किसने समाचार चेक किया है!

इसी प्रकार पेज नंबर 4 व 5 में उपर की पट्टी में सेलिब्रिटी कलाकार की एक ही फोटो रिपीट की गयी है। अंदर के पेज पर ‘डीआरएम कार्यालय पर प्रदर्शन’ शीर्षक डबल कालम की खबर में प्रदर्शन होता दिखा दिया गया है जबकि प्रदर्शन 15 नवंबर यानी सोमवार को होना है। समाचारों को देखकर लगता है कि किसी तरह खबरें जबरी ठूंसी गयी हैं। लगता है कि डमी किसी ने देखा तक नहीं है। पूरा अखबार किसी ने कायदे से चेक भी नहीं किया है।

सहारा में गलतियां मत बताओ

वाराणसी। राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी में गड़बड़ियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंगलवार, १६ नवम्बर, २०१० के संस्करणों में तीन बड़ी गलतियां गयीं। गलती नंबर 1-सोनभद्र एडिशन में पहले पेज पर सोनभद्र के डाला में ट्रक पलटने से 8 बच्चों की मौत की खबर है। यह खबर लीड रूप में छपी है। जबकि जो फोटो लगी है वह बस पलटने की है। गलती नंबर 2-आजमगढ़ की डाक में डाक का पेज ही नहीं लगा है।

जनरल पेज लग कर अखबार आजमगढ़ चला गया है। सोचिए वहां अखबार का कैसा स्वागत किया गया होगा। गलती नंबर 3-वाराणसी सिटी पेज 4 पर बकरीद पर प्रदर्शनी की फोटो लगी है। ध्यान से देखें तो फोटो उल्टी लगी है। इन तीनों गड़बड़ियों को लेकर आज पूरे अखबार में चर्चा थी। मजे की बात यह है कि संपादकीय की मीटिंग में इन तीनों गलतियों की कहीं से चूं-चपड़ तक नहीं हुई। है न हैरानी की बात। इतनी बड़ी गलतियां हो जाएं तो और जगह संपादक पर बन आती है। पर यह सहारा है। यहां गलतियां दिखती रहें पर किसी को बताएं नहीं यही पालिसी लागू है।

हिंदुस्तान में परिवर्तन का खेल

वाराणसी। हिंदुस्तान वाराणसी के संपादक ने बीट परिवर्तन किया है। रतन सिंह खेल पेज पर वापस भेजे गए हैं। वे पहले भी योगेश कुमार गुप्त ‘‘पप्पू’’ के साथ लंबे समय तक खेल पेज देख चुके हैं। ‘‘जागरण’’, ‘‘अमर उजाला’’ व ‘‘हिंदुस्तान’’ में वे ’’पप्पू’’ के ही साथ काम कर चुके हैं। पप्पू भी माहिर खेल संपादक माने जाते हैं। रतन को अब ‘‘पप्पू’’ का साथ नहीं मिलेगा कारण कि ‘‘पप्पू’’ इस समय पीटीआई के वाराणसी के संवाददाता बन गए हैं। खासकर क्रिकेट की रिपोर्टिंग में रतन को महारत हासिल है। उन्हंे आंतरिक राजनीति का शिकार बनाकर अन्यान्य टेबुलों पर इतने दिनों तक टहलाया जाता रहा।

बाबू रतन सिंह अबतक सिटी डेस्क के इंचार्ज थे। दूसरा परिवर्तन यह हुआ है कि अबतक खेल पेज की रिपोर्टिंग कर रहे रविकर दुबे को सिटी डेस्क पर भेजा गया है। रविकर खेल के मझे हुए पत्रकार हैं। संदीप त्रिपाठी जो अबतक सिटी डेस्क इंचार्ज थे, अब डाक इंचार्ज का काम संभालेंगे। इसे पत्रकारीय परिभाषा में डिमोशन माना जाता है। डाक इंचार्ज के रूप में काम कर रहे पंकज विशेष सिटी डेस्क की कमान लेंगे। असद कमाल लारी अब चीफ सिटी रिपोर्टरी देखेंगे। हिंदुस्तान का प्रकाशन शुरू होने से पहले लारी ही हिंदुस्तान ब्यूरो के इंचार्ज हुआ करते थे। उस समय लारी की प्रशासनिक क्षेत्र में मजबूत पकड़ हुआ करती थी। देखना यह है कि इतने लंबे समय बाद रिपोर्टिंग फील्ड में वापस आकर अपनी ’’पुरनिया’’ भूमिका वे कितना दोहरा पाते हैं। ये परिवर्तन 18 नवंबर, 2010 से लागू माने जाएंगे। यानी 18 नवंबर को दिन में साढ़े दस बजे से जो मीटिंग होगी उसमें लारी अपनी बदली हुई भूमिका में दिखेंगे।

