दैनिक भास्कर में हड़कंप मचा हुआ है। भड़ास4मीडिया के पास पिछले तीन दिनों से कई शहरों और कई लोगों के जरिए दुखी करने वाली सूचनाएं आ रही हैं। इनकी जब जांच-पड़ताल की गईं तो कोई भी सूचना गलत नहीं निकली। जी हां, छंटनी की सबसे तेज आंधी भास्कर में कहर बरपाने लगी है। ऐसे निष्ठावान और सीनियर लोगों को निकाला जा रहा है जिन्होंने एक समय में भास्कर को जमाने में महती भूमिका निभाई थी। प्रोफेशनलिज्म और कारपोरेट नैतिकता के तकाजे के तहत भास्कर प्रबंधन आंख मूंदकर सिर्फ और सिर्फ कंपनी का हित देखते हुए अपने मीडियाकर्मियों की बलि ले रहा है। इंदौर और भोपाल संस्करणों से 100 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला जा चुका है। सिर्फ इंदौर से ही 39 लोगों को बाहर किया जा चुका है। इंदौर के स्थानीय संपादक राजेंद्र तिवारी हैं।
इस यूनिट से सिटी भास्कर को लांच करने वाले लोगों की टीम के कई वरिष्ठ लोगों को निकाला जा चुका है। ये लोग पिछले छह-सात साल से भास्कर को अपनी सेवाएं दे रहे थे। जनरल मैनेजर एचएस चुग को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। भास्कर ने सभी यूनिटों के संपादकों को आदेश दे दिया है कि वे पेज बनाने का काम हर हाल में संपादकीय कर्मियों से ही कराएं और पेज आपरेटरों व पेज डिजायनरों को हर हाल में काम से मुक्त कर दें। कहा जाए तो इस मंदी ने हर अखबार के पेजीनेशन डिपार्टमेंट की आखिरी बलि ले ली है।
पेज आपरेटरों का काम संपादकीय कर्मियों से कराने की परंपरा तो बहुत पहले ही शुरू हो चुकी थी लेकिन मंदी के इस दौर में इस पूरे डिपार्टमेंट को मंदी के यज्ञ में स्वाहा करके जला दिया गया है। भास्कर की हर यूनिट में काम करने वाले और काम ना करने वालों की लिस्ट तैयार कराई जा रही है। इस ग्रुप से जुड़े मीडियाकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। हर कर्मचारी खुद को तलवार की धार पर पा रहा है। किसी को भरोसा नहीं है कि उसकी नौकरी सुरक्षित है या नहीं। सूत्र बताते हैं कि छंटनी का क्रम अभी जारी है और अन्य यूनिटों से भी भोपाल, इंदौर की तरह लोग एकमुश्त निकाले जा सकते हैं।











