सिरसा के एक सज्जन हैं आरके बिश्नोई जी. इन्होंने अपनी मेल आईडी से एक ग्रुप मेल प्रेषित किया है, करीब सौ-सवा सौ लोगों के पास. इसमें उन्होंने क्या लिखा है, खुद पढ़ लीजिए. लगता है आरके बिश्नोई साहब बड़े गुस्से में हैं. तभी तो उनकी नजर में जो गलती विजय चोपड़ा साहब ने की है, उससे बड़ी गलती वे खुद कर गए हैं, और मेल में अपनी बात कहते कहते ऐसी बात लिख दी है कि पढ़ने वालों के हाथ से तोंते उड़ जाएंगे. लीजिए पढ़िए–
सेवा में,
विजय चोपड़ा जी,
संपादक, पंजाब केसरी,
जालंधर
विषय – ” बापू आसाराम के आश्रम पर चला बुलडोज़र”
महोदय, इस शीर्षक से प्रकाशित खबर (पंजाब केसरी दिनांक २७ नव २०१०) के अंतिम पैरा में जो कुछ छापा गया है उससे तो यही प्रमाणित होता है कि आपके भाई व पिता के कत्ल का कारण ऐसी कोई कीचड़ फेंक खबर ही रही होगी.
एक पाठक
आरके बिश्नोई
सिरसा
हरियाणा
मोबाइल 09255566012
मेल [email protected]












sagar
November 30, 2010 at 5:23 am
yashwant ji, plz wo paira bhadas par de jise pad kar r.k.bishnoi itne naraj hain.
– sagar
rajeshwar singh
November 30, 2010 at 8:11 am
यशवंत जी इस मेल को पढकर हमारे हाथों के तोते तो नहीं उड़े लेकिन, अगर विजय जी ने संज्ञान ले लिया तो पाठक बंधू के तोते जरुर उड़ जायेंगे.
एक शेर है-
न जाने क्या लिख गया था इताब (क्रोध में) में,
कासिद की लाश आई है खत के जवाब में.
john
November 30, 2010 at 10:03 am
अरे भई, इतना कुछ लिखा पर यह भी लिख्र देते कि उस अंतिम पैरा में आखिर लिखा क्या है तो मामला समझने में आसानी होती। खुद बिश्नोई जी उस बात को अपनी चिट्ठी में लिखने में असमर्थ थे तो भी यशवंत जी आप तो दे ही सकते थे। खैर जो भी हो बिश्नोई जी मेरी सलाह है कि यदि कोई बात कहनी है तो साफ-साफ कहें और तथ्यों पर पर्दा डाले बगैर कहें। अन्यथा शांति से इस दुनिया का तमाशा देखें उसमें खलल पैदा करने की जहमत न उठाएं। रही बात आसाराम बापू की तो वे पूरी दुनिया के लिए एक संत हैं यदि उन्होंने कोई कानून तोड़ा है तो इसकी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन यदि उन्होंने किसी कानून को नहीं तोड़ा और कोई अपराध नहीं किया है तो मेरा विश्वास है कि एक दिन उन पर लगे सभी आरोप खारिज कर दिए जाएंगे।
चलते-चलते एक बात और यदि मेरी बात खराब या बुरी लगी हो तो माफ कीजिए मेरा इरादा किसी को ठेस पहुंचाना कतई नहीं है मैं सिर्फ अपनी बात रखना चाहता हूं। और हां मैंने पंजाब केसरी का ईपेपर देखने की कोशिश की परंतु उसमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली।
शेष शुभ
सभी के लिए शुभकामनाएं
जॉन