’गांडीव’ को फिर तगड़ा झटका, जयनारायण मामले की सुनवाई शुरू

वाराणसी। भविष्य निधि कार्यालय वाराणसी ने ‘गांडीव’ हिंदी दैनिक के कर्मचारियों की सुधि लेने के क्रम में पुराने कर्मचारी जयनारायण मिश्र के मामले की सुनवाई शुरू कर दी। श्री मिश्र 1981 से गांडीव में कार्यरत हैं। संस्थान के लिए खून पसीना बहाने के बावजूद प्रबंधन ने भविष्य निधि योजना का लाभ उन्हें 1993 से देना शुरू किया। ‘गांडीव’ के कर्मचारी अपनी लड़ाई के क्रम में इस मामले को भी भविष्य निधि आयुक्त के संज्ञान में ले आए। नतीजा रहा कि भविष्य निधि आयुक्त के निर्देश पर ’गांडीव’ प्रबंधन को जयनारायण मामले में नोटिस जारी कर आठ दिसंबर, 2010 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गयी।

सहायक भविष्य निधि आयुक्त एस एल दास की ओर से नोटिस में ‘गांडीव’ प्रबंधन से उन 17 कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी मांगी गयी है जिन्हें भविष्य निधि योजना का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा है। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी ने ’गांडीव’ के कर्मचारियों की लड़ाई में अगुवा की भूमिका निभाते हुए भविष्य निधि कार्यालय और श्रम कार्यालय में मजबूत पैरवी की है। ज्ञात हो कि विगत दिनों भी ‘गांडीव’ कार्यालय में भविष्य निधि का जबर्दस्त छापा पड़ा था और श्रम कार्यालय कर्मचारियों के बकाए के मामले में कार्रवाई जारी रखे हुए है।

बाबुओं को खिला रहे हैं छोला-समोसा, सात तालों में बंद पीएफ रिपोर्ट

वाराणसी। पिछले सप्ताह भविष्य निधि कार्यालय के प्रवर्तन स्क्वाड द्वारा विभिन्न अखबारों के दफ्तरों में की गयी छापेमारी की कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एस. के. झा ने सभी मीडिया हाउसों को जारी की गयी रिपोर्टों को सात ताले में बंद कर दिया है ताकि रिपोर्टों में बाबू लोग अपने ढंग से परिवर्तन न कर सकें। हो यह रहा था कि इन मीडिया हाउसों में पीएफ मामले देखने वाले लोग भविष्य निधि कार्यालय में मंगलवार को पहुंचे और इन कार्रवाईयों के बाद कैसे मामला सलटाया जाए, इस बारे में भविष्य निधि कार्यालय के बाबुओं से मंत्रणा करते दिखे। बाबुओं को चाय व छोला-समोसा कराकर मतलब साधने के चक्कर की खबर भविष्य निधि क्षेत्रीय आयुक्त को मिलने के बाद उन्होंने सभी रिपोर्टों को सात तालों में बंद रखने का फरमान जारी कर दिया। देखना यह है कि गुरुवार को कार्यालय का माहौल कैसा रहेगा?

ज्ञात हो कि भविष्य निधि कार्यालय के प्रवर्तन स्क्वाड द्वारा विभिन्न अखबारों के दफ्तरों में की गयी छापेमारी की कार्रवाई के बाद इन मीडिया हाउसों के संचालकों और प्रबंध तंत्र से जुड़े लोगों की सांस नीचे-उपर होने लगी है। ऐसे लोग पसीना पोंछते अपनी खीझ और झेंप मिटाते भविष्य निधि कार्यालय में मंगलवार को पहुंचे और इन कार्रवाईयों के बाद कैसे मामला सलटाया जाए, इस बारे में भविष्य निधि कार्यालय के बाबुओं से मंत्रणा में व्यस्त रहे। किंतु, कहीं बात बनती नजर नहीं आयी। कारण यह छापेमारी क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एस. के. झा के नेतृत्व और निर्देशन में की गयी थी।

