छह महीने पहले अपहृत कर मारे गए पत्रकार तेजबहादुर के परिवार पर सशस्त्र अपराधियों ने जानलेवा हमला बोल दिया. हमलावरों ने पत्रकार के दो पुत्र, एक पुत्री, पत्नी तथा भतीजे को चाकुओं से गोद डाला. गंभीर हालत में सभी को चिकित्सालय में भर्ती कराया गया. बड़े पुत्र दिलीप की हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कालेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया गया है. इस घटना के विरोध में शुक्रवार को पूरा रामकोला कस्बा बंद रहा. इस दौरान पुलिस और लोगों में नोकझोंक भी हुई. पत्रकार की पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
हमले में घायल रानी देवी ने पुलिस को दी गयी तहरीर में कहा है कि रामकोला उपनगर के वार्ड नं. 5 स्थित उनके घर के बगल में रहने वाले सिप्पू पुत्र हमीदुल्लाह, खुर्शीद पुत्र शाह मुहम्मद, अमीना खातून पुत्री शाह मुहम्मद, फिरोज पुत्र हमीद्दुल्लाह, शमशाद पुत्र हमीद्दुल्लाह, मुस्तफा पुत्र शाह मुहम्मद, बेबी पुत्री मुस्तफा व शाह मुहम्मद समेत कुछ अज्ञात लोग उनके पुत्र दिलीप से दरवाजा खोलने को कहा. दिलीप के दरवाजा खोलते ही सभी ने उस पर हमला कर दिया. दिलीप के बेहोश होकर गिर जाने के बाद हमलावरों ने मेरी लड़की अन्नू, प्रवीण व छोटू सहित मुझे धारदार हथियार व असलहों से वार करते हुये बुरी तरह घायल कर दिया.
शोर सुनकर अगल-बगल के लोग जैसे ही अपने-अपने घरों से निकले. हमलावर भागकर शाह मुहम्मद के घर में घुस गये. इस दौरान गंभीर रूप से घायल दिलीप ने साहस दिखाते हुए एक हमलावर को पकड़ लिया. सूचना के काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची. पत्रकार के दरवाजे पर खड़ी दो मोटर साइकिल पल्सर यूपी 57 एफ-8307 व यामहा एल्बो यूपी 53 एएफ-55 को पुलिस ने कब्जे में ले लिया. सभी घायलों को अस्पताल पहुंचवाया.
घटना के विरोध में बाजार पूरी तरह बंद रहा. इस दौरान नगरवासियों व नेताओं से पुलिस की झड़प भी हुई. लोगों इसलिए गुस्से में थे कि घटनास्थल से महज 150 मीटर की दूरी पर स्थित थाना से घटनास्थल तक पहुंचने में पुलिस को एक घंटे से ज्यादा समय लग गया. जबकि उन्हें एक हमलावर के पकड़े जाने की सूचना दे दी गई थी. तहरीर के आधार पर रामकोला पुलिस ने नामजद सभी 8 लोगों के विरुद्ध धारा 147, 148, 149, 452, 307 व 323 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज करते हुये सिप्पू, अमीना खातून, शाह मुहम्मद व मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया है.
उल्लेखनीय है कि पत्रकार तेज बहादुर की अपहरण के बाद 8 जुलाई 2010 को हत्या कर दी गई थी. 10 जुलाई को उनकी लाश बिहार सीमा के पास मिली थी.












madan kumar tiwary
January 22, 2011 at 4:06 am
वैसे तो यूपी पुलिस एक संस्थागत अपराधिक गिरोह के रुप में कार्य कर रही है , परन्तु ला एंड आर्डर की ऐसी गिरी स्थिति की कल्पना नही की जा सकती । हालांकि दोष सिर्फ़ पुलिस को नही दिया जा सकता , जहां कानून बनाने वाले हीं अपराध कर रहे हैं , वहां पुलिस और अधिकारियों से कार्यकुशलता की आशा नही की जा सकती । यह पत्रकार हत्या कांड क्या है , किस परिस्थिति में हत्या हुई और कौन लोग संलग्न थें इस पर भी प्रकाश डालते तो अच्छा होता ।
s
January 22, 2011 at 5:16 am
patrkar par hamla galat hi