: राजस्थान पत्रिका के संपादक भुवनेश जैन ने संपादकीय लिखकर पेश की सफाई : राजस्थान के सबसे बड़े दैनिक राजस्थान पत्रिका ने भी मान लिया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण ने बीते दिनों पत्रकारों को घूस के बतौर अच्छी खासी रकम दी थी. राजस्थान पत्रिका के आज के अंक में न केवल इस बात को स्वीकार किया गया है बल्कि पत्रिका के संपादक भुवनेश जैन ने फ्रंट पेज एडिटोरियल में यह भी कहा है कि उनके संवाददाताओं- मुकेश कुमार और अभिषेक श्रीवास्तव ने जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा की गई इस पेशकश को ठुकरा दिया था.
पत्रिका अखबार ने अपने पत्रकारों द्वारा मूल्य आधारित पत्रकारिता का दावा करते हुए कहा है कि जहाँ भी कहीं उसके पत्रकार वैल्यू बेस्ड की जगह प्राइस बेस्ड पत्रकारिता करें, उनकी तुरंत सूचना प्रबंधन को दी जाये. उल्लेखनीय है कि भड़ास4मीडिया पर खबर आने के साथ ही जयपुर के पत्रकारों में वे पत्रकार मीडिया की निगाहों में आ गए हैं, जो जेडीए (जयपुर डेवलपमेंट अथारिटी) की बीट कवर करते हैं और उनमें से कई उपकृत हुए हैं. भड़ास के पास यह सूचना है कि जेडीए ने पत्रकारों को पटाये रखने के लिए एक्सिस बैंक के कैश कार्ड के जरिये अच्छी खासी रकम खर्च की है. अब जबकि इस मामले में बवाल मच गया है तो जेडीए कमिश्नर पन्त अपनी खाल बचाने के लिए मामले की जांच इन दिनों सचिव पद का जिम्मा संभाल रहीं आरएएस अधिकारी शुचि शर्मा से करवा रहे हैं.
उधर एक सूचना यह भी है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले की जांच जेडीए से बाहर के किसी अधिकारी से कराने के मूड में है और एक-दो दिन में जांच यूडीएच सेक्रेटरी जीएस संधू को सौंपी जा सकती है. सत्ता के गलियारों में यह चर्चा आम है कि जेडीए कमिश्नर सुधांश पन्त और नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के बीच अरसे से चली आ रही तनातनी के बीच पत्रकारों को कैश कार्ड का यह चढ़ाव इसीलिए किया गया ताकि उनका रुख कमिश्नर के साथ रहे. लेकिन विवाद इतना बढ़ गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय भी अब जाँच को लेकर गंभीर हो गया है. जांच हुई तो जेडीए की पीआरओ नर्बदा इन्दोरिया के लिए तो मुश्किल कड़ी होगी ही, जेडीए कमिश्नर पन्त भी सवालों के घेरे में आ सकते हैं. इस बीच पत्रकारिता में शुचिता के पक्षधर कुछ पत्रकार पूरे मामले को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सामने भी ले जाने की तैयारी में हैं. ऐसा हुआ तो उन पत्रकारों के चेहरे भी बेनकाब हो जायेंगे, जो ईमानदारी के भाषण तो खूब झाड़ते हैं, लेकिन खुद ईमानदार नहीं.












ankur singh
January 19, 2011 at 4:14 am
haryana mai bhi journilst ko isse terah se purskar diye gaye the. eek ya do newspaper walo ne iss per rok lagai hai per yah dikhva se jayda nahi hai. hudda govt ne esse logo ko purskar de diya jinhe hindi tak nahi likhni aati. har newspaper mai kisi na kisi ko purskar diye gaye.
SANJAY Bhati Editor SUPREME NEWS - 9811291332
January 19, 2011 at 3:16 am
Bade Bhai january 2010 me greater noida k bade akhbaro k patarkar be greater noida pradhikaran k adhakariyo k sath Thailand me ghumne gaye the . ab app hi anuman lago ki patarkaro ko videsh yatra kyo karai gyi .
deepak
January 18, 2011 at 4:44 pm
patrika ne achhi shuruaat ki hai.kya bhaskar bhi kuchh sochega ?
sanyogita
January 18, 2011 at 4:57 pm
jda ke patrakar bechare,muft me mare gaye…maze baat ye hai ki sab ab kah rahe hai ki ‘MAI US VAKT NAHI THA’..ARE BAHI TO CARD KISE BATE,YE TO KHULASA HO..KOUN KOUN ISME SHAMIL HAI…PATRIKA BHASKAR,ETV RAJASTHAN JAISE GROUP SHAMIL NA HO..ASA HO NAHI HO SAKTA..BHASKAR,PATRIKA KE MALIKON KO HAR SHAHAR ME SARKARI ZAMEEN CHAIYE,MAGAR UNKE PATRAKAR NA LE…BHUVNESH JI,YE KITNA JUSTOFIED HAI…???ETV TO SARKAR KO JITNA OBLISE KARTA HAI,UTNA TO DARBAR KE CHARAN BHAAT BHI NAHI KARTE..DIN RAAT JDC,SANDHU,DHARIWAL KI PATTI PATRAKARITA,BEWKUFI BHARI PATTIYAN CHALANE WALE IS SE KAISE CHHUT RAH GAYE..??? SAB SACHIN TENDULKAR NAHI HOTE….
sanyogita
January 18, 2011 at 5:01 pm
sab sachin, tendulkar nahi hote…
Abhishek Saxena
January 18, 2011 at 9:36 am
ye toh had hai yaar, agar kisi ne kuchh paise le bhi liye toh kya galat ho gaya? kya Yashwant aur bhadas wale chanda nahi maang rahe..? apna kaam chalane ke liye..yumhare ghar mein agar vish ka paudha ugaa toh wo amrit nahi ho jayega samjhe..behtar hai ki jaipur ke journalists ke bare mein aisi batein na hi chhapi jayen warna sabka sach saamne aaya toh bahuton ko mushkil hogi. kisi ka koi kuchh ukhaad nahi payega ki JDA se paise le liye.kaun se media ka malik aisa nahi hai jisne JDA ki kripa na li ho.kuch hajaar rupye agar beat reporters ne liye toh mare ja rahe ho..paapi kahin ke..unka kya jo hajaron karod dakaar gaye hain. Neechta ki bhi koi seema akhir hai ki nahi tum logon mein.
Abhishek saxena
बिल्लू
January 18, 2011 at 7:32 am
मूल्य आधारित पत्रकारिता….इसलिए ये जीडीए कवर करने वाले पत्रकार मूल्य वसूल कर रहे थे।