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देख तेरे अखबारों की हालत क्या हो गई भगवान…

: कितना बदल गया संपादक नामक इंसान : [email protected] मेल आईडी से ”मुंबई में एक सब्जीवाला बना अखबार का प्रकाशक, कर्मचारियों का वेतन रोका” शीर्षक से किसी सज्जन एक मेल भड़ास4मीडिया के पास रवाना किया है. पढ़ने के बाद यही लगता है कि दो अखबारों में आपस में ठनी पड़ी है. ऐसी लट्ठमलट्ठ हिंदी ब्लागरों में तो देखने को मिलती है, पर अखबार भी ऐसे लड़ते होंगे, यह शायद कइयों को नहीं पता होगा. मेलर सज्जन ने अपनी लंबी-चौड़ी भड़ास जो निकाली है, उसकी शुरुआती लाइनें पढिए-

: कितना बदल गया संपादक नामक इंसान : [email protected] मेल आईडी से ”मुंबई में एक सब्जीवाला बना अखबार का प्रकाशक, कर्मचारियों का वेतन रोका” शीर्षक से किसी सज्जन एक मेल भड़ास4मीडिया के पास रवाना किया है. पढ़ने के बाद यही लगता है कि दो अखबारों में आपस में ठनी पड़ी है. ऐसी लट्ठमलट्ठ हिंदी ब्लागरों में तो देखने को मिलती है, पर अखबार भी ऐसे लड़ते होंगे, यह शायद कइयों को नहीं पता होगा. मेलर सज्जन ने अपनी लंबी-चौड़ी भड़ास जो निकाली है, उसकी शुरुआती लाइनें पढिए-

”मुंबई से सटे कल्याण-डोम्बिवली मनपा चुनाव में टीवी9 चैनल पर राज ठाकरे की पार्टी से चुनाव जीताने की सुपारी उठाने का आरोप लगाने वाला शहर का एक नया नवेला अखबार मुंबई हिंदमाता टाइम्स इन दिनों खुद बिल्डरों से हफ्ता उगाही में जुटा है। इसका खुलासा शहर के एक स्थानीय दैनिक खाकी वर्दी नामक अखबार ने किया है। अखबार ने अपने हाल ही के एक अंक में दावा किया है कि इस अखबार का सम्बन्ध मुंबई में इनकाउंटर किंग कहे जाने वाले प्रदीप शर्मा से है। प्रदीप शर्मा फिलहाल जेल की हवा खा रहे हैं। अखबार का दावा है कि गौरीशंकर दुबे नामक व्यक्ति अखबार को फायनेंस कर रहा है, जिनके दफ्तर का पता अखबार के प्रिंट लाइन में प्रकाशित किया जा रहा है। अखबार अपने फायनेंसरों के सहयोग से शहर के कुछ बिल्डरों के खिलाफ अभियान चला रहा है। जैसा अभियान कुछ चैनल चला रहे है। मुंबई हिंदमाता टाइम्स की ऐसे ही एक खबर पर अपनी रिपोर्ट में खाकीवर्दी ने लिखा है कि पहले अपने कर्मचारियों का वेतन तो दे बाद में दूसरो को न्याय दिलाना।”

ये तो रही बात उस मेल की जो भड़ास4मीडिया के पास प्रकाशन के उद्देश्य से प्रेषित है लेकिन कहानी सिर्फ इतनी भर नहीं है. थोड़ी छानबीन और तहकीकात से जो बात समझ में आती है वो ये कि ‘खाकी वर्दी’ और ‘हिंदमाता टाइम्स’ नामक दो अखबार हैं और दोनों एक दूसरे की पोलखोल अभियान में जुटे हुए हैं. एक दूसरे के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल ये अपने अखबारों में कर रहे हैं, उसे पढ़कर पत्रकारिता के शिशु भी शर्मा जाएंगे. हिंदमाता टाइम्स के खिलाफ कोई रईस खान हेडिंग बनाकर प्रकाशित करते हैं-  ”चिरकुट पहले अपने कर्मचारियों का वेतन दे, बाद में भाब्रेकर नगर को न्याय दिलाना”. इस तरह की हेडिंग से गुस्से और झगड़े के आवेग को समझा जा सकता है. लीजिए, अखबारों में प्रकाशित इन दो खबरों को पढ़िए और आनंद लीजिए……

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0 Comments

  1. Siddharth Kalhans

    December 23, 2010 at 9:17 am

    Hahahahahahaha. Bhai maja aa gaya. Aise ek item roj lagna chahiye.

