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तबादला से नाराज नई दुनिया के सिटी चीफ रवींद्र छुट्टी पर गए

: पी7 से संजीव का इस्‍तीफा : नई दुनिया, जबलपुर के सिटी चीफ रवींद्र दुबे का तबादला जम्‍मू कर दिया गया है. प्रबंधन ने बिना नोटिस दिए उनका तबादला कर दिया था. जिसके विरोध में रवींद्र दुबे छुट्टी पर चले गए हैं. वे पिछले कई दिनों से आफिस नहीं जा रहे हैं. रवींद्र दुबे जबलपुर के वरिष्‍ठ तथा जाने माने पत्रकार हैं. उन्‍होंने अभी संस्‍थान को अपना इस्‍तीफा नहीं दिया है. लेकिन माना जा रहा है कि वे जल्‍द ही संस्‍थान को नमस्‍कार कर देंगे.

: पी7 से संजीव का इस्‍तीफा : नई दुनिया, जबलपुर के सिटी चीफ रवींद्र दुबे का तबादला जम्‍मू कर दिया गया है. प्रबंधन ने बिना नोटिस दिए उनका तबादला कर दिया था. जिसके विरोध में रवींद्र दुबे छुट्टी पर चले गए हैं. वे पिछले कई दिनों से आफिस नहीं जा रहे हैं. रवींद्र दुबे जबलपुर के वरिष्‍ठ तथा जाने माने पत्रकार हैं. उन्‍होंने अभी संस्‍थान को अपना इस्‍तीफा नहीं दिया है. लेकिन माना जा रहा है कि वे जल्‍द ही संस्‍थान को नमस्‍कार कर देंगे.

रवींद्र के जबलपुर से शीघ्र लांच होने वाले प्रदेश टुडे अखबार का आरई बनने की चर्चा है. बताया जा रहा है कि उनका नाम लगभग फाइनल हो गया है. उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत 91 में सांध्‍य दैनिक जयलोक से की थी. इसके बाद वे स्‍वतंत्र मंच, सीएनएन-आईबीएन, एएनआई के लिए भी अपनी सेवाएं दीं. तीन साल पहले वे नई दुनिया के साथ जुड़ गए थे.

पी7 न्‍यूज से संजीव कुमार झा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे वहां सीनियर प्रोड्यूसर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी स्‍वाभिमान टाइम्‍स के साथ शुरू की है. वे स्‍वाभिमान टाइम्‍स के संपादकीय विभाग में काम करेंगे. संजीव पिछले तेरह सालों से पत्रकारिता में हैं. संजीव ग्‍यारह साल तक दैनिक जागरण, नोएडा के साथ काम किया हैं. 2009 में उन्‍होंने पी7 न्‍यूज ज्‍वाइन किया था.

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0 Comments

  1. राजविद्रोही

    January 9, 2011 at 9:23 am

    Kya Patrakaar Hain aur Patrakarita Bhi Kamal Ki Hai. Khabar Likhne Ke lie In Patrakaron Ke pass time nahi hota. Khud Ko bizi batane ke lie Raat ko jaan boojhkar deri se ghar jate hain aur BHADAS par likhne ke lie dimaag khuja-khujakar sochte hain. Fir Chahe kitna bhi time lage. Yahan Comment Daalkar Baad me group banakar charcha karenge aur khud ko TEES MAAR KHAN mahsoos karenge. Ghar Jaenge, So jaenge aur subah uthkar fir bhedchal me shamil hokar kadamtaal karne lagenge. Kisi ki mazboori smajhna inke dastoor me hai hi nahi.

