अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल अपने खिलाफ लगी एक खबर को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उसे चलाने वाले ‘जी पंजाबी’ जैसे बड़े चैनल को पंजाब में बंद करवा दिया, अपने DIGI केबल के मध्यम से। वो खबर मेरी ही थी जो ‘जी पंजाबी’ के शाम सात बजे के बुलेटिन में चली। ये खबर थी पंजाब में सुखबीर बादल द्वारा केबल के मध्यम से मीडिया को कब्जाकर अपने समर्थित केबल और दूसरे चैनल्स के माध्यम से सिर्फ अकाली दल के पक्ष के विचार लोगों को सुनने को मजबूर करने के बारे में।
यह खबर कपूरथला जिला के भुलथ विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा की प्रेस कांफ्रेंस के बाद लगाई गई जिसमें खैरा ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी से मांग की थी कि वे सुखबीर बादल की पंजाब के केबल नेटवर्क पर कब्जा जमाने की नीयत की जांच सीबीआई से कराएं। सात बजे बुलेटिन में यह खबर चलने के तुंरत बाद ‘जी पंजाबी’ पंजाब के शहरों के उन हिस्सों से गायब हो गया जहाँ DIGI केबल है। इस खबर में सुखबीर का वर्जन भी था जिसमें उन्होंने सुखपाल खैरा नाम के किसी विधायक को जानने से ही इनकार कर दिया था। होटल कमल पैलेस में आयोजित इस प्रेस कांफ्रेंस में खैरा ने कहा कि सुखबीर बादल पंजाब के ट्रांसपोर्ट और माइनिंग बिजनेस पर पहले ही कब्जा कर चुके हैं और अब वो पंजाब के नए शुरू किए गए DIGI केबल पैठ बनाके और FASTWAY केबल की शुरुआत कर उसमें अपनी बेनामी संपत्ति का निवेश कर पंजाब के लोगों को वही खबरें दिखाना चाहतें हैं जो अकाली दल का गुणगान करने वाली हो। केबल नेटवर्क के मध्यम से सुखबीर ने एक ऐसी ताकत हासिल करने का ख्वाब देखा है जिसमें कोई भी चैनल अगर पंजाब की अकाली सरकार के खिलाफ खबर लगाने की हिमाकत करे तो वो पंजाब में ना चल पाए। जिससे चैनल दबाव में आ जाएं, सुखबीर से याचना करें और फिर सुखबीर से ऐसी गलती न दोहराने का वायदा करके अपना प्रसारण शुरू करवाएं। सुखपाल खैरा ने कहा कि निष्पक्ष चैनलों को DIGI केबल के मध्यम से पीछे फेंक दिया गया है जबकि अकाली दल का गुणगान करने वाले चैनलों को सबसे आगे लगा दिया गया है।
सांसद, अकाली दल सुप्रीमो और बादल परिवार के उत्तराधिकारी सुखबीर बादल आज की तारीख में पंजाब की राजनीति के केन्द्र बिन्दु बन चुके हैं। अकाली दल के सीनियर नेतायों की भी जुबान उनके आगे खुल नहीं पा रही है। अकाली दल में तानाशाही चलाने वाले सुखबीर की ये आदत शायद लत में बदल चुकी है और वो पंजाब में राजनीति की बजाय तानाशाही चलाने का प्रोग्राम बना चुके हैं। ऐसा अनुमान तो सबको पहले ही हो चुका था कि सुखबीर केबल नेटवर्क के जरिये सभी खबरिया चैनलों को ब्लैकमेल करने का प्रोग्राम बना चुके हैं क्योंकि सियासत पर अकाली दल का कब्जा होते ही सबसे पहले सुखबीर ने पंजाब टुडे चैनल का प्रसारण पंजाब में बंद करने का फरमान जारी कर दिया था। उसके बाद सबको मालूम ही है कि पंजाब टुडे ने अपना आधार पंजाब से हटा लिया। कांग्रेस राज के दिनों में सुखबीर सुबह-शाम इस चैनल को कोसते थे और बाद में इन्हीं निष्पक्ष चैनलों को धन्यवाद करते-थकते नहीं थे जिन पर आज वो अपना डंडा चलाने की कोशिश कर रहे हैं। औरों को नसीहत खुद मियां फजीहत की कहावत को सच साबित कर रहे सुखबीर बादल को ये शायद ख्याल नहीं रहा कि इस तरह की हरकत से वो अपनी राजनीतिक अपरिपक्वता का सबूत दे रहे हैं. यही नहीं, उन्होंने सुखपाल खैरा के उन पर लगाये इल्जामों को उसी दिन सच साबित कर दिखाया।
इस मामले में पंजाब की मीडिया का दायित्व बन जाता है कि वो इस तरह की तानाशाही के खिलाफ एकजुटता दिखाए ताकि सुखबीर बादल जैसे अपरिपक्व राजनीतिज्ञों को ना भूलने वाला सबक मिले। नहीं तो, जो आज जी पंजाबी के साथ हुआ है, कल के दिन औरों के साथ भी होगा।
लेखक सुनील रुद्र जी न्यूज के जालंधर के रिपोर्टर हैं। उनसे [email protected] के जरिए या फिर उनके मोबाइल नंबरों 09876361007 और 098140 62007 के जरिए संपर्क किया जा सकता है।











