नाइन एक्स : यह चैनल मुंबई में स्ट्रिंगरों को आठ माह से भुगतान नहीं दे सका है। निराश स्ट्रिंगर दो महीनों से खबर नहीं भेज रहे। सूत्रों के अनुसार अप्रैल, 2008 में चैनल ने सात स्ट्रिंगर ज्वाइन कराए। इन्हें चार-चार जिलों का जिम्मा दिया गया। उन्हें प्रति स्टोरी 2 हजार एवं प्रति बाइट एक हजार देना तय हुआ। दो माह बाद चैनल ने पांच-पांच सौ रुपये बढ़ाने की घोषणा भी की। चार माह तक पैसा न मिलने पर स्ट्रिंगरों ने मांगना शुरू किया तो चैनल की तरफ से उन्हें टाला जाने लगा। एक स्ट्रिंगर के मुताबिक किसी के 50 हजार फंसे है तो किसी के 60 हजार। चैनल से जुड़े लोग कहते हैं कि दिक्कत उन दिनों के मुंबई के इंचार्ज के बिल दिए बगैर इस्तीफा देने से पैदा हुई लेकिन सूत्रों का कहना है कि चैनल मंदी की मार के चलते पस्ती की हालत में है और लगातार बुरी खबरें ही आ रही हैं।
एनडीटीवी : इस न्यूज चैनल के बारे में खबर है कि यहां पत्रकारों को सुबह घर ड्राप करने की सुविधा पर विराम लगा दिया गया है। पहले सभी को सुबह की ड्रापिंग मिलती थी। चाय-काफी के मद में भी कटौती की खबर है। कई अन्य तरह की कवायद भी की जा रही है ताकि मंदी के चलते चैनल के बढ़ते घाटे को कम किया जा सके।
आईबीएन7 : इस न्यूज चैनल में कास्ट कटिंग के नाम पर फोन बिल पर गाज गिरा दी गई है। सूत्रों के अनुसार फोन बिल के मद में दिए जाने वाले पैसे में अब पचास फीसदी तक की कटौती कर दी गई है। यहां फ्री डिनर और ब्रेकफास्ट की सुविधा को भी टाटा बोल दिया गया है। पहले नाइट शिफ्ट के दौरान फ्री डिनर एवं ब्रेकफास्ट की व्यवस्था थी।
दैनिक जागरण : इस नंबर वन अखबार के व्यवस्थापकों की तरफ से संपादकों से स्टाफ के काम का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार प्रबंधन ने संपादकों से कहा है कि कौन आदमी कितना काम करता है, कितने पेज बना पाता है जैसी जानकारियां भेजी जाए। इस फरमान से जागरण कर्मियों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।
नवभारत टाइम्स : कई मीडिया हाउसों ने कास्ट कटिंग के लिए अखबारों में पेज घटा दिए हैं। कुछ अखबारों ने दो पन्ने कम किए हैं तो कुछ ने साप्ताहिक परिशिष्ट के पेजों में कटौती कर डाली है। नवभारत टाइम्स में एक पेज घटाए जाने की खबर है। नभाटा के कई आफिसों से कई लोगों के निकाले जाने की भी खबर है। एक अखबार ने फरमान जारी किया है कि विज्ञापन के स्पेस के आधार पर पन्नों की संख्या तय की जाए। एक अखबार ने अपने यहां कामन पेज बढ़ाकर प्लेटों की संख्या कम कर दी है ताकि खर्चा बचे।