    Jab khud pe beete to pata chale na. Khair, Sab Bade patrakaar hain bhai… Kuchh bhi likh sakte hain, Apne parichay ke sath kisi ke munh se ek shabd bhi nahi nikalta aur Bhadas par BENAMI ya FARZI NAAM Se Inki Zubaan lambi ho jati hai, Bade-Bade Logon ke naam uchhalte hain fir ye log. Koi Sandeep Ji ko blaim kar raha hai to koi Ravindra Ji ko. Kisi ne bhi poori sachchai janne ki koshish nahi ki. Kuchh to ese hain jo Bhadas ko hi Ghalat bata rahe hain. Khud ka to ata-pata hai nahi. bas lag gaye comment daalne. Main Bhi Unhi me se ek ho sakta hoon, mere is comment par bhi kai aalochnatmak comment aaenge, mujhe CHHELA jaega, par mujhe khushi is baat ki hai ki MAIN PATRAKAAR NAHI HOON. Main Sandeep Ji, Ravindra Ji Aur Bhadas Ka Shubhchintak hoon islie yahan tak aa pahuncha. Aur Cooment Kar Baitha. Vaise ye comment aap logon ke lie hoga, mere lie to yah PRATIKRIYA hai.

    Sahir Ludhiyanvi ne Sahi likha hai ese logon ke baare me:

    “क्या मिलिए ऎसे लोगों से, जिनकी फितरत छुपी रहे
    नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे।

    जिनकी आधी नीयत उभरे, आधी नीयत छुपी रहे
    नकली चेहरा सामने आए, असली सूरत छुपी रहे।”

    Itna padhne ke baad to koi bhi mera naam janne ka ichchhuk hoga. Maaf kijiega Dar lagta hai aap logon se islie naam nahi likhoonga. Dar lagta hai ki kahin mera naam apka chehra na fula de. islie naam nahi laikha.

  2. Ajay Singh

    January 3, 2011 at 12:15 pm

    यह कहना तो बिलकुल गलत होगा कि रवींद्रजी दूध के धुले हैं। दरअसल सिटी चीफ की आड़ में जो वो प्रिटिंग का आर्डर अधाधुध ले रहे थे। यह पूरा शहर जानता है। और तो और अपनी दुकानदारी बढ़ाने के लिए वे उन लोगों को भी नईदुनिया ले आए जो कहीं से भी पत्रकारिता से ताल्लुक नहीं रखते। उन्हीं के एक मुहं लगे रिपोटर ने विवि के एक अधिकारी से दस हजार रुपयों की मांग की थी। उसके बाद भी वह नौकरी कर रहा है जिस पर इनही की कृपा रही। हाथ टूूटने पर चार महीने तक जिसने की बोर्ड में हाथ न लगाया हो उसने क्या काम किया होगा यह भी लोग जानते हैं। जहां से प्रिंटिंग का आर्डर नहीं मिलता था वहीं की विरोधी खबरे लिखी जाती थी। कहने को इन्होंने प्रिटिंग का काम बंद कर दिया लेकिन आर्डर धड़ल्ले से पलटी किया जा रहा है। उनके साथ तो यह पहले हो जाना था क्योंकि कहा गया है जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह भी उसमें गिरता ही हैं।

  3. punana sathi

    January 2, 2011 at 9:42 am

    Jo bhi hua wo naidunia ke liye accha hu. Isse JBP editon sudhar jayega.

  4. pankaj malik

    January 1, 2011 at 5:59 pm

    नईदुनिया के मालिक इन दिनों पूरी तरह बिल्डर बन गये है, कुछ दिन पहले ही उनके खिलाफ रतलाम मे जमीन घोटाले का मुकदमा दर्ज़ हुआ है. वहा के दो बिल्डरों के साथ मिलकर रतलाम के लोकेन्द्र भवन की जमीन के अफरा तफरी का मामला है. इंदौर मे भी जल्दी भांडा फोड़ होने वाला है. नईदुनिया के नए मालिक विनय छजलानी ने इस पुराने अखबार का सारे इज्ज़त मिती मे मिला दी. रविन्द्र दुबे के बाद और भी छोड़ेंगे.

