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हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के : विश्वनाथ सचदेव

[caption id="attachment_19015" align="alignleft" width="264"]अपनी पुस्तकों का परिचय देते हुए नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी।अपनी पुस्तकों का परिचय देते हुए नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी।[/caption]मुम्बई की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था मरुधरा और सौम्य प्रकाशन द्वारा मुम्बई के प्रेसक्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा ने किया। इन किताबों के नाम हैं- बिजनेस जर्नलिज्म, जनसंपर्क, फील्ड रिपोर्टिंग गाइड, स्पेशल रिपोर्ट और फिल्मी स्कूप।

अपनी पुस्तकों का परिचय देते हुए नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी।

अपनी पुस्तकों का परिचय देते हुए नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी।

मुम्बई की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था मरुधरा और सौम्य प्रकाशन द्वारा मुम्बई के प्रेसक्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में पत्रकारिता पर आधारित पाँच किताबों का लोकार्पण आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा ने किया। इन किताबों के नाम हैं- बिजनेस जर्नलिज्म, जनसंपर्क, फील्ड रिपोर्टिंग गाइड, स्पेशल रिपोर्ट और फिल्मी स्कूप।

इन किताबों पर अपनी राय का इ्ज़हार करते हु उन्होंने कहा, ‘पत्रकारिता किताबें पढ़कर नहीं सीखी जा सकती। लेकिन मीडिया पर इस तरह की सारगर्भित और व्यावहारिक किताबें नये तथा युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन कर सकती हैं। ये उन्हें ऐसे मानकों के अक्स दिखा सकती हैं, जिनसे पत्रकारिता जनता की नज़रों में पवित्र और विश्वसनीय बनती है।

प्रेसक्लब का सभागार युवा पत्रकारों से इस क़दर खचाखच भरा था कि कई वरिष्ठ पत्रकारों को बैठने के लिए सीटें कम पड़ गईं। मुकेश शर्मा ने युवा पीढ़ी की तारीफ़ करते हुए कहा, ‘आज के युवा पत्रकार स्मार्ट हैं। उनके पास सूचनाओं के तमाम साधन मौजूद हैं। सूचनाएं प्राप्त करने में उन्हें कोई बाधा नहीं है। बस, जरूरत इस बात की है कि उन्हें इन सूचनाओं का अच्छी तरह से, जनोपयोगी रूप से इस्तेमाल करना आना चाहिए। मीडिया के सामने चाहे जो भी संकट आये, युवा पत्रकारों की अगर तैयारी अच्छी है, तो वे उससे पार पा सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन कवि-गीतकार देवमणि पांडेय ने किया। उन्होंने शुरुआत में इन किताबों के लेखकों का परिचय कराया और एक शेर के ज़रिए इनके लेखन कौशल की तारीफ़ की-

कुछ भी लिखना सरल नहीं है पूछो हम फ़नकारों से

हम सब लोहा काट रहे हैं का़गज़ की तलवरों से !

(बाएं से दाएं) मरुधरा  के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल, सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस. जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम , जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे, वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव, आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा, मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया, नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी, कवि-गीतकार देवमणि पांडेय

(बाएं से दाएं) मरुधरा के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल, सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस. जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम , जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे, वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव, आकाशवाणी के सेंट्रल सेल्स डायरेक्टर तथा वरिष्ठ ब्रॉडकास्ट मीडियाकार मुकेश शर्मा, मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया, नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी, कवि-गीतकार देवमणि पांडेय

श्रोता समुदाय में अगली पंक्ति में (बाएं से दाएं)-अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख हरि मृदुल, सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी, अमर उजाला के एसोसिएट एडीटर सुमंत मिश्र और नवभारत टाइम्स मुम्बई की उपसम्पादक कंचन श्रीवास्तव।

श्रोता समुदाय में अगली पंक्ति में (बाएं से दाएं)-अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख हरि मृदुल, सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी, अमर उजाला के एसोसिएट एडीटर सुमंत मिश्र और नवभारत टाइम्स मुम्बई की उपसम्पादक कंचन श्रीवास्तव।

कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार-कवि और नवनीत के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने आज की पत्रकारिता पर  विचार व्यक्त करते हुए कहा- ‘आज फिर मिशनरी पत्रकारिता की जरूरत है। कोई भी अखबारी तंत्र या बाजार पत्रकारों से कुछ खास खबरें लाने या न लाने को कह सकता है, पर जन सरोकारों से जुड़ी सीधी-सच्ची खबरें लाने से कोई मना नहीं करता’। उन्होंने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘आज 24 घंटे के ख़बरिया चैनलों पर खबरें कितने घंटे आती हैं? जब भी टीवी खोलो, इन चैनलों पर राजू के चुटकुले, शीला की जवानी और बिग बॉस की कहानी ही दिखती है। क्या ये खबरें हैं? न्यूज चैनल ये सब परोसकर इंटरटेनमेंट चैनलों में बदल गये हैं। ख़बरों के लिए दूरदर्शन लगाना पड़ता है। बेशक उसकी खबरों में सरकारी पुट होता है, पर वे ख़बरें तो होती हैं। मरहूम शायर क़ैसर-उल-जाफ़री के एक शेर के ज़रिए  विश्वनाथ जी ने युवा पीढ़ी को पत्रकारिता के धर्म की याद दिलाई-

हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के

जिसे ख़राब लगे सामने से हट जाए!

