Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

आवाजाही

कादंबिनी को गुडबॉय कहा हरेप्रकाश उपाध्याय ने

[caption id="attachment_18614" align="alignleft" width="66"]हरे प्रकाश उपाध्यायहरे प्रकाश उपाध्याय[/caption]: जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में फीचर संपादक बने : मशहूर युवा कवि और पत्रकार हरे प्रकाश उपाध्याय ने कादंबिनी, दिल्ली से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत लखनऊ से शीघ्र प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स के साथ की है. उन्हें फीचर एडिटर का पद दिया गया है. उनके जिम्मे संपादकीय पेज समेत सभी फीचर व विशेष पेज हैं. हरे प्रकाश दिल्ली को छोड़कर लखनऊ शहर पहुंच चुके हैं और कामकाज संभाल लिया है.

हरे प्रकाश उपाध्याय

हरे प्रकाश उपाध्याय

: जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ में फीचर संपादक बने : मशहूर युवा कवि और पत्रकार हरे प्रकाश उपाध्याय ने कादंबिनी, दिल्ली से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत लखनऊ से शीघ्र प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स के साथ की है. उन्हें फीचर एडिटर का पद दिया गया है. उनके जिम्मे संपादकीय पेज समेत सभी फीचर व विशेष पेज हैं. हरे प्रकाश दिल्ली को छोड़कर लखनऊ शहर पहुंच चुके हैं और कामकाज संभाल लिया है.

हरे प्रकाश नई पीढ़ी के जाने-माने कवि है. उनके पहले काव्य-संग्रह का नाम है ‘खिलाड़ी दोस्त तथा अन्य कविताएं’. इसे भारतीय ज्ञानपीठ ने प्रकाशित किया है. आजकल वे कहानियां – उपन्यास भी लिखने लगे हैं. उनका एक उपन्यास जल्द प्रकाशित होने वाला है. भोजपुर (बिहार) के रहने वाले हरे प्रकाश को ‘अंकुर मिश्र स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है. हिन्दी की नयी पीढ़ी के संवेदनशील और सजग कवि हरे प्रकाश की दो कविताएं पेश हैं…

बुराई के पक्ष में

कृपया बुरा न मानें
इसे बुरे समय का प्रभाव तो क़तई नहीं
दरअसल यह शाश्वत हक़ीक़त है
कि काम नहीं आई
बुरे वक्त में अच्छाइयाँ
धरे रह गये नीति-वचन उपदेश
सारी अच्छी चीज़ें पड़ गयीं ओछी
ईमानदारी की बात यह कि बुरी चीज़ें
बुरे लोग, बुरी बातें और बुरे दोस्तों ने बचाईं जान अक़सर
उँगली थामकर उठाया साहस दिया
अच्छी चीज़ों और अच्छे लोगों और अच्छे रास्तों ने बुरे समय में
अक़सर साथ छोड़ दिया

बचपन से ही
काम आती रही बुराइयाँ
बुरी माँओं ने पिलाया हमें अपना दूध
थोड़ा-बहुत अपने बच्चों से चुराकर
बुरे मर्दों ने खरीदी हमारे लिए अच्छी कमीज़ें
मेले-हाटों के लिए दिया जेब-ख़र्च

गली के हरामज़ादे कहे गए वे छोकरे
जिन्होंने बात-बात पर गाली-गलौज़
और मारपीट से ही किया हमारा स्वागत
उन्होंने भगाया हमारे भीतर का लिज़लिज़ापन
और किया बाहर से दृढ़
हमें नपुंसक होने से बचाया
बददिमाग़ और बुरे माने गये साथियों ने
सिखाया लड़ना और अड़ना
बुरे लोगों ने पढ़ाया
ज़िन्दगी का व्यावहारिक पाठ
जो हर चक्रव्यूह में आया काम हमारे
हमारी परेशानियों ने
किया संगठित हमें

सच ने नहीं, झूठ ने दिया संबल
जब थक गए पाँव
झूठ बोलकर हमने माँगी मदद जो मिली
झूठे कहलाए बाद में
झूठ ने किया पहले काम आसान

आत्महत्या से बचाया हमें उन छोरियों के प्रेम ने
जो बुरी मानी गईं अक़सर
हमारे समाज ने बदचलन कहा जिन्हें

बुरी स्त्रियों और सबसे सतही मुंबईया फ़िल्मों ने
सिखाया करना प्रेम
बुरे गुरुओं ने सिखाया
लिखना सच्चे प्रेम-पत्र
दो कौड़ी के लेमनचूस के लालच में पड़ जाने वाले लौंडों ने
पहुँचाया उन प्रेम-पत्रों को
सही मुक़ाम तक

जब परेशानी, अभाव, भागमभाग
और बदबूदार पसीने ने घेरा हमें
छोड़ दिया गोरी चमड़ी वाली उन ख़ुशबूदार प्रेमिकाओं ने साथ
बुरी औरतों ने थामा ऐसे वक़्त में हाथ
हमें अराजक और कुंठित होने से बचाया
हमारी कामनाओं को किया तृप्त
बुरी शराब ने साथ दिया बुरे दिनों में
उबारा हमें घोर अवसाद से
स्वाभिमान और हिम्मत की शमा जलायी
हमारे भीतर के अँधेरों में
दो कौड़ी की बीड़ियों को फूँकते हुए
चढ़े हम पहाड़ जैसे जीवन की ऊँचाई
गंदे नालों और नदियों का पानी काम आया वक़्त पर
बोतलों में बंद महँगे मिनरल वाटर नहीं

भूख से तड़पते लोगों के काम आए
बुरे भोजन
कूड़े पर सड़ते फल और सब्जियाँ
सबसे सस्ते गाजर और टमाटर

हमारे एकाकीपन को दूर किया
बैठे-ठाले लोगों ने
गपोड़ियों ने बचाया संवाद और हास्य
निरंतर आत्मकेंद्रित और नीरस होती दुनिया में

और जल्दी ही भुला देने के इस दौर में
मुझे मेरी बुराइयों को लेकर ही
शिद्दत से याद करते हैं उस क़स्बे के लोग
जहां से भागकर आया हूँ दिल्ली!

