वाराणसी। राष्ट्रीय सहारा अपने प्रकाशन के साथ ही अजीबोगरीब हरकतों से अनजाने में चर्चा का विषय बनता रहा है। तात्कालिक चर्चा गाजीपुर जनपद के बहरियाबाद के किसी विद्यालय में अध्यापिका के पद पर कार्यरत रहीं श्रीमती विद्यावती श्रीवास्तव को लेकर चल रही है।
वजह यह कि वह रिश्ते में स्थानीय संपादक की सास लगती थीं। किसी गंभीर बीमारी के चलते सर सुंदर लाल चिकित्सालय के आईसीयू में भर्ती थीं। सहारा के नियमों और उसूलों को तिलांजलि देते हुए इनकी देखरेख के लिए आफिस के वेतनभोगी तीन कर्मियों की ड्यूटी लगाई गयी थी जिनमें से एक तो काशी हिंदू विश्वविद्यालय का ही बीट देखता है। यह पत्रकार पूरे सात दिन संपादक जी की सासु मां की तीमारदारी में तन्मयता से लगा रहा।
इसी तरह दो अन्य कर्मचारी आफिसियली रूप से तीमारदारी लगाए गए थे। दुर्भाग्यवश श्रीमती विद्यावती श्रीवास्तव का पिछले दिनों निधन हो गया। चूंकि वह संपादक की सासु मां थी इसलिए उनकी खबर भी सहारा में दो बार प्रकाशित की गयी। एक दिन उनके निधन की सूचना आई तो दूसरे दिन अंत्येष्टि की खबर प्रकाशित की गयी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। बहरहाल सासू मां की तीमारदारी में लगे तीन लोगों में से दो को क्या मिला यह तो अभी नहीं पता चल सका किंतु तीसरे शख्स जिसके नाम के अंत में ‘लाल’ लगा है उसे एक तरह से पुरस्कृत किया गया।
तीमारदारी में जाने से पहले उसके जिम्मे डाक डेस्क था, किंतु अब उसे वहां से हटाकर सिटी रिपोर्टर बना दिया गया है। बाकी के दो भी पुरस्कृत होने की बाट जोह रहे हैं। इधर आम कर्मियों में चर्चा अब सहारा के उसूलों के खिलाफ कर्मचारियों की अस्पताल में ड्यूटी लगाने को लेकर चल रही है। सूत्रों ने बताया है कि इस प्रकरण को सहारा के उच्च प्रबंधन ने गंभीरता से लिया है और अपने स्तर से इसकी जांच पड़ताल भी शुरू करा दी है।
बनारस से पूर्वांचलदीप के अजय कृष्ण त्रिपाठी की रिपोर्ट











