: कवींद्र सचान सहारा छोड़ लाइव इंडिया पहुंचे : सहारा समय न्यूज चैनल से आ रही अपुष्ट सूचनाओं के मुताबिक करीब छह से दस पत्रकारों को मीडिया क्षेत्र से हटाकर पैरा-बैंकिंग क्षेत्र में काम करने को कह दिया गया है. इस तबादले के बाबत लिखित आदेश जारी किया गया है. इस तुगलकी फरमान से हर पत्रकार हैरान-परेशान हैं. माना जा रहा है कि इन्हें निकाले जाने की तैयारी है लेकिन हो-हल्ला से बचने के लिए इन्हें पैराबैंकिंग क्षेत्र में काम करने के लिए भेज दिया गया है. जाहिर है, अगर ये लोग पत्रकार हैं तो पैराबैंकिंग फील्ड में काम कैसे कर सकेंगे. नतीजन, एक के बाद एक करके सभी इस्तीफा दे देंगे. प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन लोगों का तबादला किया गया है, वे लोग मीडिया में कुछ खास नहीं कर पा रहे थे, इसीलिए बजाय उन्हें निकालने के, उनका तबादला दूसरे क्षेत्र में किया गया है ताकि वे खुद को साबित कर सकें.
सूत्रों के मुताबिक सहारा समय के एचआर डिपार्टमेंट ने इन पत्रकारों को तबादला आदेश थमा दिया है. संभव है कुछ लोग फरियाद-अनुरोध कर अपने तबादले को रुकवा लें लेकिन माना जा रहा है कि कार्यक्षमता आंकलन के बाद इन लोगों की सहारा समय से विदाई की रणनीति के तहत यह कदम उठाया गया है. जिन-जिन का तबादला हुआ है, उनके नाम उनमें से कुछ लोगों के अनुरोध के कारण यहां प्रकाशित नहीं किए जा रहे हैं.
सहारा समय से ही एक अन्य सूचना के मुताबिक यूपी-उत्तराखंड न्यूज चैनल के एंकर कवींद्र सचान ने संस्थान को आखिरी सहारा प्रणाम बोल दिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत लाइव इंडिया के साथ की है. सचान यूपी-उत्तरांचल के आउटपुट हेड भी रहे लेकिन राजेश कौशिक के आने के बाद उनका तबादला सहारा-समय (बिहार-झारखंड) में कर दिया गया.












sahil
December 6, 2010 at 10:57 am
ye to hona hi tha…………filhaal nai joining ki badhai ho
kumar singh
December 6, 2010 at 11:54 am
मान्यवर,ये तो होना ही था..क्योंकि अब उपेंद्र जी की टीम सहारा को स्टार बनाने को चली है। इसलिए वह सहारा के पुराने लोगों को माफ करें…लात मार रही है। जहां तक कविंद्र की बात है,तो निश्चित तौर पर कविद्र एक अच्छे आउटपुट हेड भले ही ना हो…लेकिन वह एक अच्छे एंकर अवश्य है…आपको ज्ञात हो की राजेश कौशिक जी सहारा में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे है…उसके बारे में आपके यहां पहले भी काफी कुछ छप चुका है…लेकिन यह निश्चित हैं की राजेश जी को यह नहीं सोचना चाहिए की..सहारा उनकी आखिरी पारी है..क्योंकि जिस दिन उन्हें सहारा से विदा किया जाएगा…निश्चित तौर पर दूसरे संस्थान में उनकी…भाषा की चर्चा तो हो ही रही है…तो वह किसी तरह खुद को दूसरी जगह स्थापित करेगें…यह उन्हें सोचना चाहिए। क्योंकि आप स्वयम् जानते होगें की राजेश कौशिक जी की भाषा शैली की चर्चा आज हर जगह हो रही है…हमारे यहां भी…इससे यह लगता हैं..कि या तो वह अंदर से डरे हुए है…या फिर…उनकी अनुभवहिनता कई न कई उन्हें यह सब करने के लिए प्रेरित कर रही है..
जहां तक सहारा के पत्रकारों की बात है तो…उपेंद्र जी निश्चित तौर पर हर जगह अपनी टीम के लोगों को बैठाना चाह रहे है…और यह सब तभी हो सकता है…जब कुछ पुराने लगो को बहार का रास्ता दिखाया जाएं….। जिसकी नतीजा आपके सामने है…वैसे भी यूपी चैनल से…पांच लोगों के सहारा के समय चैनल की प्रोग्रामिग टीम में भेज दिया गया है…और अभी कई लोग ऐसे हैं…जो बहुत जल्द सहारा को आखिर सहारा प्रणाम कहने वाले है…इससे यह साफ जाहिर हो जाता हैं कि…सहारा को अब अच्छे लोगों अर्थात पत्रकारों की जरूरत नहीं है..बल्कि उन्हें रैकेट बाज…और दलालों की जरूरत है…।
यशवंत जी…आप भड़ास के माध्यम से पत्रकारों को अच्छा मंच दे,रहे है..लेकिन कई बार मुझे लगता है…आप भी पत्रकारों को सही अर्थों में मंच नहीं दे पाते…क्योंक सहारा के मेरे कई मित्र ऐसा बताते हैं कि वहां तो आपके भी कई जानकारी हैड है…जिनके लगने वाले आरोपों को आप अपने यहां जगह नहीं देते….मान्यवर सहारा में लोगों की नौकरियां जा रही है…उन्हें प्रताडित किया जा रहा है…मैं उम्मीद करूगा आप ऐसे मौके पर तो कम से कम इनके साथ खडे होगें….और कुछ तो इन्हें…आप सहारा देगें……जय हो…जय भड़ास….।
कुमार सिंह
shalin piyush
December 6, 2010 at 2:34 pm
sahara ki ehi to aadat hai kisi ko bhi naukrti se nikal dena ab bhi kaam karne wale samajh lo sahara chhodne me hi bhalai hai
बिल्लू
December 7, 2010 at 7:56 am
पत्रकारों को पैरा बैकिंग में भेज दिया….क्योंकि दोनों कार्य की शुरुआत प शब्द से होती है। अच्छा है इन्हें सहारा श्री (पदम श्री का डुपलिकेट) के पैर दबाने के लिए ट्रांसफर नहीं किया गया। सहारा में कहीं भी सहारा दिया जा सकता है या सहारा लिया जा सकता है। जय हो ट्रांसफर करने वाले की। लगता है अपना दिमाग पूरी तरह चरण वंदन की वजह से रहा ही नहीं।
sujata arora
December 7, 2010 at 8:49 am
kavindra sachan sahara samay up ke aadhar stambh the par tanashahi ke chalte unhe sahara samay chhodna pada mujhe lagta hae ki sahara ab barbaad ho jayega, ladkiyon k liye bhi ye surakchit nahi bacha kyonki yaha ab narbhakchhi aa gae hai.