फिर भी लोग हैं कि मानते नहीं और अपनी दाल गलाने की येन केन प्रकारेण जुगत लगाने में जुटे हैं। सफलता मिले न मिले मालिक का फरमान है तो कोई न कोई रास्ता निकालने की उम्मीद लिए कार्यालय के इर्द गिर्द, बाहर भीतर मंडराते रहे। किंतु, हालात यही बता रह हैं कि चूंकि पिछली कार्रवाई ऐतिहासिक हुई है, इसलिए इसमें लेनदेन के बल पर मामला रफादफा करने की युक्ति कारगर नहीं हो पाएगी। फिर भी साहबान लगे हैं बाबुओं की खिदमत में इस उम्मीद के साथ कि शायद कोई रास्ता निकल आए। भविष्य निधि कार्यालय में मंगलवार को सरगर्म माहौल रहा। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी ने क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एस.के. झा से भेंट की और उन्हें ऐतिहासिक छापेमारी के लिए हार्दिक बधाई दी और अपेक्षा की कि जिस तरह श्री झा ने कदम उठाए उसी तरह सरकारी महकमे के लोगों को भी कदम उठाकर श्रमिक हित में निर्णय लेने चाहिए।

छापा मारने वालों की आंखें भर आयीं

वाराणसी। यहां के एक पुराने अखबार ने कल गुलाम भारत की याद दिला दी। हुआ यूं कि प्राविडेंट फंड प्रवर्तन स्क्वाड ने शुक्रवार को यहां से प्रकाशित होने वाले एक पुराने अखबार में छापा मारा था। वहां उपर के एक कमरे में 19 कर्मचारियों को बंद कर रखा गया था। कमरे की बिजली भी काट दी गयी थी और बाहर से कुंडी लगायी जा रही थी। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि स्क्वाड को सूचना मिली कि एक कमरे में गुलाम भारत की छवि चाहें तो देख सकते हैं। स्क्वाड तुरंत उपर गया। वहां का नजारा देखकर स्क्वाड की आंखें भर आयीं। स्क्वाड के दो अधिकारियों जेपी राय और बीके माथुर उपर गए थे। कमरे में ताला लगाया ही जा रहा था कि उन्होंने कर्मचारी को रोक लिया। कमरे के अंदर देखा तो तीन लोग ऐसे मिले जो डेस्क पर काम करने वाले पत्रकार थे। समाज, पुलिस में फैली अराजकता आदि के खिलाफ अपनी बेबाक कलम चलाने वाले पत्रकार गुलामों की हालत में एक अंधेरे बंद कमरे में छुपे बैठे थे।

उनकी सांसों की आवाजें भी बाहर नहीं आ रही थीं। जरा कल्पना कीजिए उस दृश्य का। कलम के तीन सिपाही पेट की खातिर गुलामों जैसी हालत में एक अंधेरे बंद कमरे में छुपे बैठे मिले। ऐसा दृश्य अबतक सिर्फ फिल्मों में ही दिखाई पड़ता था। स्क्वाड के अधिकारियों के छापेमारी के इतिहास में यह विरल अनुभव था। उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसा भी दृश्य दिखाई पड़ेगा जब कलम के सिपाही एक अंधेरे बंद कमरे में गुलामों की हालत में बैठे मिलेंगे। पीएफ स्क्वाड ने इस अखबारी संस्थान से तीन रजिस्टर जब्त किए। श्री मुखर्जी ने बताया कि 97 लोगों का नाम नोट करके नोटिस दी गयी है।

उस अखबार को इस बाबत पांच पेज में तीन नोटिस जारी किए गए हैं। मजे की बात गुलामी की जकड़ से निकले 16 लोगों के बारे में एक कर्मचारी ने दावा किया कि ये सभी लोग उनके रिश्तेदार हैं। इन सभी का सहारा में कम्प्यूटर सेक्शन में एपाइंटमेंट हो चुका है। ये सभी लोग यहां कंप्यूटर सीखने आए थे। यहां यह भी बता दें जिस कर्मचारी ने गुलामी की हालत में मिले 16 लोगों को अपना रिश्तेदार बताया है वह बीस साल की नौकरी के बाद अभी दो चार दिन पहले ही परमानेन्ट हुआ है। एक और बात यह सुनने में आयी है कि इस अखबार के सिटी इंचार्ज को चार दिन पहले ही यह बता दिया गया था कि पीएफ वाले छापे में आएंगे। सिटी इंचार्ज ने अनेक लोगों से यह लिखवा लिया था कि हम सभी यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने आते हैं और प्रशिक्षु हैं। पर स्क्वाड ने इसे नहीं माना। उसका कहना था कि हमारे पास जो सूची है उसके आधार पर पीएफ कर्मचारियों का कटना चाहिए। इस छापे के बाबत मीडिया हाउसों में जोरदार चर्चाएं हैं।