  2. ravindra dube

    December 23, 2010 at 9:59 am

    यशवंत जी , मै खुद इस मुंबई हिंदमाता टाइम्स में उप सम्पादक के पद पर कार्यरत था । यह अखबार मुंबई में ९ सितम्बर से अपना प्रकाशन कर रहा है। अपने साढ़ेतीन माह के कार्यकाल में यह करीब दर्जन भर कर्मचारियों को हटा चुका है। इसका सिर्फ एकमात्र कारण कर्मचारियों का वेतन है। जिस दिन किसी कर्मचारी ने वेतन की मांग की , उसके दुसरे ही दिन अपने ख़ास शिपहसालार संजय तिवारी ( जिसके ऊपर मुंबई पुलिस में कई आपराधिक मामले दर्ज है। )के माध्यम से काम करने से रोक देता है। हमारे साथ-साथ मुंबई हिंदमाता टाइम्स ने कार्यकारी सम्पादक विजय यादव , समाचार सम्पादक गुरुदत्त पांडे , उप सम्पादक मनोज पाल व बिजनेस रिपोर्टर योगेस नारायण मिश्रा का करीब तीन माह से वेतन नहीं दिया है। अभी हाल ही में इसके फायनेंसर प्रदीप सिंह व प्रेम मिश्रा ( पेशे से बिल्डर ) कर्मचारियों का वेतन दिलाने के लिए सामने आये थे । इन लोगो ने अपने बांद्राकार्यालय के साथ-साथ दहिसर स्थित अखबार के कार्यालय में कई दिनों तक परेड काराई लेकिन जवाब में वेतन की जगह सिर्फ धमकिया मिली । धमकिया भी यह अखबार मालिक ऐसे लोगो के नाम से देता है , जिनका नाम तो हम नहीं बताना चाहते थे , लेकिन मजबूरन सच्चाई बतानी पड़ रही है। इनमे एक नाम इन काउंटर स्पेशलिस्ट रहे प्रदीप शर्मा का भी है । प्रदीप शर्मा से इनका क्या संबध है यह तो मै बता नहीं सकता .हां अखबार मालिक दफ्तर में हमेशा प्रदीप शर्मा के नाम से धौंस देते रहता है।
    यशवंत जी हम यहाँ यह जानकारी सिर्फ इसलिए दे रहे है किहम लोगो की तरह कोई और पत्रकार इनके शोषण का शिकार नहीं बने। शहर का कोई भी आपरेटर अथवा पत्रकार वहा सोच समझ कर काम करने जाय। –
    – रविन्द्र दुबे

  3. राजकुमार साहू, जांजगीर छत्तीसगढ़

    December 23, 2010 at 10:54 am

    पत्रकारिता में हर जगह यही हालात हैं। ऐसे में सूचना प्रसारण मंत्रालय को सख्ती बरतने की जरूरत है, क्योंकि आज घर बैठे ही लोग इंटरनेट से आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर अखबार शुरू कर देते हैं, जबकि उनके पास न तो कोई अनुभव होता है और न ही कोई योग्यता। साथ ही अखबार प्रकाशन के लिए कोई हैसियत नहीं होती। ऐसे लोग बेरोजगारों को अपने झांसे पर रखकर काम पर रख लेते हैं और बाद में वेतन देने में आना-कानी करते हैं। इन जैसों की अखबारी दुकानदारी जुगाड़ पर ही टिकी होती है।

  4. jain rajkumar

    December 23, 2010 at 3:47 pm

    आज घर बैठे ही लोग इंटरनेट से आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर अखबार शुरू कर देते हैं, जबकि उनके पास न तो कोई अनुभव होता है और न ही कोई योग्यता। साथ ही अखबार प्रकाशन के लिए कोई हैसियत नहीं होती। ऐसे लोग बेरोजगारों को अपने झांसे पर रखकर काम पर रख लेते हैं और बाद में वेतन देने में आना-कानी करते हैं। इन जैसों की अखबारी दुकानदारी जुगाड़ पर ही टिकी होती है। DAINIK SADAY TIKAMGARH M.P.

  5. Sanjay Bhati Editor SUPREME NEWS

    December 23, 2010 at 4:02 pm

    lagata hai mumbi k in dono akhbar walo me se kisi ka DM nam k prani se jugad nahi hai . nahi to uska bhi rol hota.