  5. sanjay gautam

    December 31, 2010 at 6:04 am

    संदीप चंसोरिया कह रहे है ”जैसी करनी वैसी भरनी”……चलो उन्होंने रवींद्र से अपनी कुंठा ये कह कर निकाल ली लेकिन उन्हें एहसान फरामोश नहीं होना चाहिए….ये रवींद्र ही थे जो बीमार पड़ने पर संदीप को जबलपुर अस्पताल ले गए थे और उनकी तीमारदारी की थी….शायद संदीप को याद होगा कि उनका अस्पताल का ७८०० रुपये का बिल आज भी रवींद्र के नाम पर चढ़ा है और वे मुंह चुराकर इस शहर से ही भाग गए.वैसे संदीप की हरामदाढ़ बहुत बड़ी थी…उन्हें अपनी मंडला यात्रा तो याद ही होगी जिसके लिए टैक्सी की व्यवस्था पुलिस के एक आला अधिकारी ने की थी…….और अपने एक रिपोर्टर से मोबाइल की व्यवस्था करने का किस्सा तो नई दुनिया के रिपोर्टर चटखारे लेकर लोगों को बताते थे….. उन्हें चैलेन्ज है कि रवींद्र की गलत करनी का कोई किस्सा बता सके…..वो तो दगाबाज प्रबंधन, भ्रष्ट अधिकारी,चार सौ बीस बिल्डर और स्वार्थ के लिए बुक चुके अखबार मालिक के नापाक गठजोड़ का शिकार हुए है…..लेकिन जैसा रवींद्र का स्वभाव है……वो शांत नहीं बैठने वाले और वे इस नापाक गठजोड़ का भंडाफोड़ करके ही रहेंगे…….
    संजय गौतम

  6. atul

    December 30, 2010 at 6:54 am

    resp chajlani je-resp sethia je aap log sampadoko ke kahne par staff ka tabadala kar dete hai par un sampadko ko bhe to badlo jo NAIDUNIA ke aad me ghar bhar rahe hai. kahe to byora bhej do.

  7. raghuveer sharma

    December 30, 2010 at 7:02 am

    भड़ास की ये खबर पूरी सत्यता नहीं बयान कर रही है….रवीन्द्र दुबे ना तो अपने तबादले से नाराज है और न ही जम्मू जाने से डर रहे है…..हाँ नई दुनिया के अन्दरखाने से छान कर जो खबरे आ रही है उसने जरूर उन्हें विचलित किया है…..नई दुनिया के लोगों से ही पता चला है कि भ्रष्ट बिल्डरों, अधिकारियों और अखबार मालिकों के नापाक गठजोड़ के कारण ही रवीन्द्र दुबे को अच्छे काम का ये बुरा सिला ( जम्मू तबादला ) मिला है. इसमे प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विलेन का काम किया है.
    raghuveer sharma

  8. sandeep chansoriya

    December 30, 2010 at 1:00 pm

    badhi ho. karni ka phal hai

  9. sanjay

    December 30, 2010 at 1:00 pm

    ram&ram

  10. Arpit Kumar

    December 30, 2010 at 4:07 pm

    >:( Ab to duniyadari seekh lo Ravindra jee. Sirf imandari se juban hi chalti hai naukri nahi….. Bado ke samjhote ne aapki bali le lee.:o

  11. jabalpurjournalist

    December 30, 2010 at 4:53 pm

    is baat me koi do ray nahi hi ki ravindra ji ka kaam bolta tha or usi ka khamiyaja wo bhoogat rahe hi ek photographer jo is samay patrika me hi wo builder hi lekin press me kam karte hi .ravindra ji ki unse kabhi nahi bani sayad wo in mahasy ki harkaton se wakif the doosre dalalon or buildaron ke khilaf to khabr late the lekin khud wahi karte the jis karn unki kai baar ladai bhi ho chooki thi office me.ye ek example tha aise kai kisse hi jo ravindra ji ke kaam ke karan unke dushmanbante gay .koi baat nahi rvindra ji aap lagfey raho god apke saath hi

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