रश्मि हंस के बारे में अमर उजाला, चंडीगढ़ के वरिष्ठ लोगों की तरफ से जो जानकारी दी गई, वो इस प्रकार है- ”रश्मि हंस को उदय कुमार के पहले वाले संपादक के कार्यकाल में ट्रेनी नियुक्त किया गया था. कई तरह की शिकायतों के बाद जब तत्कालीन संपादक व एक वरिष्ठ पत्रकार के फोन काल डिटेल अमर उजाला प्रबंधन ने निकलवाए थे तो पता चला कि रश्मि की इन लोगों से काफी बातचीत होती है और इस त्रिकोण के कारण कई तरह की अंदरुनी राजनीति हो रही है.
जब उदय कुमार संपादक के रूप में चंडीगढ़ आए तो अपनी नौकरी पर खतरा मंडराते देख रश्मि हंस ने अतुल माहेश्वरी समेत कई लोगों के यहां शिकायती मेल डाल दी. ये बात साल भर पुरानी है. तब प्रबंधन ने इस डर से कि कोई बखेड़ा न खड़ा हो जाए, छह महीने का एक्सटेंशन रश्मि को दे दिया. पर इन छह महीनों में रश्मि का अमर उजाला आफिस के हर शख्स से झगड़ा होता रहा और लगभग सभी ने कहा कि इससे मुक्त होना जरूरी है. यहां तक कि रश्मि ने संपादक उदय कुमार की पत्नी तक को फोन कर धमकाया कि अगर मेरी नौकरी गई तो मैं बर्बाद कर दूंगी. इस एक्सटेंशन पीरियड में भी रश्मि हंस अतुल माहेश्वरी के यहां लगातार शिकायती मेल और यहां तक कि सीधे फोन काल करती रहीं. यह प्रकरण अमर उजाला प्रबंधन के पूरी तरह संज्ञान में है.
इस नए बखेड़े में रश्मि का दोष कम, उन कुछ लोगों का हाथ ज्यादा है जो अब अमर उजाला, चंडीगढ़ में नहीं हैं लेकिन यहां के माहौल को गंदी पालिटिक्स के जरिए खराब करना चाहते हैं. रश्मि हंस अपने खराब व्यवहार और भयंकर राजनीति के कारण हटाई गईं, उनका हटाया जाना शीर्ष प्रबंधन के संज्ञान और अनुमति से था. बाद में वे हिंदुस्तान गईं और वहां से भी उनको हटना पड़ा. इन दिनों पंजाब केसरी में हैं. अतुल माहेश्वरी जी के न रहने के बाद इस तरह की गंदी राजनीति को शुरू करना बताता है कि रश्मि के पीछे कुछ लोग सक्रिय हैं जो अमर उजाला को अस्थिर करने में लगे हुए हैं.”












Ajay Kumar
January 17, 2011 at 4:19 pm
कोढ़ी हो जाएदा उदय कुमार. रश्मि जो आप के साथ उदय कुमार ने क्या वो बहुत गन्दी बात है. अमर उजाला जैसे अच्छे अख़बार को एसे गंदे आदमी से दूर रहना चाहिए. हम आप के बारे मे जानते है. आप एक अच्छी लड़की हैं. अख़बार कुछ करे न करे ईस्वर सब देखता है और वही इंसाफ भी करेगा.
बेनामी
January 13, 2011 at 3:32 am
आदरणीय अतुल जी तो रहे नहीं। अब जो भी अमर उजाला देख रहा है उसे कम से जांच तो करवानी चाहिये पूरे मामले की। अमर उजाला इतने सारे झंझावतों से गुज़र रहा है, अब उसे इस तरह के मामलों में संभलकर चलना होगा। क्यों कि पीड़िता के पास थाने से लेकर महिला आयोग तक जाने के बहुत से रास्ते होते हैं। अगर उसने ये रास्ते इस्तेमाल किये तो अखबार की बहुत बदनामी होगी। इसलिये घर की बात घर में ही रह जाये और जो भी दोषी हो उसको सज़ा मिल जाये तो बात बिगड़ने से बच जायेगी।
paras
January 12, 2011 at 11:03 am
Uday g hum bhi sab jante hai. amar ujala chandigarh mein kis tarh kam hota hai. apke favour mein likhne wale apke charno mein paye jate hain. un logo ko shyad ek aur promotion mil jaye. Ek ladki se amar ujala sansthan ki kya khatra pad gaya ki 6 month ke liye darr se extension de di,
surjit chandigarh
January 11, 2011 at 3:10 pm
its not true, i think she is good girl
Tarun
January 10, 2011 at 2:44 pm
उदय कुमार हिंदुस्तान से रश्मि हटाई नहीं गई. चंडीगढ़ से हिंदुस्तान बंद हो गया था लड़की बहार जा नहीं सकती थी.
zuber qureshi
January 10, 2011 at 1:51 pm
aisa har jagha ho rah ha
shobhit
January 10, 2011 at 1:27 pm
rashmi jee shant raho
anil mishra
January 10, 2011 at 1:10 pm
yashwan ji, thanx. jawaab mil gaya.
durgendra sharma
January 10, 2011 at 12:29 pm
yesvant ji, es tarah ki ghatnay dil ko bada chubhoti hai