वाराणसी में गांडीव का कार्यालय रणभूमि में परिवर्तित हो गया है. कम्प्यूटर डिपार्टमेंट के हेड शिवमूर्ति दुबे को निकाले जाने का फरमान सुनाने के बाद हुए घमासान ने अब नया मोड़ ले लिया है. पत्रकार नेताओं के दबाव के बाद लेबर कार्यालय से तीन सदस्यीय प्रवर्तन दल गांडीव कार्यालय पहुंचा तथा कागजात की जांच-पड़ताल की. तनाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की तरफ से गांडीव कार्यालय में दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई है.
गौरतलब है कि गांडीव कार्यालय में पिछले दस-बारह सालों से कम्प्यूटर डिपार्टमेंट के हेड के तौर पर कार्यरत शिवमूर्ति दुबे को निकाले जाने का फरमान प्रबंधन ने सुनाया था. दुबे ने जब अपने निकाले जाने के कारणों के बारे में जानना चाहा तथा कार्यालय से जाने से इनकार कर दिया, तब उनके साथ मारपीट की गई. पुलिस बुलाकर भी शिवमूर्ति को पिटवाया गया. इसकी सूचना मिलने के बाद समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री एडवोकेट अजय मुखर्जी दादा, काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष विकास पाठक, काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश गुप्ता पप्पू भी कई पत्रकारों के साथ गांडीव कार्यालय पहुंच गए थे. इसके बाद गांडीव के कर्मचारी इन लोगों के नेतृत्व में लेबर कार्यालय पहुंचे तथा अपनी समस्या से अवगत कराया.
आज फिर उपजा के प्रदेश अध्यक्ष डा. राधारमण चित्रांशी, अजय मुखर्जी दादा, विकास पाठक एवं योगेश गुप्ता पप्पू प्रशासनिक अधिकारियों से मिले तथा जांच कराने की मांग की. जिस पर जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच कराने का आश्वासन दिया है. इसके पहले आज तीन सदस्यीय प्रवर्तन दल गांडीव कार्यालय पहुंचा तथा कैशबुक, रजिस्टर, सेलरी बुक आदि की जांच-पड़ताल की. सूत्रों का कहना है कि जांच के बाद दल ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. कल की घटना के बाद गांडीव कार्यालय में तनाव की स्थिति है. प्रबंधन एवं कर्मचारियों के बीच कोई अराजक स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए प्रशासन ने गांडीव कार्यालय में दो सिपाहियों को तैनात कर दिया है. अखबार से जुड़ा मामला होने के चलते पुलिस अधिकारी भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.