  6. danish azmi

    December 23, 2010 at 7:05 pm

    yaswant ji – yee naye navele akhbaar shuru mein khoob dawe aur wade kerte hai aur baad mein 2-3 maah mein saraa wasooli kaa maal khatam wasooli chaluu………
    aur rhi vetan maan ki baat too, mumbai hind mata times kaa cheetar sampadak see kyaa salry ki ummed ki jayee jiss kaa karoobaar hi chetrai hoo..mumbai ki media mein cheetar sampadak aur cheetar channel waloon ki bher maar hai kaam kraoo aur paisa maat doo ,magar ab sabhi stringer aur reportroon ko in chetar logoo ko sabak seekhane kaa samay aa gyaa hai ,kyoo ki top see lekar bottam tak dalle hai dalle

  7. Yogesh Mishra

    December 24, 2010 at 7:56 am

    सर जी , मुंबई हिंदमाता टाइम्स अपने साढ़े तीन महीने के प्रकाशन में इस कदर गंधा गया है कि, उसे अब अच्छे पत्रकार और कंप्यूटर आपरेटर नहीं मिल रहे है। वहा अब वही काम कर रहा है , जिसे कही और काम नहीं मिल सकता । चर्चा तो अब यहाँ तक है की अखबार मालिक कर्मचारियों का वेतन देने की असमर्थता के चलते चरसियो , भंगेदियोऔर गर्दुल्लो को उनकी खुराक देकर अखबार चला रहा है। अखबार में एक अपराधिक प्रवृत्ति का हप्ताखोर तथाकथित पत्रकार है जो फिलहाल विजय यादव के जाने के बाद अपने आपको कार्यकारी सम्पादक बताता है। उसकी लम्बाई करीब साढ़े ५ फिट , सर पर नकली बाल , दिखने में पक्का सड़कछाप चरसी , खुराक ३० पुडिया रोजाना भांग३ शीशी देशी ठर्रा ( जी एम देशी ) और ५० पुडिया गुटका । लहजा मिली तो मारी नहीं तो …………..री !

  8. anamisharanbabal

    December 27, 2010 at 4:07 pm

    khasker hndi patrakarita ka kya satar rah gaya h isko jagjahir karne se apni hi sakh kkhatam ( yadi patrakar ke rooo me bach rahi hogi to) ho jayegi. yar western up ka hal dekha hua h sabji wala jhadu lagane wala pan dukan wala ( pan bechne wale ka ek permanent shop hota h lihaja wo sabse bada dawedar ke alawa editor ka jasus hota h pan bechne wala rojana 30-40 paper sell kar deta h lihaja uski shikayat par to log dat kha jate h w. up me khasker djagran bhagwati jagran ek barabar h reporter ek report me yadi 45 name de rakha ho to subeditor ki kya himmat ki wo ek nam kat de dusre din sampadak se lekar city reporter uski muchh ukhad lenge sabka manna h ki 45 name publish hone par 45 log to paper kharidenge har shahar ka yehi hal h dam dam diga times se lekar jo b nam ho sab ke back me aise h log h amar ujala se lekar bhagwati ? jagran tak patrakaro ko nauker bana diya h ye logyadi bas chale to add ke nam par to kisi dead body se bhi ugahi karane se na chuke darasal ye log malik kam khoon pine wale zonk se h jo chamokan ki tarah body ka kabada bana defir b aise h logo ka jalwa h kyoki ek journalist h journalist ka sabse bada dusman hota h malik ke samne nanga dance karne ko ready apne jati biradari ke sath hi dusmano ki tarah behave karta h dandagiri karne wale lathibaz hi hindi ke sampadak ban rahe h yehi hindi patrakarita ka sharamnak hal h
    kursi pate hi wo patrakar se dur ho jata h mrinal pandey se lekar pramod joshi tak kya majal ki koie inse mil le a kursi nahi h to web me likh rahe h ya dur se dekh kar pukar kar bula rahe h hi re jamana hindi patrakarita ko sharamnak banane me aise hi log h jo kalam se dunia badalane ki kosis karna dharam mante h magar kya majal ki wo khud badal jaye bahut bura hal h yashwant bhaie b4m se we log sawdhan to ho gaye h lagta h ki koie unki khabar lene ke waste un oar najar rakh raha h

  9. gajendra singh

    February 7, 2011 at 1:40 pm

    bhayya aapas me lado mat……hum news banate hai….kabi news nahi ban na chahiye….aapse me kuch problem hai to clear karlijiye…online me…a saare baat …..ache nahi….apni hi patrakaronki burayi hoga…..
    -GAJENDRA SINGH.

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