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पत्रकारों-अधिकारियों के जी का जंजाल बने कैशकार्ड

लोगोजयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा पत्रकारों को बांटे गए कैशकार्ड अब प्राधिकरण प्रशासन की फांस बन गए हैं। वहीं इस प्रकरण में लिप्त ‘लेने व देने वाले’ लोग बचने की गली तलाशने में लग गए हैं। ‘प्रकाश कुंज’ में जेडीए द्वारा पत्रकारों को उपहार के रूप में बांटे गए कैश कार्ड घोटाले का पर्दाफाश किया गया है लेकिन अब लिप्त लोग इस पर पर्दा डालने में लग गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार दीपावली व नववर्ष की गिफ्ट के तौर पर ये कैशकार्ड जेडीए ने बांट तो दिए मगर इन कैशकार्डों के लिए धन की व्यवस्था कहां और किस मद से हुई? ये तो विचारणीय है।

लोगोजयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा पत्रकारों को बांटे गए कैशकार्ड अब प्राधिकरण प्रशासन की फांस बन गए हैं। वहीं इस प्रकरण में लिप्त ‘लेने व देने वाले’ लोग बचने की गली तलाशने में लग गए हैं। ‘प्रकाश कुंज’ में जेडीए द्वारा पत्रकारों को उपहार के रूप में बांटे गए कैश कार्ड घोटाले का पर्दाफाश किया गया है लेकिन अब लिप्त लोग इस पर पर्दा डालने में लग गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार दीपावली व नववर्ष की गिफ्ट के तौर पर ये कैशकार्ड जेडीए ने बांट तो दिए मगर इन कैशकार्डों के लिए धन की व्यवस्था कहां और किस मद से हुई? ये तो विचारणीय है।

संवाददाता ने इस सारे प्रकरण की गहराई से खोजबीन की तो कई पत्रकारों को किन मामलों पर मैनेज किया जाना है, इसका भी खुलासा हो रहा है। जेडीए ने अपने कारनामों पर पर्दा डालने के लिए जिन पत्रकारों को मैनेज करने की रणनीति बनाई थी, अब उसकी हवा निकल गई है, हांलाकि कुछ पत्रकारों ने तो इन रिश्वत रूपी कैशकार्डों से धन निकाल लिया है तो कुछ खबर छपने के बाद से ही इन कार्डों को रखकर भूल गये हैं। जेडीए में ये कैशकार्ड यूं ही नहीं बांटे गए हैं, इनके पीछे भी तगड़ा ही खेल नजर आ रहा है।

‘प्रकाश कुंज’ संवाददाता ने अपनी सूझबूझ से इन कार्डों की जानकारी जुटाई है और इस मामले का खुलासा भी जनता के बीच कर दिया है। अब देखना यह है कि एक ओर तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्पष्ट, संवेदनशील सरकार का वादा जनता से कर रहें हैं और दूसरी ओर भ्रष्ट अफसर अपने कारनामों को छुपाने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे अपना रहें हैं।  जेडीए की जनसम्पर्क शाखा द्वारा जो कार्ड बांटे गए हैं वे खाता संख्या 910010027245298 से लिए गए हैं और अक्टूबर 2010 में खरीद किए गए हैं और दो वर्ष के लिए मान्य हैं।

इनका कथन

‘यह अनुचित कृत्य है। न्यायपालिका और जनतंत्र के चौथे स्तंभ पर जन विश्वास कायम है और प्रेस के माध्यम से ऐसा किया गया, इससे ज्यादा घटिया और विनाशकारी आर्थिक अपराध लोकतंत्र में और क्या होगा।’ – महावीर प्रसाद जैन, पूर्व मुख्य सचेतक, राजस्थान.

‘कुछ ना कुछ गड़बड़ है, दाल में काला है, कोई गलत कारनामा छिपाने के लिए यह कदम उठाया है।’ – डॉ. गोपाल जोशी, विधायक बीकानेर (पश्चिम).

‘मीडिया के ऊपर आमजन को विश्वास है, जेडीए ने मीडिया कर्मियों को कैश वाउचर देकर लालच का बीज बोया है, जो परंपरा बनते हुए वटवृक्ष बन जाएगा और ऐसी स्थिति में जनता की हितैषी मीडिया में भारी गिरावट आएगी।’ – गुलाबचंद कटारिया, विधायक उदयपुर शहर एवं पूर्व गृहमंत्री.

‘मीडिया को खरीदने की कोशिश की जा रही है, यह एक गलत परंपरा की शुरुआत है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।’ – कालीचरण सर्राफ,  विधायक मालवीय नगर, जयपुर.

‘यह एक गलत परम्परा है पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे की। सरकार इसकी जांच कराए और उपहार देना ही था तो सभी को समान राशि का देते और कम से कम सभी अधिस्वीकृत पत्रकारों को देना चाहिए था। मुख्यमंत्री को इस सारे प्रकरण की जांच करवानी चाहिए।’ – भवानीसिंह राजावत, विधायक एवं पूर्व मंत्री सूचना एवं जनसम्पर्क.

‘गलत परंपरा शुरू कर दी है। ईमानदार को चोर बनाने का कार्य जेडीए द्वारा किया जा रहा है। हमारे पत्रकार ईमानदार हैं वे अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और मौका आने पर इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।’ – अशोक परनामी, विधायक आदर्श नगर.

‘ये प्रथा गलत है। किसी अधिकारी ने ऐसा किया है तो गलत किया है। मैं इसकी निंदा करता हूं।’ – वीरेन्द्र सिंह राठौड़, अध्यक्ष, पिंकसिटी प्रेस क्लब,  जयपुर.

‘मामला जानकारी में नहीं आया है, जानकारी करके बात करता हूं।’ – प्रतापसिंह खाचरियावास, विधायक सिविल लाइन्स.

‘ये गलत परम्परा है। दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह निंदनीय कृत्य है।’ – हरीश गुप्ता, महासचिव, राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ, जयपुर.

‘ये गलत परम्परा है, क्या कहें। शर्मिंदगी हो रही है। मुख्यमंत्री अपने आपको संवेदनशील मानते हैं तो इसकी जांच करावें और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें।’ – अशोक भटनागर, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान स्माल एण्ड मीडियम न्यूज पेपर जन फोरम, राजस्थान.

‘एक सरकारी संस्था को इस तरह का कार्य करने की क्या आवश्यकता पड़ी कि पत्रकारों को भी खरीदने की कोशिश की गई। इसके पीछे कुछ खास  ही घोटाला प्रतीत होता है। इस मामले की जांच उच्च स्तर पर कराने की आवश्यकता है।’ – इंद्रकुमार चढ्ढा, अध्यक्ष, जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एसोसिऐशन.

जेडीए

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0 Comments

  1. raj

    January 17, 2011 at 11:30 am

    devesh bhai aap se sahi bola but jo bhi ho raha h sahi nai h

  2. raj sharma

    January 14, 2011 at 12:51 pm

    yah jo bhi hua acha nai hua .logon ka eak media per hi to trust hota h use bhi govt. & govt oficers ne manage kerna start ker diya h
    ab samj nai aata kis per trust kere aur kis per nai
    really horrible case
    CM ko es per koi action lena chaiye

  3. devesh jani

    January 14, 2011 at 10:13 am

    sab hamam me na…….h?. es aakhbar ne bildar or riportaro ke nam ujagar nhi kiy.aachaa kiya? sudhi pathak sab janta h ki kon kon se patrkar h or konsa bildar h. dono bade akhbaro ne bhi chapa h . prakash kunj ne to khabro ke piche ki khani chapi h .

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