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रूपम पाठक एक चेतावनी है!

पुरूषोत्‍तम: स्‍वभाविक न्‍याय न मिलने का परिणाम है यह हत्‍याकांड : सारे देश में लोगों के लिये यह खबर एक नया सन्देश लेकर आयी है कि बिहार विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनकर आये बाहुबली विधायक राजकिशोर केशरी का जनता से मेलमिलाप के दौरान रूपम पाठक ने सार्वजनिक रूप से चाकू घोंपकर बेरहमी से कत्ल कर दिया। मौके पर तैनात पुलिस वालों ने रूपम को घटनास्थल पर पकड़ लिया और पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।

पुरूषोत्‍तम: स्‍वभाविक न्‍याय न मिलने का परिणाम है यह हत्‍याकांड : सारे देश में लोगों के लिये यह खबर एक नया सन्देश लेकर आयी है कि बिहार विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनकर आये बाहुबली विधायक राजकिशोर केशरी का जनता से मेलमिलाप के दौरान रूपम पाठक ने सार्वजनिक रूप से चाकू घोंपकर बेरहमी से कत्ल कर दिया। मौके पर तैनात पुलिस वालों ने रूपम को घटनास्थल पर पकड़ लिया और पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।

घटनास्थल पर उपस्थित अधिकांश लोगों को और विशेषकर पुलिसवालों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि विधायक पर क्यों हमला किया गया है एवं हमला करने वाली महिला कितनी मजबूर थी। बावजूद इसके पुलिस वालों ने आक्रमण करने वाली महिला अर्थात् रूपम पाठक द्वारा किये गए आक्रमण के समय सुरक्षा गार्ड उसको नियन्त्रित नहीं कर सके और उसकी बेरहमी से पिटाई की, जिसका पुलिस को कोई अधिकार नहीं था। जहाँ तक मुझे जानकारी है, रूपम की पिटाई करने वाले पुलिस वालों के विरुद्ध किसी प्रकार का प्रकरण तक दर्ज नहीं किया गया है। जबकि रूपम के विरुद्ध हत्या का अभियोग दर्ज करने के साथ-साथ, रूपम पर आक्रमण करने वालों के विरुद्ध भी मामला दर्ज होना चाहिए था।

राजकिशोर केशरी की हत्या के बाद यह बात सभी के सामने आ चुकी है कि इस घटना से पहले रूपम पाठक ने बाकायदा लिखित में फरियाद की थी कि राज किशोर केशरी, गत तीन वर्षों से उसका यौन-शोषण करते रहे थे और उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित भी कर रहे थे। जिसके विरुद्ध नीतीश कुमार प्रशासन से कानूनी संरक्षण प्रदान करने और दोषी विधायक के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की मांग भी की गयी थी, लेकिन पुलिस प्रशासन एवं नीतिश सरकार ने रूपम पाठक को न्याय दिलाना तो दूर, किसी भी प्रकार की प्राथमिक कानूनी कार्यवाही करना तक जरूरी नहीं समझा। आखिर सत्ताधारी गठबन्धन के विधायक के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कैसे की जा सकती थी?

स्वाभाविक रूप से रूपम पाठक द्वारा पुलिस को फरियाद करने के बाद; विधायक राज किशोर केशरी एवं उनकी चौकड़ी ने रूपम पाठक एवं उसके परिवार को तरह-तरह से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। सूत्र यह भी बतलाते हैं कि रूपम पाठक से राज किशोर केशरी के लम्बे समय से सम्बन्ध थे। जिन्हें बाद में रूपम ने यौन शोषण का नाम दिया है। हालांकि इन्हें रूपम ने अपनी नियति मानकर स्वीकार करना माना है, लेकिन पिछले कुछ समय से राजकिशोर केशरी ने रूपम की 17-18 वर्षीय बेटी पर कुदृष्टि डालना शुरू कर दिया था, जो रूपम पाठक को मंजूर नहीं था। इसी कारण से रूपम पाठक ने पहले पुलिस में गुहार की और जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो खुद ही विधायक एवं विधायक के आतंक का खेल खतम कर दिया!

रूपम पाठक ने जिस विधायक का खेल खत्म किया है, उस विधायक के विरुद्ध दाण्डिक कार्यवाही नहीं करने के लिये बिहार की पुलिस के साथ-साथ नीतिश कुमार के नेतृत्व वाली संयुक्त सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है। विशेषकर भाजपा इस कलंक को धो नहीं सकती, क्योंकि राजकिशोर केशरी को भाजपा ने यह जानते हुए भी टिकट दिया कि राज किशोर केशरी पूर्णिया जिले में आपराधिक छवि के व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। जिसकी पुष्टि चुनाव लड़ने के लिये पेश किये गये स्वयं राजकिशोर केशरी के शपथ-पत्र से ही होती है।

पवित्र चाल, चरित्र एवं चेहरे तथा भय, भूख एवं भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने का नारा देने वाली भाजपा का यह भी एक चेहरा है, जिसे बिहार के साथ-साथ पूरे देश को ठीक से पहचान लेना चाहिये और नीतिश कुमार को देश में सुशासन के शुरुआत करने वाला जननायक सिद्ध करने वालों को भी अपने गिरेबान में झांकना होगा। इससे उन्हें ज्ञात होना चाहिये कि बिहार के जमीनी हालात कितने पाक-साफ हैं। जो सरकार एक महिला द्वारा दायर मामले में संज्ञान नहीं ले सकती, उससे किसी भी नयी शुरुआत की उम्मीद करना दिन में सपने देखने के सिवा कुछ भी नहीं है!

