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पराड़करजी को इन पापियों से बचाओ

वाराणसी। लंबे अरसे बाद काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त पप्पू की तंद्रा टूटी और उन्हें यह लगा कि हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह बाबू राव विष्णु पराड़कर की मूर्ति के सामने लोग खोलकर खड़े हो जाते हैं या फिर उकड़ू बैठ जाते हैं और फिर आराम से “नंबर वन” निबटाकर अपने गंतव्य को रवाना हो जाते हैं। चूंकि, यह इलाका भोर से लेकर देर रात तक चालू रहता है, इसलिए ये क्रियाएं भी अनवरत रुप से चालू रहती हैं। तंद्रा टूटने के बाद पत्रकार संघ के अध्यक्ष गंभीर हुए और उन्होंने गांधीवादी तरीके से लोगों को सुधर जाने का मौका दिया। इस निमित्त शनिवार को वहां एक इश्तहार चिपकाया गया।

वाराणसी। लंबे अरसे बाद काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त पप्पू की तंद्रा टूटी और उन्हें यह लगा कि हिंदी पत्रकारिता के भीष्म पितामह बाबू राव विष्णु पराड़कर की मूर्ति के सामने लोग खोलकर खड़े हो जाते हैं या फिर उकड़ू बैठ जाते हैं और फिर आराम से “नंबर वन” निबटाकर अपने गंतव्य को रवाना हो जाते हैं। चूंकि, यह इलाका भोर से लेकर देर रात तक चालू रहता है, इसलिए ये क्रियाएं भी अनवरत रुप से चालू रहती हैं। तंद्रा टूटने के बाद पत्रकार संघ के अध्यक्ष गंभीर हुए और उन्होंने गांधीवादी तरीके से लोगों को सुधर जाने का मौका दिया। इस निमित्त शनिवार को वहां एक इश्तहार चिपकाया गया।

इश्तहार में पराड़कर जी की महत्ता को समझाते हुए भद्रजनों से अनुरोध किया गया कि शंका समाधान के मामले में पराड़कर जी को बख्शे रहें। इश्तहार इस प्रकार है-’’भद्रजन, सादर अभिवादन के साथ आपसे विनम्र निवेदन है कि हिंदी पत्रकारिता के शलाका पुरुष बाबू राव विष्णु पराड़कर के स्मारक स्थल पर गंदगी व मूत्र विसर्जन न करें-निवेदक काशी पत्रकार संघ।’’ यह इश्तहार पार्क के चारों ओर के पिलर में चिपकाया गया है। देर से ही सही अध्यक्ष जी के इस निर्णय का अच्छा असर रहा और कम से कम शनिवार को तो अध्यक्ष जी के वहां घंटे-दो घंटे हाथ जोड़कर खड़े रहने और गला फाड़-फाड़कर हटो-बढ़ो-भागो-मारो कहते रहने से जो लोग खोलते हुए आ रहे थे वहां से डोली हो लिए और अपना शंका समाधान कहीं और जाकर किया। साभार : पूर्वांचलदीप डॉट कॉम

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0 Comments

  1. prabha shanker mishra

    November 29, 2010 at 2:05 am

    Few number of journalists are born and not made.This was as much true of Babu Rao Bishnu Paradkar, is still a torchbearer for journalists.I give special thanks to Yogesh ji for his this work.

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