इसीलिए कहा जाता है कि मीडिया फील्ड इन दिनों का सबसे खतरनाक और असुरक्षित क्षेत्र है. खतरनाक इसलिए कि आप यहां पत्रकारिता करने के नाम पर आते हैं और करने लगते हैं अपनी कंपनी के लिए दलाली, बिजनेस और पेड न्यूज. असुरक्षित इसलिए कि कब आपकी नौकरी को कौन और कैसे ले ले, कोई ठिकाना नहीं. इंदौर में देखिए. एक न्यूज एडिटर ने अपने संपादक के जाने के बाद अपने अधीन तीन पत्रकारों की नौकरी एसएमएस भेज कर ले ली. जैसे तलाक, तलाक, तलाक कहा जाता है और हो जाता है तलाक, उसी तरह टर्मिनेट, टर्मिनेट, टर्मिनेट लिखा और कर दिया टर्मिनेट.
पीपुल्स समाचार, इंदौर से खबर है कि संपादक पद से विकास मिश्रा के इस्तीफे के बाद वहां के न्यूज एडिटर ने एसएमएस के जरिए तीन पत्रकारों को टर्मिनेट करने का फरमान जारी कर दिया. न्यूज एडिटर का नाम है पीयूष भट्ट. सूत्रों के मुताबिक घटना दो दिन पहले रात की है. पीपुल्स समाचार, इंदौर के न्यूज एडिटर पीयूष भट्ट ने कारपोरेट डेस्क इंचार्ज पंकज भारती, खेल डेस्क इंचार्ज पराग नातू और आईएमइंदौर सप्लीमेंट की रिपोर्टर पूजा तिवारी को एक एसएमएस भेजा जिसमें इन लोगों की सेवाएं समाप्त किए जाने की बात लिखी गई थी. एसएमएस मिलते ही पूजा तिवारी ने तो इस्तीफा दे दिया लेकिन पंकज भारती और पराग नातू ने अभी त्यागपत्र नहीं दिया है. सूत्रों का कहना है कि पीपुल्स समाचार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. ग्रुप एडिटर अवधेश बजाज के निरंकुश शासन और अराजक व्यवहार के कारण ढेर सारे लोगों में आक्रोश है. जल्द ही कई जगहों पर ये आक्रोश मूर्त रूप ले सकते हैं.












piyush bhatt
December 3, 2010 at 11:11 am
this was the order of my editor mr. praveen khariwal.
I am never involed in this matter at all.so please correct thr fact’s.
mukesh
December 3, 2010 at 11:26 am
Sharm Karo Piyush Bhatt, kahin aisa na ho ki ek sms tumhare liye bhi kahin se aa jaye.
shubhchintak....
December 3, 2010 at 12:35 pm
पीपुल्स समाचार जल्द ही राज-एक्सप्रेस-2 बनने की कगार पर है। जो हाल अवधेश बजाज ने और उनके गुरगों ने राज एक्सप्रेस का किया वहीं हाल अब पीपुल्स का होने वाला है। लगता है मैनेजमेंट अभी अवधेश बजाज की हरकतों से वाकीफ नहीं है और अगर है तो शायद मैनेजमेंट भी अखबार के नाम पर बिजनेस करना चाहता है। ऐसे लोग मीडिया, पत्रकारिता को क्यों बदनाम करने पर तुले हुए हैं? क्यों किसी को आगे नहीं बढ़ते देना चाहते? मेहनत करने पर अवॉर्ड की जगह टरमीनेशन दिया जाता है। ऐसे गाली गलौच देने वाले व्यक्ति को मैनेजमेंट सर आंखों पर लेकर के क्यों घूम रहा हैं? वहां काम करने वाले बहुत से पत्रकार गालिया सुन के भी चुप है। वे कुछ क्यों नहीं बोलते? ऐसे लोग समाज के लिए पत्रकारिता करने का दावा करते हैं लेकिन खुद इनकी हैसियत किसी बंधुआ मजदूर से अलग नहीं है। ऐसी पत्रकारिता करने से बेहतर है सड़क किनारे ठेला लगा कर अंडे बेचें। पीपुल्स समाचार सिर्फ पत्रकारों के भविष्य के साथ खेल रहा है। मैनेजमेंट को कब समझ आएगा की उनके अखबार से कई लोगों की रोटी-रोजी चल रही है। ग्रुप एडिटर द्धारा बेइज्जत करके पत्रकारों को निकालना ये कहा का इंसाफ हुआ? वो दिन दूर नहीं जब अवधेश बजाज पीपुल्स समाचार को रोड पर ले आएंगे। इसकी समझ मैनेजमेंट को बाद में पता चलेगी। अवधेश बजाज को दुकानदारी जमाने के लिए बधाई।
shubhchintak....
December 3, 2010 at 12:56 pm
वाह भई पीयुष……. पहले तय कर लो कि यह संपादक महोदय (दुकानदार) प्रवीण खारीवाल ने आदेश जारी किया था या ग्रुप एडिटर अवधेश बजाज (दुकानदारों का नेता) ने। तुभ भी तो राज एक्सप्रेस के ही सदस्य रहे हो। अवधेश बजाज ने अपनी गाज तुम पर इसलिए नहीं गिराई क्योंकि तुम भी उसी के आदमी हो।
pranjal
December 3, 2010 at 1:34 pm
piyushji kabhi aisa nahi kar sakte.jarur koi majburi rahi hogi. piyushji ko jannne wale unnhe patrakaro ke hitaishee ki tarah jante hai.
sanjay sinha
December 4, 2010 at 7:26 am
sabit ho gaya ki patrakar hi patrakar ka dusman hota hai