इससे पूर्व प्राविडेंट फंड प्रवर्तन स्क्वाड ने शुक्रवार को दैनिक ‘‘आज’’ और ‘‘दैनिक जागरण’’ में छापा मारा। ‘‘जागरण’’ में स्क्वाड ने 175 कर्मचारियों की स्थलीय जांच की। 30-35 कर्मचारी ऐसे मिले जिनका पीएफ नहीं कट रहा था। प्रबंधन ने मौके पर ही 10 लोगों का पीएफ तुरंत काटने की बात कही। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी ने बताया कि जागरण प्रबंधन को इस बाबत पीएफ की नोटिस दी गयी है। प्रबंधन ने स्क्वाड से काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त पप्पू और दादा अजय मुखर्जी के बाबत भी जानकारी लेने की कोशिश की और संकेत में पूछा कि क्या इन दोनों के कहने पर ही छापा पड़ा है? अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली के निर्देश पर यह छापा या कह लीजिए स्थलीय जांच की जा रही है। इसमें किसी भी स्थानीय अधिकारी का हाथ नहीं है।

स्क्वाड ने शुक्रवार की शाम को दैनिक ‘‘आज’’ में भी छापा मारा। 15 कर्मचारी कम्प्यूटर और 3 कर्मचारी डाक में काम करते मिले। इनका पीएफ नहीं कट रहा था। समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी के अनुसार सिटी में काम कर रहे लोगों को आस-पास की गलियों आदि में छुपा दिया गया था। बाकी कर्मचारी पीएफ स्क्वाड को न दिखें इस नाते उन्हें भी इधर-उधर छटका दिया गया था। कुल मिलाकर ‘‘आज’’ अखबार में पूरी तरह अफरातफरी का माहौल था। अभी पता नहीं चला है कि कुल कितने लोग ऐसे मिले जिनका पीएफ नहीं कट रहा था। स्क्वाड ने नोटिस थमाने की व्यवस्था की है। स्क्वाड ने काफी कागजों की काफी गहन पड़ताल की और कुछ लेजर, फाइलें कब्जे में भी लीं।

ज्ञात हो कि स्क्वाड ने गुरुवार को ‘अमर उजाला’ में भी छापा मारा था। स्क्वाड के दो अधिकारियों जेपी राय और बीके माथुर ने यह जांच की थी। इसके पूर्व बनारस से प्रकाशित सांध्य दैनिक ‘‘गांडीव’’ और हिंदी दैनिक ‘‘हिंदुस्तान’’ के आफिसों पर भी छापा मारा गया. ‘‘अमर उजाला’’ के 122 कर्मचारियों की जांच की गयी। हालांकि जानकारों का कहना है कि अन्यान्य अखबारो के मुकाबले गड़बड़ी की शिकायत ‘‘अमर उजाला’’ में कम ही मिली। ज्ञात हो कि समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के सचिव दादा अजय मुखर्जी ने वाराणसी में स्थित कई बड़े मीडिया हाउसों में कार्यरत मीडियाकर्मियों की खराब हालत से संबंधित तथ्यवार शिकायत कई सरकारी महकमों में की थी.

श्री मुखर्जी ने बताया कि यह पहला मौका है जब पीएफ मामले में इतने संस्थान में इतने बड़े पैमाने पर छापा मारा गया है। अधिकारियों ने एक एक कर्मचारियों से उनकी सैलरी पूछी और यह भी पता किया कि वे नियमित हैं या नहीं और उनका पीएफ कटता है या नहीं. स्थलीय सत्यापन के इस काम में दोनों अधिकारियों ने काफी कागजों की काफी गहन पड़ताल की और कुछ लेजर, फाइलें कब्जे में भी लीं। दादा अजय मुखर्जी ने हर अखबार में कार्यरत कर्मचारियों की लिस्ट अधिकारियों को सौंपी उसमें यह उल्लेख किया गया था कि किन किन को कितनी सेलरी मिलती है और किनका किनका पीएफ नहीं कटता है. सूत्रों का कहना है कि पीएफ अफसरों का रवैया बेहद सख्त है। इस छापेमारी से बनारस के दूसरे अखबार भी दहशत में हैं.

डीएवीपी की गांडीव को नोटिस

वाराणसी। बैक डेट के विज्ञापन छापने पर डीएवीपी ने सांध्य दैनिक गांडीव को नोटिस जारी की है। डीएवीपी के सहायक मीडिया एक्जीक्यूटिव एस के मोहंती ने इस नोटिस के साथ ही दो माह का अखबार भी तलब किया है। इसकी शिकायत यूपी उपजा के प्रदेश अध्यक्ष राधारमण चित्रांशी ने की थी। श्री चित्रांशी का कहना था कि बैक डेट के विज्ञापन छापकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। उन्होंने इस निमित्त प्रमाण भी प्रस्तुत किया था। इसे संज्ञान में लेते हुए डीएवीपी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

