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अलबम ‘कबीराना सूफियाना’ का लोकार्पण

मुम्बई के रवींद्र नाट्य मंदिर में सूफी शायरी और सूफी संगीत की स्वर लहरियों में डूबी हुई थी। भक्त कवि नारायण अग्रवाल के सूफी अलबम कबीराना सूफियाना का लोकार्पण लीजेंडरी संगीतकार ख़य्याम ने किया। उन्होंने कहा कि इस अलबम में शांति, सुकून और गहराई है। दास नारायण के नाम से मशहूर कवि नारायण अग्रवाल की रचनाओं को पं. भीमसेन जोशी जैसे लीजेंड अपना स्वर दे चुके हैं। जाने-माने गायक पं. बालामुरलीकृष्णन ने उनकी रचना पर एक नए राग का सृजन किया जिसका नाम है- मोहन गांधी राग।

मुम्बई के रवींद्र नाट्य मंदिर में सूफी शायरी और सूफी संगीत की स्वर लहरियों में डूबी हुई थी। भक्त कवि नारायण अग्रवाल के सूफी अलबम कबीराना सूफियाना का लोकार्पण लीजेंडरी संगीतकार ख़य्याम ने किया। उन्होंने कहा कि इस अलबम में शांति, सुकून और गहराई है। दास नारायण के नाम से मशहूर कवि नारायण अग्रवाल की रचनाओं को पं. भीमसेन जोशी जैसे लीजेंड अपना स्वर दे चुके हैं। जाने-माने गायक पं. बालामुरलीकृष्णन ने उनकी रचना पर एक नए राग का सृजन किया जिसका नाम है- मोहन गांधी राग।

कवि नारायण अग्रवाल को अपने शासन काल में देश के चार राष्ट्रपति और चार प्रधानमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। भारत सरकार की ओर से उन्हें भजन रत्न की उपाधि भी मिल चुकी है। समीक्षकों की राय में कवि नारायण अग्रवाल के कलाम में हमेशा काव्य की ऊँचाई होती है। इस अलबम में उनका लिखा गीत- पगले बंदा बन फिर ख़ुदा मिलेंगे..काफी लोकप्रिय हो रहा है।

कबीराना सूफियाना अलबम की गायिका और कम्पोज़र हैं कविता सेठ ने। युवा संगीतकार-गायक विवेक प्रकाश ने इसका संगीत संयोजन किया है। लोकार्पण के बाद मशहूर सूफी सिंगर कविता सेठ ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से ऐसा समां बाँधा कि सभागार में मौजूद श्रोता समुदाय मंत्रमुग्ध हो गया। कविता सेठ ऐसी समर्थ गायिका हैं जिन्होंने गीत, ग़ज़ल और फॉक के साथ ही प्लेबैक सिंगिग में भी अपना जलवा दिखाया है। फ़िल्मों में उनके गाए मुझे मत रोको (गैंगस्टर), इकतारा (वेक अप सिड, मोरे पिया, राजनीति) आदि गीत बहुत पसंद किए गए। प्लेबैक सिंगिग के लिए कविता सेठ को एक ही साल 2010 में फ़िल्मफेयर, स्टार स्क्रीन, आईफा और जीमा जैसे चार प्रतिष्ठित अवार्ड प्राप्त हुए जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

कबीरा

कार्यक्रम की शुरुआत में सूफी सिंगर कविता सेठ, कवि नारायण अग्रवाल और कवि-उदघोषक देवमणि पाण्डेय ने सूफीवाद पर चर्चा की। कवि नारायण अग्रवाल ने सूफी संगीत को वसुधैव कुटुम्बकम का अग्रदूत बताया। सूफी सिंगर कविता सेठ ने कहा कि मैं तो शायद एक अतृप्त आत्मा हूँ जो ख़ुदा की तलाश में भटक रही है। सूफीवाद पर इज़हारे-ख़याल करते हुए कवि-उदघोषक देवमणि पाण्डेय ने कहा कि  अपने सूफियाना कलामों के ज़रिए सूफी शायरों और सूफी संतों ने लोगों को मुहब्बत का ऐसा ख़ूबसूरत पैग़ाम दिया कि उन्हें अपनी रूह के आईने में सारी दुनिया का अक्स नज़र आने लगा। इस तरह दिल से दिल के तार जुड़ते चले गए। इस्लाम के सूफीमत और हिंदुस्तान की संतवाणी का तसव्वुर एक ही है। दोनों मज़हब में नहीं बंटे। यूनीवर्सल बने रहे। दोनों ने अपना रिश्ता अल्लाह से और ईश्वर से जोड़ा। सभी को एक जैसा मानने वाले इन सूफियों और संतों ने सभी इंसानों के लिए प्यार का पैग़ाम दिया।

इस अवसर पर ईएमआई (म्यूज़िक इंडिया) के जीएम टी.सुरेश, एक्सेल इंफोज लि.के एमडी लखमेंद्र खुराना और टाइम्स म्यूज़िक के पूर्व सीईओ अरुण अरोड़ा विशेष अतिथि के रूप में मौजूद थे।

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