 

घड़ी

दुनिया की सभी घड़ियाँ
एक-सा समय नहीं देतीं
हमारे देश में अभी कुछ बजता है
तो इंग्लैंड में कुछ
फ्रांस में कुछ
अमेरिका में कुछ….

यहाँ तक कि
एक देश के भीतर भी सभी
घड़ियों में एक-सा समय नहीं बजता
समलन हुक्मरान की कलाई पर कुछ बजता है
मज़दूर की कलाई पर कुछ
अफ़सरान की कलाई पर कुछ

मन्दिर की घड़ी में जो बजता है
ठीक-ठीक वही चर्च की घड़ी में नहीं बजता है
मस्जिद की घड़ी को मौलवी
अपने हिसाब से चलाता है
और सबसे अलग समय देती है
संसद की घड़ी

कुछ लोग अपनी घड़ी
अपनी जेब में रखते हैं
और अपना समय
अपने हिसाब से देखते हैं
पूछने पर अपनी मर्ज़ी से
कभी ग़लत
कभी सही बताते हैं।

मोहनदास करमचन्द गाँधी
अपनी घड़ी अपनी कमर में कसकर
उनके लिए लड़ते थे
जिनके पास घड़ी नहीं थी
और जब मारे गये वे
उनकी घड़ी बिगाड़ दी
उनके चेलों-चपाटों ने
कहना कठिन है अब उनकी घड़ी कहाँ है
और कौन-कौन पुर्ज़े ठीक हैं उसके

हमारी घड़ी
अकसर बिगड़ी रहती है
हमारा समय गड़बड़ चलता है
हमारे धनवान पड़ोसी के घर में
जो घड़ी है
उसे हमारी-आपकी क्या पड़ी है!

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. dhanish sharama

    November 23, 2010 at 8:00 am

    kya..nahi..

  2. ajay prakash

    November 23, 2010 at 8:14 am

    badhai ho hareprakash………..

  3. shyam nandan

    November 23, 2010 at 11:19 am

    badhai ho. ap nit nayi uchaiya chuen. apke aane se jansandesh time aur sabal hoga.

  4. Raju Ranjan Prasad

    November 23, 2010 at 11:39 am

    गहरी अनुभूति और संवेदना की भाषा में प्रतिकार की कविताएँ . बधाई .

  5. dhanish

    November 23, 2010 at 12:40 pm

    best of luck..

  6. dhanish

    November 23, 2010 at 12:40 pm

    kavita mast thi sir.main bhi ek kavi hu..

  7. Dr M. S. Parihar

    November 23, 2010 at 1:08 pm

    जनसंदेश टाइम्‍स देश के प्रखर संपादक डा. सुभाष राय के नेत़त्‍व में हिंदी पत्रकारिता को युगांतरकारी आयाम देगा। उन्‍होंने हरे प्रकाश जैसे साहित्यिक व्‍यक्तित्‍व को इस अखबार में महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी सौंप कर अपनी सुयोग्‍यता और दूरदर्शिता का परिचय दे दिया है।

  8. Pramod Tambat

    November 23, 2010 at 1:50 pm

    एक नई यात्रा प्रारम्भ करने के लिए हरेप्रकाश जी को अनेक शुभकामनाएँ।

    प्रमोद ताम्बट
    भोपाल
    व्यंग्य http://vyangya.blog.co.in/
    व्यंग्यलोक http://www.vyangyalok.blogspot.com/
    फेसबुक http://www.facebook.com/profile.php?id=1102162444

  9. raj

    November 23, 2010 at 2:05 pm

    गुडबॉय कह दिया यानी अच्छा लड़का…. गुड बाय कह देता तो बैड बॉय यानी बुरा लड़का हो जाता.. है न यशवंत

  10. ABHAI

    November 23, 2010 at 3:41 pm

    mera nizi anubhav hai ki hare prakash apni kavita ke sandarbha me acche admi hain.

  11. surendra nath sinha

    November 23, 2010 at 5:30 pm

    ITNA ACHHA KAVI,ITNI BURI SOHABAT ME JAMTA NA THA.laat dhari to achha keenha.khus rahen hareprakas neele .dikhawen kuch dam.

  12. अविनाश वाचस्‍पति

    November 24, 2010 at 6:28 am

    एक बेहतर टीम बन रही है। शुभकामनाएं।

  13. अमृत उपाध्याय

    December 23, 2010 at 7:17 am

    ढेर सारी शुभकामनाएं…..उम्मीद है रचनाशीलता के नए आयाम गढ़े जाएंगे और हमें इसका गवाह बनने का मौका मिलेगा….

  14. Artiman Tripathi

    June 27, 2012 at 3:06 am

    अच्छी रचना. भविष्य की हार्दिक सदेच्छाएं/ शुभकामनाएं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...