डाक से शिफ्ट होंगे चार लोग

वाराणसी। अमर उजाला, वाराणसी से एक खबर यह आ रही है कि यहां डाक में काम करने वालों में से चार लोगों को अन्यत्र शिफ्ट किया जाएगा। इस बाबत बीते सोमवार की मीटिंग में साफ शब्दों में संदेश दे दिया गया। एक किसी ‘‘तिवारी-दुबे’’ नारे के सामने आने के बाद से ही इस अखबार के अंदर का माहौल गरम है। जितने मुंह उतनी बातें कही जा रही हैं। यही नहीं मीडिया हाउसों में भी अनेक मनोरंजक कहानियां इस बाबत सुनी जा रही हैं।

काम्पैक्ट और अमर उजाला डाक का यह मिक्स वेजीटेबुल नित नयी लोकरंजक कथाओं का ताना-बाना बुन रहा है। इस कहानी के एक पात्र का इसके पहले भी एक मामले में नगर निकाला हो चुका है। इस अखबार में तिलक और तलवार को अलग-अलग थामने की एडिटिंग संपादकीय प्रबंधन चलाने वालों के पास है। कभी तिलक की पीठ थपथपायी जाती है तो कभी तलवार की ताकि बैलेंस बना रहे और नौकरी चलती रहे साथ ही नोएडा तक कोई खबर भी न पहुंचे। इस पूरे मामले से स्कीम के भरोसे चल रहे इस अखबार की मार्केट में साख पर असर पड़ा है।

हिंदुस्तानःअंदर मजा बाहर मजेदार

वाराणसी। वाराणसी हिंदुस्तान इन दिनों फिर से चर्चाओं में है, कारण बीट बदलने की चर्चाएं हैं। प्रशासन की बीट लेने के लिए एक सीनियर कापी राइटर ने सिटी इंचार्ज को घर से लाने-ले जाने का ठेका भी ले लिया है। पेशबंदी क्राइम बीट के लिए भी है। पहले फेल हो चुके एक सज्जन पुनः क्राइम बीट पाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। वे पहले सहारा जाने के लिए भी हाथ-पांव मार चुके हैं। कुल मिलाकर हिंदुस्तान में सरगर्मी जोरों पर है। प्रशासन की बीट लेने के लिए दोस्त एक बार फिर टकराने की ओर अग्रसर हैं। अगर इंचार्ज को घर से लाने ले जाने वाले को प्रशासन मिल गया तो तय मानिए यह बात साबित होगी-‘‘दोस्त दोस्त न रहा।’’

हिंदुस्तान के अंदर जो मजा है उसके बारे में लोग मजेदार टिप्पणियां कर रहे हैं। दूसरी ओर हिंदुस्तान टाइम्स वाराणसी में इंचार्ज की कथित बदमिजाजी के चलते सुना जा रहा है कि संजय गुप्त-फोटोग्राफर, स्टाफ रिपोर्टर रश्मि गुप्ता और स्ट्रिंगर अमित गुप्त ने इस्तीफा दे दिया है। रश्मि के बारे में कहा गया है कि उसका विवाह तय हो गया है। संजय गुप्त के बारे में कहा गया है कि उसने टाइम्स आफ इंडिया ज्वाइन कर लिया है। अब हिंदुस्तान टाइम्स में अनुराग सिंह, भरत श्रीवास्तव और आकांक्षा ही सिर्फ काम करने के लिए रह गए हैं। भरत श्रीवास्तव को सोनभद्र ट्रांसफर किया गया था पर लोगों के छोड़ देने के बाद उन्हें वाराणसी लाकर ज्वाइन कराया गया है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर इंचार्ज की नादिरशाही जारी रही तो शायद एक दिन वे अकेले ही काम करते नजर आएं। कुल मिलाकर हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स ही चर्चाओं में है।

(सभी खबरें : साभार – पूर्वांचलदीप डॉट कॉम)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. kumarkalpit

    November 18, 2010 at 6:55 am

    yashwant ji sahara me galtiyan koi nayi baat ni h kyunki yah ek aur akhbaar ni rashtriya andolan h. Lucknow me 1992 me apne prakashan k samay kuch is aashay ka hi bada bada holding is akhbaar ne lagaya tha jab lucknow aur delhi k sanskaran me bhayanak galtiyan hoti h to phr Varanasi k nav jaat sanskaran par baat hi karna bekaar h jab har jagah k pathak is akhbaar ko jhel rhe h to Varanasi walo ki bi niyati h ise jhelna…….

  2. dhanish sharma

    November 18, 2010 at 7:26 am

    chalta hai bhai.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...