जी न्यूज के प्रोड्यूसर सुभाष दवे ने अपनी किताब ‘बिजनेस जर्नलिज्म’ का परिचय देते हुए कहा, ‘यह एक नीरस और शुष्क विषय माना जाता है। लेकिन मैंने इसे पंचतंत्र की कहानियों की तरह एक कहानी के रूप में पेश करके सरस बनाने की कोशिश की हैं’। वरिष्ठ जनसंपर्ककर्मी संजीव निगम ने अपनी किताब ‘जनसंपर्क’ का परिचय देते हुए कहा, ‘आज जीवन के हर क्षेत्र में जनसंपर्क की जरूरत है। वह जनसंपर्क कैसा हो, किस तरह किया जाये, उसके टूल्स क्या हों, इन सभी का विवरण मैंने दिया। और अनेक केस स्टडी के साथ व्यावहारिक तरीके से दिया है।

सकाल टाइम्स के विशेष संवाददाता मृत्युंजय बोस ने अपनी किताब ‘फील्ड रिपोर्टिंग गाइड’ के बारे में बताया, ‘यह युवा पत्रकारों के लिए एक मैन्युअल के रूप में है। रिपोर्टिंग करते समय ध्यान में रखी जाने वाली बातों को तो मैंने बताया ही है, तरह-तरह की खबरों के लिखने की शैली के उदाहरण भी दिये हैं।

नवभारत टाइम्स, मुम्बई के वरिष्ठ पत्रकार भुवेन्द्र त्यागी ने अपनी दो किताबें ‘स्पेशल रिपोर्ट’ और ‘फिल्मी स्कूप’ का परिचय दिया।

‘स्पेशल रिपोर्ट’ में जावेद इकबाल (फ्रीलांसर), जितेंद्र दीक्षित (स्टार न्यूज) मनोज जोशी (ए 2 जेड चैनल), नीता कोल्हाटकर (डीएनए), प्रबल प्रताप सिंह (आईबीएन 7), प्रभात शुंगलू (आईबीएन 7), प्रकाश दुबे (दैनिक भास्कर), स्वर्गीय प्रमोद भागवत (महाराष्ट्र टाइम्स), रामबहादुर राय (प्रथम प्रवक्ता के पूर्व संपादक), रवीश कुमार (एनडीटीवी), रवि शंकर रवि (नई दुनिया), शेखर देशमुख (फ्रीलांसर) और उमाशंकर सिंह (एनडीटीवी) के करियर की बेहतरीन रिपोर्ट हैं।

‘फिल्मी स्कूप’ में चंद्रकांत शिंदे (नई दुनिया), इम्तियाज अजीम (राष्ट्रीय सहारा), रूपेश कुमार गुप्ता (जी न्यूज), संदीप सिंह (महुआ), शिवानी त्रिवेदी (स्टार न्यूज), सुमंत मिश्र (अमर उजाला), विद्योत्तमा शर्मा, (बॉम्बे टाइम्स की पूर्व असिस्टेंट एडिटर) और विनोद तिवारी (फिल्मफेयर के पूर्व संपादक) के कैरियर की अनोखी एक्सक्लूसिव स्टोरीज हैं।

मरुधरा के अध्यक्ष सुरेन्द्र गाडिया ने मुख्य अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट किया। संस्था के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अग्रवाल व महामंत्री राकेश मोरारका ने लेखकों का स्वागत किया। सौम्य प्रकाशन की निदेशक रीना त्यागी ने पुष्पगुच्छ देकर इन पाँच पुस्तकों के कवर डिज़ाइनर  संजय खडपे और शिव पाण्डेय का सम्मान किया तथा सबके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुम्बई के कई गणमान्य पत्रकार व लेखक मौजूद थे।

मुम्बई में यह आयोजन शुक्रवार 24 दिसम्बर 2010 की शाम को सम्पन्न हुआ।

मुंबई से देवमणि पांडेय की रिपोर्ट

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0 Comments

  1. shyam bihari shyamal

    December 31, 2010 at 1:24 am

    vihvnath sachdeo ne solah aane sach kaha hai, khabaria chainalon ka hal chintajanak ho chuka hai. adbhut hai yah pankti—- हम आईने हैं दिखाएंगे दाग़ चेहरों के

    जिसे ख़राब लगे सामने से हट जाए!

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