रूपम पाठक का मामला केवल बिहार, भाजपा, नीतीश कुमार या राजनैतिक ताकतों के मनमानेपन का ही प्रमाण नहीं है, बल्कि यह प्रकरण एक ऐसा उदाहरण है जो हर छोटे-बडे व्यक्ति को यह सोचने का विवश करता है कि नाइंसाफी से परेशान इंसान किसी भी सीमा तक जा सकता है। पुलिस, प्रशासन एवं लोकतान्त्रिक ताकतें आम व्यक्ति के प्रति असंवेदनशील होकर अपनी पदस्थिति का दुरूपयोग कर रही हैं और देश के संसाधनों का मनमाना उपयोग तथा दुरूपयोग कर रही हैं। सत्ता एवं ताकत के मद में आम व्यक्ति के अस्तित्व को ही नकार रही हैं।

ऐसे मदहोश लोगों को जगाने के लिये रूपम ने फांसी के फन्दे की परवाह नहीं करते हुए, अन्याय एवं मनमानी के विरुद्ध एक आत्मघाती कदम उठाया है। जिसे यद्यपि न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन रूपम का यह कदम न्याय एवं कानून-व्यवस्था की विफलता का ही प्रमाण एवं परिणाम है। जब कानून और न्याय व्यवस्था निरीह, शोषित एवं दमित लोगों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं तो रूपम पाठक तथा फूलन देवियों को अपने हाथों में हथियार उठाने पड़ते हैं। जब आम इंसान को हथियार उठाना पडता है तो उसे कानून अपराधी मानता है और सजा भी सुनाता है, लेकिन देश के कर्णधारों के लिये और विशेषकर जन प्रतिनिधियों तथा अफसरशाही के लिये यह मनमानी के विरुद्ध एक ऐसी शुरुआत है, जिससे सर्दी के कड़कड़ाते मौसम में अनेकों का पसीना छूट रहा है।

अत: बेहतर होगा कि राजनेता, पुलिस एवं उच्च प्रशासनिक अधिकारी रूपम के मामले से सबक लें और लोगों को कानून के अनुसार तत्काल न्याय देने या दिलाने के लिये अपने संवैधानिक और कानूनी फर्ज का निर्वाह करें, अन्यथा हर गली मोहल्लें में आगे भी अनेक रूपम पैदा होने से रोकी नहीं जा सकेंगी। समझने वालों के लिये रूपम एक चेतावनी है!

लेखक डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’ होम्योपैथ चिकित्सक तथा मानव व्यवहारशास्त्री, विविध विषयों के लेखक, टिप्पणीकार, कवि, शायर, चिन्तक, शोधार्थी, तनाव मुक्त जीवन, सकारात्मक जीवन पद्धति आदि विषय के व्याख्याता तथा समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

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0 Comments

  1. मदन कुमार तिवारी

    January 13, 2011 at 4:22 pm

    रुपम पाठक को सजा का अर्थ होगा , हर उस इन्सान को सजा जो सचाई के लिये और अत्ाार के खिलाफ़ जंग लड रहा है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं की अगर आज १०-२० लोग भी हिम्मत करके आगे आयें तो रुपम की रिहाई के अलाा कोई विकल्प नही बचेगा कानून के पास । सबसे पहले जरुरी है की हत्ा के बाद रुपम पर हुये कातिलाना हमले के मुकदमे को दर्ज करना । अभी पुर्णीया के एसपी ने एक महिला दारोा से १००० अंजान लोगों के विरुद्ध रुपम पाठक पर हमला का मुकदमा दर्ज काा है। वह एसपी जानता है , नामजद मुकदमा होने की स्थिति में रुपम पर हमला करने वालों को भी सजा होगी । दुसरी जरुरत है बलात्ार के केस की जांच । आप लोगों में से अगर कोई मेरी बात रुपम की पैरवी कर रहे उनके परिवार वालों से करा दे तो शायद रुपम और नवलेश दोनों को मैं कुछ कानुनी सलाह दे सकु

  2. praween kumar jha

    January 8, 2011 at 3:43 pm

    jaha tak ho hum log rupoom pathak k liye jo v karna pade karne k liye taiyar hai. is satta k dalal sab ki yahi hona v chahiye

  3. praween kumar jha

    January 8, 2011 at 3:41 pm

    mujhe kahi se nahi lagta hai ki roopam pathak koi galti ki hai. ab police or sarkar k upar se to logo ka bhadosha uth hi gaya hai to roopam pathak jo v ki hai wo mere nazar mai sahi hai. is satte ke dalalo ko ab sarkar kuchh nahi kar sakti hai to ab hame ya kisi ko v insaaf pane k liye ye to karna hi padega. mai bhawaan se yahi duaa maguga ki agar aap is dharti par sache logo ki vijay dekhne chahte hai to roopam pathak ko sahi insaaf mile.

    writter – praween kumar jha
    place- patna

  4. Indra Kumar Shukla

    January 8, 2011 at 8:40 am

    रूपम पाठक पर अत्याचार हुआ ,जब उसे न्याय ना मिलते दिखा तो उसने कानून अपने हाथ मे ले लिया ,यह हमारी लचर कानून व्यवस्था का परिणाम है !यह संकेत है उन सत्तानसीनो के लिए जो सत्ता के नशे मे गरीबो के जीवन से खिलवाड़ करते है ,कानून को गुलाम और सत्ता को रखैल समझते ,इन अय्यासो को अपना चरित्र सुधारना होगा ,यह कोइ पहला मोका नहीं जब किसी नेता पर योन शोषण का आरोप लगा हो कांग्रेस के वरिठ नेता नारायण दत्त तिवारी भी अपने कर्मो को भुगत रहे है !डर यह है रूपम की राह पर कही शोषितों की भीढ़ ना चल दे ! इन्द्र कुमार शुक्ला संपादक वेब न्यूज़ ऑफ़ इंडिया भोपाल [म .प्रा.]

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